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जीवन जीने की कला है प्रज्ञा पुराण कथा : शशिकांत
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-घुमारवीं के बजौहा वार्ड में 11 कुंडीय गायत्री महायज्ञ आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के सौजन्य से घुमारवीं के बजौहा वार्ड में प्रज्ञा पुराण कथा और 11 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में शांतिकुंज हरिद्वार से प्रतिनिधि के रूप में शशिकांत सिंह ने कहा कि प्रज्ञा पुराण कथा जीवन जीने की कला है। यह अन्य कथाओं से अलग हट कर जीवन जीने का तरीका बताती है। उन्होंने महाऋषि नारद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नारद ब्रह्मा जी के मानस पुत्र भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। नारद को सृष्टि का पहला संदेश वाहक और पत्रकार माना जाता है। यह ऐसे ऋषि थे जिनकी वाणी को कोई नकार नहीं सकता। उन्होंने अक्षय तृतीया पर्व के महत्व के साथ ही भगवान परशुराम के जीवन पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्य यजमान के रूप में श्याम लाल धर्माणी, उनके परिजनों के अलावा गायत्री परिवार से जुड़े देशराज शर्मा, राजकुमारी, संतोष भारद्वाज, रवेल सिंह राणा, बीएल धर्माणी और अन्य उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के सौजन्य से घुमारवीं के बजौहा वार्ड में प्रज्ञा पुराण कथा और 11 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में शांतिकुंज हरिद्वार से प्रतिनिधि के रूप में शशिकांत सिंह ने कहा कि प्रज्ञा पुराण कथा जीवन जीने की कला है। यह अन्य कथाओं से अलग हट कर जीवन जीने का तरीका बताती है। उन्होंने महाऋषि नारद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नारद ब्रह्मा जी के मानस पुत्र भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। नारद को सृष्टि का पहला संदेश वाहक और पत्रकार माना जाता है। यह ऐसे ऋषि थे जिनकी वाणी को कोई नकार नहीं सकता। उन्होंने अक्षय तृतीया पर्व के महत्व के साथ ही भगवान परशुराम के जीवन पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्य यजमान के रूप में श्याम लाल धर्माणी, उनके परिजनों के अलावा गायत्री परिवार से जुड़े देशराज शर्मा, राजकुमारी, संतोष भारद्वाज, रवेल सिंह राणा, बीएल धर्माणी और अन्य उपस्थित रहे।
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