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Bilaspur News: क्र्स्ना लैब बंद रहने और सरकारी में टेस्ट नहीं होने से मरीज परेशान

Thu, 11 Jan 2024 11:32 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jan 2024 11:32 PM IST
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Patients upset due to Krishna lab being closed and government testing not being done
- निजी लैब का करना पड़ा रुख, चुकानी पड़ी भारी भरकम राशि
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- मरीज और तीमारदार टेस्ट कराने के लिए भटकने को मजबूर

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला अस्पताल में स्थापित क्रस्ना लैब की सेवाएं दूसरे दिन भी बंद रहने और सरकारी लैब में अधिकतर टेस्ट नहीं होने से लोग परेशानी से जूझ रहे हैं। मरीजों और तीमारदारों को मजबूरन एक्सरे सहित अन्य टेस्ट कराने के लिए शहर की निजी लैबों का रुख करना पड़ रहा है। इससे मरीजों काे शारीरिक परेशानी तो उठानी ही पड़ रही है। साथ ही भारी भरकम राशि का भुगतान भी करना पड़ रहा है।


ओपीडी में चिकित्सीय जांच के बाद मरीज और तीमारदार टेस्ट कराने के लिए भटकने को मजबूर हैं। अस्पताल आए अधिकतर मरीज जानकारी नहीं होने से क्रस्ना लैब पहुंचे। वहां से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। इसके बाद अस्पताल की सरकारी लैब में पहुंचे वहां भी अधिकतर मरीजों को राहत नहीं मिली। जिन मरीजों के सीबीसी संबंधी टेस्ट लिखे गए थे, उनके तो सैंपल लिए गए, लेकिन बायो केमिस्ट्री संबंधी टेस्ट वाले मरीजों को सरकारी लैब से भी निराशा ही हाथ लगी। मरीजों को निजी लैबों में महंगे दाम पर टेस्ट कराने पड़े। जबकि क्रस्ना लैब में 232 टेस्ट की निशुल्क सुविधा है। जिला अस्पताल में रोजाना 800 से 1200 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं। इनमें से करीब 300 मरीजों को टेस्ट लिखे जाते हैं। सरकारी लैब में दोपहर 12 बजे तक ही सैंपल लिए जाते है। इससे अधिकतर मरीज क्रस्ना लैब में ही टेस्ट कराते हैं। कंपनी ने बुधवार से ही सैंपल लेना बंद कर दिए हैं। इससे मरीजों की परेशानियां बढ़ गई। दरअसल, क्रस्ना लैब ने पेमेंट नहीं मिलने की वजह से काम बंद कर दिया है। जिले में कंपनी को करीब 90 लाख रुपये की पेमेंट का सरकार को भुगतान करना है। उधर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि मामला निदेशालय के विचाराधीन है। निदेशालय को जिले से संबंधित सारी जानकारी दे दी गई है।
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