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बघाट बैंक को बहाल करने के लिए 25 करोड़ की जरूरत, शेयर होल्डर-खाताधारक करें मदद : प्रशासक
Mon, 13 Jul 2026 11:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 13 Jul 2026 11:51 PM IST
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सरकार से 15 करोड़ लेंगे, बची हुई राशि, खाताधारक, शेयर होल्डर दें
आरबीआई ने बैंक का लाइसेंस रद्द कर, लिक्विडेट करने का नोटिस
माइनस 26 करोड़ चली गई है बैंक की नेटवर्थ, पॉजिटिव में लाना है जरूरी
बैंक के प्रशासन ने पत्रकारवार्ता कर मांगी मदद, बोले जल्द करेंगे बहाली
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। बघाट को-ऑपरेटिव बैंक सोलन प्रशासक नीरज सूद ने कहा कि बैंक को रिवाइवल करने के लिए करीब 20 से 25 करोड़ रुपये की जरूरत है, जिसमें 15 करोड़ रुपये तक सरकार देने को तैयार है, मगर बचा हुआ पैसा यदि शेयर होल्डरों व खाताधारक देते हैं तो बैंक दोबारा से तीन से चार माह में खड़ा हो सकता है। सोलन में पत्रकारवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि इसमें सभी शेयर होल्डरों व खाताधारकों को अपने ब्याज से कुछ हिस्सा बैंक को देना होगा, जिससे उनका पैसा भी सुरक्षित हो जाएगा क्योंकि उसके बाद बैंक अपनी बात भारतीय रिजर्व बैंक के सामने रख सकता है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में बैंक की नेटवर्थ माइनस 26 करोड़ चली गई है, उसे पॉजिटिव में लाना होगा। उन्होंने बताया कि आरबीआई ने 15 जून 2026 को एक पत्र भेजा जिसमें लिखा गया है कि बैंक का लाइसेंस रद्द कर इसे लिक्विडेट किया जाए। मगर अभी उन्होंने इसका ऑडिट करवाया तो पता चला कि बैंक का रिवाइवल संभव है क्योंकि बैंक की लिक्विडिटी 285 करोड़ है। एसएलआर 219 करोड़ है, जबकि आरबीआई के नॉर्म्स के अनुसार यह 47 करोड़ रखना होता है। सीआरआर 7 करोड़ रखना होता है, जबकि वह 14 करोड़ है। इस दौरान एआरसीएस गिरीश नड्डा समेत बैंक के चेयरमैन राजकुमार कश्यप और लॉ ऑफिसर मौजूद रहे।
इनसेट
रिकवरी को लेकर प्लान
नीरज सूद ने बताया कि बैंक के करीब 380 केस एनपीए हैं, जिसमें 118 करोड़ डिफाल्टरों से लेने हैं। उन्होंने बताया कि कुछ डिफाल्टरों की संपत्तियों की कीमत लोन की राशि से काफी कम निकली। वहीं बैंक ने अभी तक ऐसी 120 संपत्तियां अटैच की हैं, जहां पर कम कीमत आ रही है। साथ ही 59 केस ऐसे हैं, जिसमें डिफाल्टरों से करीब 70 करोड़ की राशि है। एआरसीएस उनसे सरचार्ज कर रहे हैं। वहीं बीओडी के दोषियों पर उन्होंने कहा कि इस पर जांच चल रही है, जो भी इसमें दोषी पाया जाएगा उन पर एफआईआर की जाएगी और संपत्ति भी अटैच होगी। एक माह में सरचार्ज प्रोसिडिंग पूरी हो जाएगी।
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इनसेट
सीए के ऑडिट पर उठे सवाल
बैंक के एनपीए को लेकर भी उन्होंने पहले किए गए सीए के ऑडिट पर सवाल उठाए। नीरज सूद ने कहा कि मौजूदा समय में बैंक का एनपीए 120 करोड़ है, हालांकि पहले यह 107 करोड़ तक बताया जा रहा था और आरबीआई को भी लेटर भेजा गया था, लेकिन यह गड़बड़ी ऑडिट में हुई है। वहीं अब सीए को बदल दिया गया है, जो इसका ऑडिट अब सही ढंग से कर रहे हैं।
इनसेट
रिवाइवल का प्लान
उन्होंने कहा कि बैंक के रिवाइवल को लेकर उन्होंने एक सप्ताह में कई शेयर होल्डरों के साथ बैठक की है, वहीं अब तक 68 लाख रुपये तक के शेयर होल्डर आगे आए हैं। वहीं अब तक कुल 2.61 करोड़ की कंसेंट बैंक के पास आई है। उन्होंने कहा कि बैंक को 20 से 25 करोड़ की नेटवर्थ चाहिए जिससे बैंक आरबीआई के सामने अपना मजबूत पक्ष रख सकता है। उन्होंने कहा कि बैंक ने प्रॉफिट भी 14.50 करोड़ बुक किया है। बैंक के रिवाइवल के लिए यह सब कदम बहुत जरूरी है।
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आरबीआई ने बैंक का लाइसेंस रद्द कर, लिक्विडेट करने का नोटिस
माइनस 26 करोड़ चली गई है बैंक की नेटवर्थ, पॉजिटिव में लाना है जरूरी
बैंक के प्रशासन ने पत्रकारवार्ता कर मांगी मदद, बोले जल्द करेंगे बहाली
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। बघाट को-ऑपरेटिव बैंक सोलन प्रशासक नीरज सूद ने कहा कि बैंक को रिवाइवल करने के लिए करीब 20 से 25 करोड़ रुपये की जरूरत है, जिसमें 15 करोड़ रुपये तक सरकार देने को तैयार है, मगर बचा हुआ पैसा यदि शेयर होल्डरों व खाताधारक देते हैं तो बैंक दोबारा से तीन से चार माह में खड़ा हो सकता है। सोलन में पत्रकारवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि इसमें सभी शेयर होल्डरों व खाताधारकों को अपने ब्याज से कुछ हिस्सा बैंक को देना होगा, जिससे उनका पैसा भी सुरक्षित हो जाएगा क्योंकि उसके बाद बैंक अपनी बात भारतीय रिजर्व बैंक के सामने रख सकता है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में बैंक की नेटवर्थ माइनस 26 करोड़ चली गई है, उसे पॉजिटिव में लाना होगा। उन्होंने बताया कि आरबीआई ने 15 जून 2026 को एक पत्र भेजा जिसमें लिखा गया है कि बैंक का लाइसेंस रद्द कर इसे लिक्विडेट किया जाए। मगर अभी उन्होंने इसका ऑडिट करवाया तो पता चला कि बैंक का रिवाइवल संभव है क्योंकि बैंक की लिक्विडिटी 285 करोड़ है। एसएलआर 219 करोड़ है, जबकि आरबीआई के नॉर्म्स के अनुसार यह 47 करोड़ रखना होता है। सीआरआर 7 करोड़ रखना होता है, जबकि वह 14 करोड़ है। इस दौरान एआरसीएस गिरीश नड्डा समेत बैंक के चेयरमैन राजकुमार कश्यप और लॉ ऑफिसर मौजूद रहे।
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रिकवरी को लेकर प्लान
नीरज सूद ने बताया कि बैंक के करीब 380 केस एनपीए हैं, जिसमें 118 करोड़ डिफाल्टरों से लेने हैं। उन्होंने बताया कि कुछ डिफाल्टरों की संपत्तियों की कीमत लोन की राशि से काफी कम निकली। वहीं बैंक ने अभी तक ऐसी 120 संपत्तियां अटैच की हैं, जहां पर कम कीमत आ रही है। साथ ही 59 केस ऐसे हैं, जिसमें डिफाल्टरों से करीब 70 करोड़ की राशि है। एआरसीएस उनसे सरचार्ज कर रहे हैं। वहीं बीओडी के दोषियों पर उन्होंने कहा कि इस पर जांच चल रही है, जो भी इसमें दोषी पाया जाएगा उन पर एफआईआर की जाएगी और संपत्ति भी अटैच होगी। एक माह में सरचार्ज प्रोसिडिंग पूरी हो जाएगी।
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सीए के ऑडिट पर उठे सवाल
बैंक के एनपीए को लेकर भी उन्होंने पहले किए गए सीए के ऑडिट पर सवाल उठाए। नीरज सूद ने कहा कि मौजूदा समय में बैंक का एनपीए 120 करोड़ है, हालांकि पहले यह 107 करोड़ तक बताया जा रहा था और आरबीआई को भी लेटर भेजा गया था, लेकिन यह गड़बड़ी ऑडिट में हुई है। वहीं अब सीए को बदल दिया गया है, जो इसका ऑडिट अब सही ढंग से कर रहे हैं।
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रिवाइवल का प्लान
उन्होंने कहा कि बैंक के रिवाइवल को लेकर उन्होंने एक सप्ताह में कई शेयर होल्डरों के साथ बैठक की है, वहीं अब तक 68 लाख रुपये तक के शेयर होल्डर आगे आए हैं। वहीं अब तक कुल 2.61 करोड़ की कंसेंट बैंक के पास आई है। उन्होंने कहा कि बैंक को 20 से 25 करोड़ की नेटवर्थ चाहिए जिससे बैंक आरबीआई के सामने अपना मजबूत पक्ष रख सकता है। उन्होंने कहा कि बैंक ने प्रॉफिट भी 14.50 करोड़ बुक किया है। बैंक के रिवाइवल के लिए यह सब कदम बहुत जरूरी है।