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Bilaspur News: एनडीपीएस केस में जब्त वाहन मालिक को लौटाने के आदेश
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पांच लाख के सुपुर्दारी बांड और समान राशि के जमानती की शर्त पर होगी रिलीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एनडीपीएस एक्ट के मामले में सदर थाना पुलिस की ओर से जब्त वाहन को विशेष न्यायाधीश-द्वितीय की अदालत ने आवेदक को लौटाने के आदेश दिए हैं। वाहन नंबर एचपी-26सीबी-5745 को पांच लाख रुपये के सुपुर्दारी बांड और समान राशि के एक जमानती की शर्त पर रिलीज करने का निर्देश दिया गया। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक खुले में खड़ा रहने से वाहन खराब होकर कबाड़ हो सकता है।
वाहन को सदर थाना पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 29 के तहत दर्ज एफआईआर की जांच के दौरान जब्त किया था। जांच पूरी होने के बाद वाहन की रिहाई के लिए बीएनएसएस की धारा 503 के तहत आवेदन किया गया। राज्य ने आवेदन का विरोध करते हुए बताया कि आरसी में गुरविंदर सिंह पुत्र दर्शन सिंह का नाम दर्ज है। वहीं एफिडेविट-कम-सेल परचेज के अनुसार गुरविंदर सिंह ने वाहन आवेदक को बेच दिया था और एसडीएम अंबाला से एनओसी भी प्राप्त की गई थी। अदालत ने दोनों दस्तावेजों का अवलोकन किया। अदालत ने हाईकोर्ट के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वाहन की संभावित जब्ती का प्रश्न उसकी रिहाई से स्वतंत्र है। पर्याप्त शर्तों के साथ ट्रायल के दौरान वाहन की मौजूदगी सुनिश्चित की जा सकती है। अदालत ने वाहन को दस्तावेजों और चाबी सहित रिलीज करने का आदेश दिया। आवेदक को पांच लाख रुपये का सुपुर्दारी बांड और समान राशि का एक जमानती देना होगा। अदालत के बुलाने पर वाहन पेश करना होगा। ट्रायल लंबित रहने तक वाहन को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा, न ही उसमें बदलाव या उसे बंधक रखा जा सकेगा। दस्तावेजों की प्रतियां रिकॉर्ड पर सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एनडीपीएस एक्ट के मामले में सदर थाना पुलिस की ओर से जब्त वाहन को विशेष न्यायाधीश-द्वितीय की अदालत ने आवेदक को लौटाने के आदेश दिए हैं। वाहन नंबर एचपी-26सीबी-5745 को पांच लाख रुपये के सुपुर्दारी बांड और समान राशि के एक जमानती की शर्त पर रिलीज करने का निर्देश दिया गया। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक खुले में खड़ा रहने से वाहन खराब होकर कबाड़ हो सकता है।
वाहन को सदर थाना पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 29 के तहत दर्ज एफआईआर की जांच के दौरान जब्त किया था। जांच पूरी होने के बाद वाहन की रिहाई के लिए बीएनएसएस की धारा 503 के तहत आवेदन किया गया। राज्य ने आवेदन का विरोध करते हुए बताया कि आरसी में गुरविंदर सिंह पुत्र दर्शन सिंह का नाम दर्ज है। वहीं एफिडेविट-कम-सेल परचेज के अनुसार गुरविंदर सिंह ने वाहन आवेदक को बेच दिया था और एसडीएम अंबाला से एनओसी भी प्राप्त की गई थी। अदालत ने दोनों दस्तावेजों का अवलोकन किया। अदालत ने हाईकोर्ट के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वाहन की संभावित जब्ती का प्रश्न उसकी रिहाई से स्वतंत्र है। पर्याप्त शर्तों के साथ ट्रायल के दौरान वाहन की मौजूदगी सुनिश्चित की जा सकती है। अदालत ने वाहन को दस्तावेजों और चाबी सहित रिलीज करने का आदेश दिया। आवेदक को पांच लाख रुपये का सुपुर्दारी बांड और समान राशि का एक जमानती देना होगा। अदालत के बुलाने पर वाहन पेश करना होगा। ट्रायल लंबित रहने तक वाहन को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा, न ही उसमें बदलाव या उसे बंधक रखा जा सकेगा। दस्तावेजों की प्रतियां रिकॉर्ड पर सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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