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Bilaspur News: जमीन विवाद में राहत नहीं, सिविल अपील खारिज
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जिला न्यायालय ने निचली अदालत का फैसला रखा बरकरार
धोखाधड़ी के आरोप ट्रायल में होंगे तय
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला न्यायालय बिलासपुर ने जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में दायर सिविल मिक्स अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। मामला श्री नयना देवी जी क्षेत्र का है।
अपीलकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि जमीन की रजिस्ट्री धोखाधड़ी और गलत बयानी के जरिए करवाई गई। उनका कहना था कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर पेंशन और किसान निधि के नाम पर करवाए गए थे। वहीं, प्रतिवादी ने दावा किया कि जमीन की बिक्री पूरी तरह वैध है और पूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है। रजिस्टर्ड सेल डीड और राजस्व रिकॉर्ड भी उसके पक्ष में हैं। अदालत ने कहा कि रजिस्टर्ड बिक्री विलेख को कानूनन सही माना जाता है, जब तक उसे सक्षम न्यायालय की ओर से रद्द न किया जाए। धोखाधड़ी जैसे आरोप साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल के दौरान ही साबित होंगे। अदालत ने यह भी पाया कि अपीलकर्ता प्रथम दृष्टया अपना पक्ष मजबूत तरीके से साबित नहीं कर पाए। साथ ही जमीन पर वर्तमान कब्जा प्रतिवादी के पास होने के कारण संतुलन भी उसी के पक्ष में है। अपीलकर्ता यह भी नहीं दिखा पाए कि उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। अदालत ने यह भी माना कि लेन-देन की राशि का भुगतान किया गया है, जो बिक्री प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इस स्तर पर बिक्री को धोखाधड़ी कहना उचित नहीं है। इस आधार पर अदालत ने मार्च 2024 के निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का मुख्य सिविल वाद के अंतिम निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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धोखाधड़ी के आरोप ट्रायल में होंगे तय
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला न्यायालय बिलासपुर ने जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में दायर सिविल मिक्स अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। मामला श्री नयना देवी जी क्षेत्र का है।
अपीलकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि जमीन की रजिस्ट्री धोखाधड़ी और गलत बयानी के जरिए करवाई गई। उनका कहना था कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर पेंशन और किसान निधि के नाम पर करवाए गए थे। वहीं, प्रतिवादी ने दावा किया कि जमीन की बिक्री पूरी तरह वैध है और पूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है। रजिस्टर्ड सेल डीड और राजस्व रिकॉर्ड भी उसके पक्ष में हैं। अदालत ने कहा कि रजिस्टर्ड बिक्री विलेख को कानूनन सही माना जाता है, जब तक उसे सक्षम न्यायालय की ओर से रद्द न किया जाए। धोखाधड़ी जैसे आरोप साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल के दौरान ही साबित होंगे। अदालत ने यह भी पाया कि अपीलकर्ता प्रथम दृष्टया अपना पक्ष मजबूत तरीके से साबित नहीं कर पाए। साथ ही जमीन पर वर्तमान कब्जा प्रतिवादी के पास होने के कारण संतुलन भी उसी के पक्ष में है। अपीलकर्ता यह भी नहीं दिखा पाए कि उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। अदालत ने यह भी माना कि लेन-देन की राशि का भुगतान किया गया है, जो बिक्री प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इस स्तर पर बिक्री को धोखाधड़ी कहना उचित नहीं है। इस आधार पर अदालत ने मार्च 2024 के निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का मुख्य सिविल वाद के अंतिम निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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