{"_id":"66fd2fd72026f12c0f0a3c7d","slug":"police-personnels-residences-fell-into-disrepair-within-12-years-bilaspur-news-c-92-1-ssml1003-124279-2024-10-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: 12 साल में ही जर्जर हो गए पुलिस कर्मियों के आवास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: 12 साल में ही जर्जर हो गए पुलिस कर्मियों के आवास
विज्ञापन
- छतों से हो रहा रिसाव, सीमेंट भी टूट कर सरिये भी बाहर निकला
- जर्जर भवन कभी भी बन सकते हैं दुर्घटना का कारण
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। विकास के कार्यों में बेहतर गुणवत्ता का दावा हर विभाग करता है। सरकार भी विकास के कार्यों में गुणवत्ता से काम करने के दावे करती है, लेकिन सरकारी कार्यों को करने में कितनी गुणवत्ता बरती जाती है, इसका जीता जागता उदाहरण भराड़ी पुलिस थाने में पुलिस कर्मियों के लिए बनाए गए आवासों में देखने को मिल रहा है।
करीब 12 साल के भीतर ही आवासीय भवन जर्जर हो चुका है। लाखों रुपये की लागत से बनाए गए आवास की छत से पानी टपकता है। दीवार सीलन से खराब हो चुकी हैं। भवन के छज्जे फट चुके हैं। हालात यह हो गए हैं कि सीमेंट टूट कर सरिये बाहर निकल गए हैं। आवास कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। महज 12 साल में ही यदि भवन जर्जर हो जाए तो गुणवत्ता युक्त विकास के दावे खुलकर सामने आ जाते हैं। भराड़ी पुलिस थाने के कर्मियों के लिए करीब 12 साल पहले दो मंजिला आवास बना है। इसमें कर्मचारियों के रहने के लिए चार सेट बनाए गए हैं। भवन को बनाने का जिम्मा ठेकेदार के पास था। साल 2012 में यह भवन पुलिस विभाग के सुपुर्द हुआ था। अब दूसरी मंजिल की छत से पानी का रिसाव कमरों के अंदर होता है। दीवारों में सीलन आ चुकी है। दरवाजों की हालत खराब है। छत से रिसाव रोकने के लिए पुलिस कर्मियों ने खुद थोड़ी बहुत मरम्मत करवाई है, लेकिन फिर भी रिसाव बंद नहीं हो रहा है। ऐसे ठेकेदार की ओर से किए गए अन्य कार्यों में क्या गुणवत्ता रही होगी, यह भी जांच का विषय है। डीएसपी घुमारवीं चंद्र पाल ने बताया कि इस संदर्भ में लोक विभाग को पत्र लिखा जाएगा। जिस ठेकेदार ने यह काम किया होगा, उसे भी पत्राचार किया जाएगा।
विज्ञापन
- जर्जर भवन कभी भी बन सकते हैं दुर्घटना का कारण
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। विकास के कार्यों में बेहतर गुणवत्ता का दावा हर विभाग करता है। सरकार भी विकास के कार्यों में गुणवत्ता से काम करने के दावे करती है, लेकिन सरकारी कार्यों को करने में कितनी गुणवत्ता बरती जाती है, इसका जीता जागता उदाहरण भराड़ी पुलिस थाने में पुलिस कर्मियों के लिए बनाए गए आवासों में देखने को मिल रहा है।
करीब 12 साल के भीतर ही आवासीय भवन जर्जर हो चुका है। लाखों रुपये की लागत से बनाए गए आवास की छत से पानी टपकता है। दीवार सीलन से खराब हो चुकी हैं। भवन के छज्जे फट चुके हैं। हालात यह हो गए हैं कि सीमेंट टूट कर सरिये बाहर निकल गए हैं। आवास कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। महज 12 साल में ही यदि भवन जर्जर हो जाए तो गुणवत्ता युक्त विकास के दावे खुलकर सामने आ जाते हैं। भराड़ी पुलिस थाने के कर्मियों के लिए करीब 12 साल पहले दो मंजिला आवास बना है। इसमें कर्मचारियों के रहने के लिए चार सेट बनाए गए हैं। भवन को बनाने का जिम्मा ठेकेदार के पास था। साल 2012 में यह भवन पुलिस विभाग के सुपुर्द हुआ था। अब दूसरी मंजिल की छत से पानी का रिसाव कमरों के अंदर होता है। दीवारों में सीलन आ चुकी है। दरवाजों की हालत खराब है। छत से रिसाव रोकने के लिए पुलिस कर्मियों ने खुद थोड़ी बहुत मरम्मत करवाई है, लेकिन फिर भी रिसाव बंद नहीं हो रहा है। ऐसे ठेकेदार की ओर से किए गए अन्य कार्यों में क्या गुणवत्ता रही होगी, यह भी जांच का विषय है। डीएसपी घुमारवीं चंद्र पाल ने बताया कि इस संदर्भ में लोक विभाग को पत्र लिखा जाएगा। जिस ठेकेदार ने यह काम किया होगा, उसे भी पत्राचार किया जाएगा।
विज्ञापन