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Bilaspur News: नौणी-पड़गल चौक पर वायु प्रदूषण ने लोगों का जीवन दूभर
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ग्राउंड रिपोर्ट
रिहायशी क्षेत्र में क्रशर से उठने वाली धूल से लोग परेशान
चौक पर बेतरतीब डंपिंग से यातायात व्यवस्था प्रभावित
एनक्लोजर, डस्ट प्रमोशन,हरित पट्टी के पालन पर उठे सवाल
रजनीश शर्मा
मलोखर (बिलासपुर)। शिमला-मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य ने जहां क्षेत्र में कनेक्टिविटी की नई उम्मीद जगाई है, वहीं नौणी के पास पड़गल चौक पर हालात उलट तस्वीर पेश कर रहे हैं। यह चौक बिलासपुर और शिमला से आने वाले वाहनों को कीरतपुर-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ता है। इसी मार्ग से क्षेत्र की तीन प्रमुख सीमेंट कंपनियों के हजारों ट्रक हर दिन हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों की ओर निकलते हैं। पास ही रेलवे लाइन का निर्माण भी जारी है।
चौक से सटे गांव के पास स्थापित स्टोन क्रशर को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। क्रशर के आसपास करीब 10 से 15 परिवार रहते हैं। स्थानीय निवासी और टिपर यूनियन के उप प्रधान महेंद्र सिंह का कहना है कि क्रशर चारों तरफ से खुला है। न तो पर्याप्त बाउंड्री बनाई गई है और न ही धूल नियंत्रण के लिए जरूरी एनक्लोजर या डस्ट सप्रेशन सिस्टम नजर आता है। उनका आरोप है कि रात के समय भी क्रशर संचालित किया जाता है। रात को पानी का छिड़काव नहीं होता, जिससे अधिक धूल उड़ती है। खुला पड़ा मटेरियल तेज हवा में हमारे घरों और खेतों तक पहुंचता है। इस संबंध में उपमंडलाधिकारी (सदर) को शिकायत दी गई थी। प्रशासन की ओर से पानी की व्यवस्था और बाउंड्री लगाने का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि रिहायशी क्षेत्र के निकट क्रशर लगाने के लिए क्या प्रभावित परिवारों की सहमति ली गई और क्या पर्यावरणीय स्वीकृति नियमों के तहत प्राप्त की गईं। क्रशर के पास स्थित निजी होटल के मालिक प्रेम सांख्यान ने कहा कि पिछले छह महीनों से होटल परिसर के बाहर धूल की मोटी परत जम रही है। सैलानी यहां रुकने से कतराने लगे हैं। सड़क किनारे बैठना मुश्किल हो गया है। लोगों ने यह भी मुद्दा उठाया कि एम्स बिलासपुर की दूरी यहां से एक किलोमीटर से भी कम है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के कड़े मानकों का पालन होना चाहिए। उनका कहना है कि यदि धूल नियंत्रण के उपाय पर्याप्त नहीं हैं तो यह जनस्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकता है।
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भारी मशीनरी, सीमेंट ट्रकों और निर्माण वाहनों के दबाव के बीच यह चौक इन दिनों धूल के गुबार और लंबे जाम की गिरफ्त में है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या विकास कार्यों के साथ पर्यावरणीय मानकों और ट्रैफिक प्रबंधन की अनदेखी हो रही है।
फोरलेन कंपनी ने जोड़ने वाले बिंदु के आसपास निर्माण सामग्री बेतरतीब ढंग से डंप कर रखी है। सड़क के बीचोबीच पड़े मलबे और मशीनरी के कारण वाहनों की आवाजाही बाधित हो रही है। पीक आवर्स में हालात ऐसे बन जाते हैं कि सीमेंट से लदे ट्रकों, निजी वाहनों और निर्माण मशीनरी की कतारें लग जाती हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संयुक्त निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्यों की गति पर किसी को आपत्ति नहीं, लेकिन पर्यावरणीय मानकों और स्थानीय जनजीवन की अनदेखी स्वीकार्य नहीं हो सकती। संवाद
इनसेट
कंसेंट टू एस्टेब्लिश और कंसेंट टू ऑपरेट लेना अनिवार्य
स्टोन क्रशर संचालन के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कंसेंट टू एस्टेब्लिश और कंसेंट टू ऑपरेट लेना अनिवार्य है। दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी धूल उत्सर्जन बिंदुओं का पूर्ण एनक्लोजर, बैग फिल्टर, ड्राई फॉग या डस्ट सप्रेशन सिस्टम की अनिवार्य व्यवस्था, कन्वेयर बेल्ट को दोनों सिरों तक ढकना, ट्रांसफर प्वाइंट पर नियमित पानी का छिड़काव या एंटी-स्मॉग गन, कच्चे और तैयार माल का ढका भंडारण, पक्की एप्रोच रोड और परिधि में कम से कम तीन कतारों की हरित पट्टी, सीसीटीवी निगरानी और परिवेशीय वायु गुणवत्ता की मॉनिटरिंग जरूरी है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में अनुमति रद्द कर क्रशर बंद कराया जा सकता है।
इनसेट
ट्रैफिक नियंत्रण के लिए पुलिस चौकी की मांग
रेलवे निर्माण, फोरलेन कार्य और सीमेंट ट्रकों के दबाव को देखते हुए स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों ने निर्माण अवधि तक चौक पर पुलिस चेक पोस्ट स्थापित करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्थायी ट्रैफिक प्रबंधन के बिना जाम और दुर्घटना का खतरा बना रहेगा।
कोट
लोगों की समस्या का पता चला है। विकास के साथ यह भी जरूरी है कि लोगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। लोगों को जो भी समस्याएं हैं, उनका समाधान किया जाएगा। कंपनी को इस बारे में दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। -डॉ. राजदीप सिंह, एसडीएम, सदर
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रिहायशी क्षेत्र में क्रशर से उठने वाली धूल से लोग परेशान
चौक पर बेतरतीब डंपिंग से यातायात व्यवस्था प्रभावित
एनक्लोजर, डस्ट प्रमोशन,हरित पट्टी के पालन पर उठे सवाल
रजनीश शर्मा
मलोखर (बिलासपुर)। शिमला-मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य ने जहां क्षेत्र में कनेक्टिविटी की नई उम्मीद जगाई है, वहीं नौणी के पास पड़गल चौक पर हालात उलट तस्वीर पेश कर रहे हैं। यह चौक बिलासपुर और शिमला से आने वाले वाहनों को कीरतपुर-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ता है। इसी मार्ग से क्षेत्र की तीन प्रमुख सीमेंट कंपनियों के हजारों ट्रक हर दिन हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों की ओर निकलते हैं। पास ही रेलवे लाइन का निर्माण भी जारी है।
चौक से सटे गांव के पास स्थापित स्टोन क्रशर को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। क्रशर के आसपास करीब 10 से 15 परिवार रहते हैं। स्थानीय निवासी और टिपर यूनियन के उप प्रधान महेंद्र सिंह का कहना है कि क्रशर चारों तरफ से खुला है। न तो पर्याप्त बाउंड्री बनाई गई है और न ही धूल नियंत्रण के लिए जरूरी एनक्लोजर या डस्ट सप्रेशन सिस्टम नजर आता है। उनका आरोप है कि रात के समय भी क्रशर संचालित किया जाता है। रात को पानी का छिड़काव नहीं होता, जिससे अधिक धूल उड़ती है। खुला पड़ा मटेरियल तेज हवा में हमारे घरों और खेतों तक पहुंचता है। इस संबंध में उपमंडलाधिकारी (सदर) को शिकायत दी गई थी। प्रशासन की ओर से पानी की व्यवस्था और बाउंड्री लगाने का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है।
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उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि रिहायशी क्षेत्र के निकट क्रशर लगाने के लिए क्या प्रभावित परिवारों की सहमति ली गई और क्या पर्यावरणीय स्वीकृति नियमों के तहत प्राप्त की गईं। क्रशर के पास स्थित निजी होटल के मालिक प्रेम सांख्यान ने कहा कि पिछले छह महीनों से होटल परिसर के बाहर धूल की मोटी परत जम रही है। सैलानी यहां रुकने से कतराने लगे हैं। सड़क किनारे बैठना मुश्किल हो गया है। लोगों ने यह भी मुद्दा उठाया कि एम्स बिलासपुर की दूरी यहां से एक किलोमीटर से भी कम है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के कड़े मानकों का पालन होना चाहिए। उनका कहना है कि यदि धूल नियंत्रण के उपाय पर्याप्त नहीं हैं तो यह जनस्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकता है।
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भारी मशीनरी, सीमेंट ट्रकों और निर्माण वाहनों के दबाव के बीच यह चौक इन दिनों धूल के गुबार और लंबे जाम की गिरफ्त में है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या विकास कार्यों के साथ पर्यावरणीय मानकों और ट्रैफिक प्रबंधन की अनदेखी हो रही है।
फोरलेन कंपनी ने जोड़ने वाले बिंदु के आसपास निर्माण सामग्री बेतरतीब ढंग से डंप कर रखी है। सड़क के बीचोबीच पड़े मलबे और मशीनरी के कारण वाहनों की आवाजाही बाधित हो रही है। पीक आवर्स में हालात ऐसे बन जाते हैं कि सीमेंट से लदे ट्रकों, निजी वाहनों और निर्माण मशीनरी की कतारें लग जाती हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संयुक्त निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्यों की गति पर किसी को आपत्ति नहीं, लेकिन पर्यावरणीय मानकों और स्थानीय जनजीवन की अनदेखी स्वीकार्य नहीं हो सकती। संवाद
इनसेट
कंसेंट टू एस्टेब्लिश और कंसेंट टू ऑपरेट लेना अनिवार्य
स्टोन क्रशर संचालन के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कंसेंट टू एस्टेब्लिश और कंसेंट टू ऑपरेट लेना अनिवार्य है। दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी धूल उत्सर्जन बिंदुओं का पूर्ण एनक्लोजर, बैग फिल्टर, ड्राई फॉग या डस्ट सप्रेशन सिस्टम की अनिवार्य व्यवस्था, कन्वेयर बेल्ट को दोनों सिरों तक ढकना, ट्रांसफर प्वाइंट पर नियमित पानी का छिड़काव या एंटी-स्मॉग गन, कच्चे और तैयार माल का ढका भंडारण, पक्की एप्रोच रोड और परिधि में कम से कम तीन कतारों की हरित पट्टी, सीसीटीवी निगरानी और परिवेशीय वायु गुणवत्ता की मॉनिटरिंग जरूरी है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में अनुमति रद्द कर क्रशर बंद कराया जा सकता है।
इनसेट
ट्रैफिक नियंत्रण के लिए पुलिस चौकी की मांग
रेलवे निर्माण, फोरलेन कार्य और सीमेंट ट्रकों के दबाव को देखते हुए स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों ने निर्माण अवधि तक चौक पर पुलिस चेक पोस्ट स्थापित करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्थायी ट्रैफिक प्रबंधन के बिना जाम और दुर्घटना का खतरा बना रहेगा।
कोट
लोगों की समस्या का पता चला है। विकास के साथ यह भी जरूरी है कि लोगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। लोगों को जो भी समस्याएं हैं, उनका समाधान किया जाएगा। कंपनी को इस बारे में दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। -डॉ. राजदीप सिंह, एसडीएम, सदर