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रोड अलाइनमेंट में बदलाव नहीं जो शपथ पत्र दें एनएचएआई
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन रोड अलाइनमेंट बदलने के मामले को लेकर एनएचएआई घिरता हुआ नजर आ रहा है। केंद्रीय सूचना आयोग के पास एक आरटीआई की अपील की सुनवाई के दौरान एनएचएआई ने दावा किया था कि रोड अलाइनमेंट प्लान के साथ कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। जबकि प्रार्थी पूर्व सैनिक मदन लाल शर्मा ने साक्ष्य रखे थे कि करीब 9 गांव में प्लान बिना किसी मंजूरी बदला गया है। जबकि अन्य क्षेत्रों में जांच जारी है जिसको आधार मानते हुए केंद्रीय सूचना आयुक्त दिव्य प्रकाश सिन्हा ने एनएचएआई को आदेश जारी किए हैं कि अगर रोड अलाइनमेंट के साथ कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है तो वह इस संबंध में 15 दिनों के अंदर शपथ पत्र दायर करें। उसकी एक प्रति शिकायत कर्ता को भी मुहैया करवाई जाए।
उल्लेखनीय है कि फोरलेन निर्माण के दौरान कई स्थानों में रोड अलाइनमेंट को बदला गया है जिसकी कई विभागों ने जांच के बाद पुष्टि की है लेकिन इसके बाद भी एनएचएआई अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। रोड अलाइनमेंट बदलने से क्षेत्र के लोगों और पर्यावरण को भी नुकसान हुआ है।
इसको लेकर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने साल 2012 से 2017 तक आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी थी कि कहां-कहां रूट प्लान बदला गया है। प्लान बदलने के लिए ली गई अनुमति की कॉपी भी साथ मांगी गई थी। इसके बाद एनएचएआई ने साफ मना किया था कि रूट प्लान नहीं बदला गया है। जबकि वन विभाग और भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई तथा राजस्व विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में साफ कहा है कि रूट प्लान बदला गया है।
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इसमें एक अन्य जांच के बाद पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भी प्लान बदलने की पुष्टि कर चुका है। इन सभी विभाग के दस्तावेजों को आधार मानते हुए अब केंद्रीय सूचना आयोग ने एनएचएआई को इस संबंध में शपथ पत्र देने को कहा है कि अगर रूट नहीं बदला गया है तो।
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उल्लेखनीय है कि फोरलेन निर्माण के दौरान कई स्थानों में रोड अलाइनमेंट को बदला गया है जिसकी कई विभागों ने जांच के बाद पुष्टि की है लेकिन इसके बाद भी एनएचएआई अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। रोड अलाइनमेंट बदलने से क्षेत्र के लोगों और पर्यावरण को भी नुकसान हुआ है।
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इसको लेकर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने साल 2012 से 2017 तक आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी थी कि कहां-कहां रूट प्लान बदला गया है। प्लान बदलने के लिए ली गई अनुमति की कॉपी भी साथ मांगी गई थी। इसके बाद एनएचएआई ने साफ मना किया था कि रूट प्लान नहीं बदला गया है। जबकि वन विभाग और भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई तथा राजस्व विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में साफ कहा है कि रूट प्लान बदला गया है।
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इसमें एक अन्य जांच के बाद पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भी प्लान बदलने की पुष्टि कर चुका है। इन सभी विभाग के दस्तावेजों को आधार मानते हुए अब केंद्रीय सूचना आयोग ने एनएचएआई को इस संबंध में शपथ पत्र देने को कहा है कि अगर रूट नहीं बदला गया है तो।