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Bilaspur News: संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ ने मांगों को लेकर विधायक को सौंपा ज्ञापन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ बिलासपुर इकाई ने मांगों को लेकर विधायक श्री नयन देवी जी रणधीर शर्मा से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। उन्होंने विधायक से उनकी मांगों को पूरा कराने का आग्रह किया।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा एनसीटीई का हवाला देते हुए बीएड की शर्त शास्त्री पर थोपना और बीए,एम वालों को हमारा हक देना निंदनीय है। बीए, एम, करने वालों के साथ शास्त्रियों की तुलना करना न्याय संगत नहीं है। इससे सरकार द्वारा संचालित आठ राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, मंदिर न्यासों द्वारा संचालित चार संस्कृत महाविद्यालय केंद्र, सरकार के दो आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला और निजी चल रहे 15 संस्कृत महाविद्यालय में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थी प्रभावित होंगे। यह सभी संस्थान बंद होने की कगार पर आ जाएंगे। संस्कृत महाविद्यालय में प्राचीन पद्धति से शास्त्रों का अध्ययन कराया जाता है तो वह प्रथा ही समाप्त हो जाएगी। प्रदेश में चार हजार के लगभग पुराने शास्त्री हैं। हजारों की संख्या में संस्कृत महाविद्यालय में शास्त्री की डिग्री प्राप्त कर रहे विद्यार्थी नौकरी की आस लिए अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। इसलिए उनकी मांग को पूरा कराया जाए। इस मौके पर संघ के सचिव कश्मीर शर्मा, प्रदेश मुख्य सलाहकार राज कुमार, संगठन मंत्री पवन गर्ग, मीडिया प्रभारी ललित कुमार, सह मीडिया प्रभारी पुरषोत्तम और बृज मोहन मौजूद रहे।
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बिलासपुर। संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ बिलासपुर इकाई ने मांगों को लेकर विधायक श्री नयन देवी जी रणधीर शर्मा से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। उन्होंने विधायक से उनकी मांगों को पूरा कराने का आग्रह किया।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा एनसीटीई का हवाला देते हुए बीएड की शर्त शास्त्री पर थोपना और बीए,एम वालों को हमारा हक देना निंदनीय है। बीए, एम, करने वालों के साथ शास्त्रियों की तुलना करना न्याय संगत नहीं है। इससे सरकार द्वारा संचालित आठ राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, मंदिर न्यासों द्वारा संचालित चार संस्कृत महाविद्यालय केंद्र, सरकार के दो आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला और निजी चल रहे 15 संस्कृत महाविद्यालय में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थी प्रभावित होंगे। यह सभी संस्थान बंद होने की कगार पर आ जाएंगे। संस्कृत महाविद्यालय में प्राचीन पद्धति से शास्त्रों का अध्ययन कराया जाता है तो वह प्रथा ही समाप्त हो जाएगी। प्रदेश में चार हजार के लगभग पुराने शास्त्री हैं। हजारों की संख्या में संस्कृत महाविद्यालय में शास्त्री की डिग्री प्राप्त कर रहे विद्यार्थी नौकरी की आस लिए अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। इसलिए उनकी मांग को पूरा कराया जाए। इस मौके पर संघ के सचिव कश्मीर शर्मा, प्रदेश मुख्य सलाहकार राज कुमार, संगठन मंत्री पवन गर्ग, मीडिया प्रभारी ललित कुमार, सह मीडिया प्रभारी पुरषोत्तम और बृज मोहन मौजूद रहे।
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