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एक सप्ताह में फैसला बदलो नहीं तो कोर्ट जाएंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, बिलासपुर।
Updated Wed, 18 Nov 2015 06:36 PM IST
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छत पंचायत के प्रधान पद अनारक्षित करने के बाद दोबारा महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित होने से चुनाव की तैयारियों में लगे कई उम्मीदवारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
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ऐसे में जिला प्रशासन के इस फैसले से नाराज लोगों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। स्थानीय लोगों ने दोबारा जारी की गई अधिसूचना का विरोध करते हुए इस फैसले का वापस लेने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर एक सप्ताह के भीतर ऐसा नहीं हुआ तो वह कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर करेंगे।
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लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन ने पांच नवंबर को चुनावी रोस्टर जारी किया गया था। इसके अनुसार ग्राम पंचायत छत में प्रधान पद को अनारक्षित किया गया था। करीब दो सप्ताह का समय बीत जाने के बाद प्रशासन ने फिर ग्राम पंचायत छत में प्रधान पद को महिला अनारक्षित कर दिया।
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इससे प्रधान पद की तैयारियां कर रहे कई उम्मीदवारों के सपने चकनाचूर हो गए हैं। नए रोस्टर से यहां पर अब महिला को प्रधान बनने का मौका मिला है।
ग्राम पंचायत छत के निवासी नंदलाल, रतन, सरवण सिंह, नरेंद्र, संजय, परमजीत, अनूप जम्बाल, कुलदीप सिंह, राजीव, सीता राम, नरेंद्र मन्हास और बिट्टू ने कहा कि ग्राम पंचायत में कई प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ने की तैयारी की थी। लेकिन दो सप्ताह बाद प्रशासन द्वारा पंचायत में प्रधान पद को महिला अनारक्षित कर दिया गया।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर प्रशासन ने अपना निर्णय नहीं बदला, तो स्थानीय लोगों के सहयोग से न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
उधर, प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र गर्ग ने कहा कि यह एक राजनीतिक षड्यंत्र है। उन्होंने आग्रह किया कि प्रशासन को लोगों की भावनाओं के अनुसार चुनावी रोस्टर पर दोबारा विचार करना चाहिए।