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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण की जांच के लिए कमेटी गठित की जाए
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान भारत सरकार की मंजूरी के बिना बदले गए रोड अलाइनमेंट प्लॉन पर वन मंडल अधिकारी बिलासपुर ने उपायुक्त बिलासपुर को पत्र लिख कर एक संयुक्त कमेटी बनाने का आग्रह किया है ताकि जिले में अन्य स्थानों पर बदले गए रूट की भी जांच हो सके। वन मंडल अधिकारी ने इसके लिए जिला प्रशासन, वन विभाग, एनएचएआई, भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई बिलासपुर, सभी तहसीलों के उपमंडल अधिकारियों की एक संयुक्त कमेटी बनाने की मांग की है। डीएफओ सरसोज भाई पटेल के कार्यालय से पत्र संख्या डी - बीएलपी / एनएचएआई (वीओआरई-2) /4042-54 के तहत उपायुक्त से कमेटी गठन की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि फोरलेन निर्माण के दौरान स्वारघाट उपमंडल व सदर क्षेत्र के तहत आने वाले नौ गांव में एनएचएआई ने अपनी सुविधा के अनुसार 9 गांवों में रोड अलाइनमेंट प्लान बदल डाला था जिसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश सरकार ने केंद्र को भी भेज दी है। इसके बाद फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित कमेटी ने जलवायु एवं पर्यावरण परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार को लिखा था कि सरकार ने अधूरी जांच की रिपोर्ट दी है। इस संबंध में समिति ने 90 पन्नों के साक्ष्य भी साथ भेजे थे।
इसके बाद मंत्रालय की ओर से इस संबंध में जांच के आदेश आए थे जिस पर कार्रवाई करते हुए वन विभाग के मंडल अधिकारी बिलासपुर ने उपायुक्त से सहयोग मांगा है ताकि गरामोड़ा से बलोह तक पूरी सड़क निर्माण की जांच हो सके। समिति ने मंत्रालय को लिख कर भेजा है कि वन विभाग की एनओसी कहीं और जगह की थी, जबकि सड़क का निर्माण कहीं और जगह किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य मांगें भी भेजी गई हैं।
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उल्लेखनीय है कि फोरलेन निर्माण के दौरान स्वारघाट उपमंडल व सदर क्षेत्र के तहत आने वाले नौ गांव में एनएचएआई ने अपनी सुविधा के अनुसार 9 गांवों में रोड अलाइनमेंट प्लान बदल डाला था जिसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश सरकार ने केंद्र को भी भेज दी है। इसके बाद फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित कमेटी ने जलवायु एवं पर्यावरण परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार को लिखा था कि सरकार ने अधूरी जांच की रिपोर्ट दी है। इस संबंध में समिति ने 90 पन्नों के साक्ष्य भी साथ भेजे थे।
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इसके बाद मंत्रालय की ओर से इस संबंध में जांच के आदेश आए थे जिस पर कार्रवाई करते हुए वन विभाग के मंडल अधिकारी बिलासपुर ने उपायुक्त से सहयोग मांगा है ताकि गरामोड़ा से बलोह तक पूरी सड़क निर्माण की जांच हो सके। समिति ने मंत्रालय को लिख कर भेजा है कि वन विभाग की एनओसी कहीं और जगह की थी, जबकि सड़क का निर्माण कहीं और जगह किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य मांगें भी भेजी गई हैं।
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