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Bilaspur News: शांति भंग करने के मामले में एसडीएम का आदेश निरस्त

Sun, 26 Jul 2026 12:29 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 12:29 AM IST
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SDM's order in breach of peace case quashed.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिलासपुर बोले-बीएनएसएस के तहत जांच किए बिना कार्रवाई समाप्त करना गलत
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वैधानिक समय सीमा समाप्त होने से दोबारा सुनवाई का आदेश नहीं

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने शांति भंग की आशंका से संबंधित एक मामले में एसडीएम स्वारघाट के आदेश को प्रक्रियागत रूप से त्रुटिपूर्ण करार देते हुए उसकी दलीलों को निरस्त कर दिया। हालांकि अदालत ने मामले को दोबारा एसडीएम के पास भेजने से इन्कार करते हुए कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में निर्धारित छह माह की वैधानिक अवधि समाप्त हो चुकी है, इसलिए यह कार्रवाई कानूनन स्वतः समाप्त मानी जाएगी।मामला श्री नयना देवी जी उपमंडल के गांव सुन्नन निवासी सोम राज ने गांव के ही रत्तन लाल के खिलाफ शांति भंग की आशंका को लेकर शुरू हुई कार्रवाई से जुड़ा था। एसडीएम स्वारघाट की अदालत में चल रहे इस मामले में 26 नवंबर 2024 को यह कहते हुए कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी कि मामला दर्ज होने के बाद कोई शांति भंग की घटना सामने नहीं आई। इस आदेश के खिलाफ सोम राज ने अतिरिक्त सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि एसडीएम ने मामले में न तो कोई विधिवत जांच की और न ही पक्षकारों को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया। केवल यह कहकर कार्रवाई समाप्त कर देना कि बाद में कोई घटना नहीं हुई, कानून के अनुरूप नहीं है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि बीएनएसएस की धारा 126 के तहत शुरू होने वाली कार्रवाई निवारक प्रकृति की होती है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के उपस्थित होने के बाद कार्यपालक मजिस्ट्रेट का यह दायित्व है कि वह उपलब्ध सूचना की सत्यता की जांच करे, आवश्यक साक्ष्य रिकॉर्ड करे और उसके बाद ही यह तय करे कि शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र लेने की आवश्यकता है या नहीं। जांच किए बिना कार्यवाही समाप्त करना कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन है।
अदालत ने अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के मधु लिमये बनाम सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट मामले तथा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के देवी राम बनाम राज्य और उर्मिला देवी बनाम राज्य मामलों का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की निवारक कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है। न्यायालय ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाली कार्रवाई में बिना जांच के कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बीएनएसएस की धारा 135(6) के अनुसार ऐसी जांच छह माह के भीतर पूरी होना आवश्यक है। यदि इस अवधि के भीतर विशेष कारण दर्ज कर कार्यवाही आगे बढ़ाने का आदेश नहीं दिया जाता तो कार्रवाई स्वतः समाप्त हो जाती है। रिकॉर्ड में ऐसा कोई आदेश उपलब्ध नहीं था और अब छह माह की अवधि भी समाप्त हो चुकी है। इसलिए मामले को दोबारा एसडीएम के पास भेजना कानूनन संभव नहीं है।
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अदालत ने पुनरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए एसडीएम के आदेश की दलीलों को निरस्त कर दिया, लेकिन दोबारा सुनवाई के लिए मामला वापस भेजने की मांग अस्वीकार कर दी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि शांति भंग की नई और निकट आशंका उत्पन्न होती है तो पुलिस या कोई भी प्रभावित व्यक्ति सक्षम कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष नई सूचना प्रस्तुत कर सकता है, जिस पर कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्रवाई की जाएगी।
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