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द्रोवड़-सराईघाटी सड़क में दो साल में ही पड़ गए गड्ढे
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द्रोवड़ सराई घाटी की खस्ताहाल सड़क।संवाद
- फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। सदर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत द्रोवड़ से सराईघाटी तक की करीब पांच किलोमीटर सड़क वाहन चलाने वालों के लिए खतरे से कम नहीं है। इस सड़क पर कहीं पर गड्ढे पडे़ हैं तो कहीं पूरी सड़क नाले में तब्दील हो गई है। इस सड़क का निर्माण और टारिंग का कार्य दो साल पहले करीब एक करोड़ की लागत से लोक निर्माण विभाग ने करवाया था। गुणवत्तापूर्ण कार्य न होने से दो साल में ही यह नाले में तब्दील हो गई है।
द्रोवड़ से सराईघाटी तक इस रोड की लंबाई करीब पांच किलोमीटर है। वहां से आगे करीब 300 मीटर रोड अल्ट्रोटेक सीमेंट फैक्ट्री के अधीन आता है। 300 मीटर में तो कोई वाहन ले जाना भी खतरे से खाली नहीं है। इसके बावजूद कंपनी के स्कूल में पढ़ने वाले स्थानीय बच्चों की बसें वहीं से होकर गुजरती हैं। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। पंचायत प्रधान द्रोवड़ निशा ठाकुर ने बताया कि कई बार लोक निर्माण विभाग और कंपनी के अधिकारियों से इसके बारे में बात की, लेकिन विभाग कहता है कि यह 300 मीटर का क्षेत्र उनके दायरे में नहीं है। वहीं कंपनी वाले भी इसकी मरम्मत का कार्य यह कहकर नहीं करवा रहे हैं कि यह क्षेत्र उनका नहीं है। ऐसे में यह तय करना मुश्किल हो गया है कि इस सड़क पर अगर कोई हादसा हुआ तो उसका जिम्मेवार कौन होगा।
निशा ठाकुर ने कहा कि इस क्षेत्र के अलावा पूरी सड़क का यही हाल है। सबसे बड़ा सवाल तो सड़क के कार्य की गुणवत्ता पर उठा है। विभाग ने जब ठेकेदार से यह कार्य करवाया तो इसकी गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा गया और परिणाम यह हुआ कि सड़क तालाब नजर आती है। दोपहिया वाहन चालकों का तो इस पर चलना मुश्किल है। चार पहिया वाहन चालकों को भी सफर करना खतरे से खाली नहीं है। कहा कि उन्होंने शनिवार को फिर से विभाग को इसकी मरम्मत के लिए ज्ञापन सौंपा है। अगर कार्य नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ विभाग के अधिशासी अभियंता के कार्यालय का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे। वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेंद्र जुबलानी ने कहा कि मामला ध्यान में आ गया है। सड़क का जल्द ही निरीक्षण कर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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द्रोवड़ से सराईघाटी तक इस रोड की लंबाई करीब पांच किलोमीटर है। वहां से आगे करीब 300 मीटर रोड अल्ट्रोटेक सीमेंट फैक्ट्री के अधीन आता है। 300 मीटर में तो कोई वाहन ले जाना भी खतरे से खाली नहीं है। इसके बावजूद कंपनी के स्कूल में पढ़ने वाले स्थानीय बच्चों की बसें वहीं से होकर गुजरती हैं। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। पंचायत प्रधान द्रोवड़ निशा ठाकुर ने बताया कि कई बार लोक निर्माण विभाग और कंपनी के अधिकारियों से इसके बारे में बात की, लेकिन विभाग कहता है कि यह 300 मीटर का क्षेत्र उनके दायरे में नहीं है। वहीं कंपनी वाले भी इसकी मरम्मत का कार्य यह कहकर नहीं करवा रहे हैं कि यह क्षेत्र उनका नहीं है। ऐसे में यह तय करना मुश्किल हो गया है कि इस सड़क पर अगर कोई हादसा हुआ तो उसका जिम्मेवार कौन होगा।
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निशा ठाकुर ने कहा कि इस क्षेत्र के अलावा पूरी सड़क का यही हाल है। सबसे बड़ा सवाल तो सड़क के कार्य की गुणवत्ता पर उठा है। विभाग ने जब ठेकेदार से यह कार्य करवाया तो इसकी गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा गया और परिणाम यह हुआ कि सड़क तालाब नजर आती है। दोपहिया वाहन चालकों का तो इस पर चलना मुश्किल है। चार पहिया वाहन चालकों को भी सफर करना खतरे से खाली नहीं है। कहा कि उन्होंने शनिवार को फिर से विभाग को इसकी मरम्मत के लिए ज्ञापन सौंपा है। अगर कार्य नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ विभाग के अधिशासी अभियंता के कार्यालय का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे। वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेंद्र जुबलानी ने कहा कि मामला ध्यान में आ गया है। सड़क का जल्द ही निरीक्षण कर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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