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Bilaspur News: दिव्यांगों-बुजुर्गों के लिए दुर्गम बना श्री नयना देवी मंदिर, न रैंप न लिफ्ट
Fri, 20 Mar 2026 11:47 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 20 Mar 2026 11:47 PM IST
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पालकी और कंधों के सहारे दर्शन को मजबूर श्रद्धालु
पिछली सरकार में प्रस्तावित थी छह करोड़ की लिफ्ट परियोजना
करोड़ों की आमदनी के बावजूद भी विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ में सुविधाओं का अभाव
तरूणेश शर्मा
श्री नयना देवी जी (बिलासपुर)। विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री नयना देवी मंदिर में दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए न तो रैंप की व्यवस्था है और न ही लिफ्ट की सुविधा, जिसके चलते चलने-फिरने में असमर्थ श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सौ से अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यह चढ़ाई दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए बेहद कठिन साबित हो रही है। कई बार श्रद्धालुओं को करीब एक किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर या पालकी के सहारे मंदिर परिसर तक पहुंचाया जाता है। चलने में असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए पालकी ही एकमात्र सहारा बनी हुई है। परिजन या मजदूर उन्हें कंधों पर उठाकर मंदिर तक पहुंचाते हैं। यह न केवल महंगा पड़ता है बल्कि कई बार जोखिम भरा भी साबित होता है। मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए कोई स्थायी सुविधा विकसित नहीं की गई है। प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में श्रद्धालुओं को खुद ही संघर्ष करना पड़ता है। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में मंदिर तक लिफ्ट लगाने की योजना बनाई गई थी। इस परियोजना के लिए करीब छह करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया गया था। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही विधानसभा चुनाव हो गए और सत्ता परिवर्तन के साथ यह योजना ठप पड़ गई। करीब डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
सरकार और प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को हर सुविधा देने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर दिव्यांग और बुजुर्ग सबसे अधिक उपेक्षित नजर आते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें दर्शन के लिए अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जो आस्था के इस प्रमुख केंद्र के अनुरूप नहीं है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की मांग है कि पार्किंग से मंदिर परिसर तक रैंप बनाया जाए, ताकि व्हीलचेयर के माध्यम से भी लोग आसानी से पहुंच सकें। प्रदेश सरकार ने श्री नयना देवी मंदिर में सौंदर्यीकरण और अन्य सुविधाओं के लिए करीब 100 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की है। इसका काम तो शुरू हुआ है, लेकिन अभी भी लिफ्ट और रैंप तक की सुविधाएं नहीं है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन दिव्यांग व बुजुर्ग श्रद्धालुओं की इस समस्या को प्राथमिकता देंगे या फिर यह मुद्दा केवल घोषणाओं तक ही सीमित रहेगा। संवाद
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पिछली सरकार में प्रस्तावित थी छह करोड़ की लिफ्ट परियोजना
करोड़ों की आमदनी के बावजूद भी विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ में सुविधाओं का अभाव
तरूणेश शर्मा
श्री नयना देवी जी (बिलासपुर)। विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री नयना देवी मंदिर में दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए न तो रैंप की व्यवस्था है और न ही लिफ्ट की सुविधा, जिसके चलते चलने-फिरने में असमर्थ श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सौ से अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यह चढ़ाई दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए बेहद कठिन साबित हो रही है। कई बार श्रद्धालुओं को करीब एक किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर या पालकी के सहारे मंदिर परिसर तक पहुंचाया जाता है। चलने में असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए पालकी ही एकमात्र सहारा बनी हुई है। परिजन या मजदूर उन्हें कंधों पर उठाकर मंदिर तक पहुंचाते हैं। यह न केवल महंगा पड़ता है बल्कि कई बार जोखिम भरा भी साबित होता है। मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए कोई स्थायी सुविधा विकसित नहीं की गई है। प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में श्रद्धालुओं को खुद ही संघर्ष करना पड़ता है। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में मंदिर तक लिफ्ट लगाने की योजना बनाई गई थी। इस परियोजना के लिए करीब छह करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया गया था। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही विधानसभा चुनाव हो गए और सत्ता परिवर्तन के साथ यह योजना ठप पड़ गई। करीब डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
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सरकार और प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को हर सुविधा देने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर दिव्यांग और बुजुर्ग सबसे अधिक उपेक्षित नजर आते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें दर्शन के लिए अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जो आस्था के इस प्रमुख केंद्र के अनुरूप नहीं है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की मांग है कि पार्किंग से मंदिर परिसर तक रैंप बनाया जाए, ताकि व्हीलचेयर के माध्यम से भी लोग आसानी से पहुंच सकें। प्रदेश सरकार ने श्री नयना देवी मंदिर में सौंदर्यीकरण और अन्य सुविधाओं के लिए करीब 100 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की है। इसका काम तो शुरू हुआ है, लेकिन अभी भी लिफ्ट और रैंप तक की सुविधाएं नहीं है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन दिव्यांग व बुजुर्ग श्रद्धालुओं की इस समस्या को प्राथमिकता देंगे या फिर यह मुद्दा केवल घोषणाओं तक ही सीमित रहेगा। संवाद
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