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Bilaspur News: डंगार संस्कृत कॉलेज को बंद करने की अधिसूचना वापस
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-सरकार ने कॉलेज को लिया अपने अधीन, लोगों में खुशी का माहौल
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। घुमारवीं उपमंडल क्षेत्र के श्री सरस्वती संस्कृत महाविद्यालय डंगार को बंद करने की अधिसूचना सरकार ने वापस ले ली है। महाविद्यालय के सरकारीकरण करने के फैसले से लोगों में खुशी का माहौल है। 30 जून 2023 को कांग्रेस सरकार ने इस महाविद्यालय के संदर्भ में एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें कांग्रेस सरकार ने पिछली भाजपा सरकार के फैसले को बदलते हुए
महाविद्यालय को सरकारीकरण से बाहर कर दिया गया था। अब कांग्रेस सरकार ने फिर से इस महाविद्यालय की सरकार के अधीन करने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है।
श्री संस्कृत महाविद्यालय डंगार की शुरुआत वर्ष 1962 में रामनवमी के दिन डॉक्टर दीनानाथ ने की थी। 1983 में इसे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त हुई थी। उस दौरान इस महाविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की परीक्षाएं बिलासपुर में हुआ करती थीं। इसके बाद 1984 में इस महाविद्यालय में अपना परीक्षा केंद्र बन गया था। 1985 से राज्य की तरफ आंशिक अनुदान मिलना शुरू हुआ, जबकि 1987 से केंद्र की तरफ अनुदान मिलना शुरू हुआ। लंबे अरसे से क्षेत्र के लोग इस महाविद्यालय को सरकारी करण करने की मांग करते आ रहे थे। 2021 में पूर्व विधायक राजेंद्र गर्ग ने इस महाविद्यालय के सरकारीकरण करने की मांग कैबिनेट में रखी। जिसे भाजपा सरकार ने पूरी करते हुए इस महाविद्यालय का सरकारीकरण कर लिया। इसके बाद घुमारवीं महाविद्यालय के प्रधानाचार्य ने इसका कार्यभार संभाला था। सत्ता परिवर्तन के बाद सूबे में कांग्रेस सरकार बनी व इस महाविद्यालय के सरकारीकरण को डिनोटिफाइड कर दिया गया। अब प्रदेश सरकार की तरफ से फिर से नई अधिसूचना जारी हुई है, जिसके तहत डिनोटिफाइड की अधिसूचना को वापस लेते हुए इस महाविद्यालय के सरकारीकरण के तहत ही रखा गया है।
प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि सरकार ने कॉलेज को सरकारीकरण से बाहर कर दिया था। वहीं बाद में इसकी समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद जब पाया गया कि कॉलेज का सरकारीकरण होना चाहिए तो इसको बाहर करने की अधिसूचना को वापस ले लिया गया है। लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार काम कर रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। घुमारवीं उपमंडल क्षेत्र के श्री सरस्वती संस्कृत महाविद्यालय डंगार को बंद करने की अधिसूचना सरकार ने वापस ले ली है। महाविद्यालय के सरकारीकरण करने के फैसले से लोगों में खुशी का माहौल है। 30 जून 2023 को कांग्रेस सरकार ने इस महाविद्यालय के संदर्भ में एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें कांग्रेस सरकार ने पिछली भाजपा सरकार के फैसले को बदलते हुए
महाविद्यालय को सरकारीकरण से बाहर कर दिया गया था। अब कांग्रेस सरकार ने फिर से इस महाविद्यालय की सरकार के अधीन करने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है।
श्री संस्कृत महाविद्यालय डंगार की शुरुआत वर्ष 1962 में रामनवमी के दिन डॉक्टर दीनानाथ ने की थी। 1983 में इसे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त हुई थी। उस दौरान इस महाविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की परीक्षाएं बिलासपुर में हुआ करती थीं। इसके बाद 1984 में इस महाविद्यालय में अपना परीक्षा केंद्र बन गया था। 1985 से राज्य की तरफ आंशिक अनुदान मिलना शुरू हुआ, जबकि 1987 से केंद्र की तरफ अनुदान मिलना शुरू हुआ। लंबे अरसे से क्षेत्र के लोग इस महाविद्यालय को सरकारी करण करने की मांग करते आ रहे थे। 2021 में पूर्व विधायक राजेंद्र गर्ग ने इस महाविद्यालय के सरकारीकरण करने की मांग कैबिनेट में रखी। जिसे भाजपा सरकार ने पूरी करते हुए इस महाविद्यालय का सरकारीकरण कर लिया। इसके बाद घुमारवीं महाविद्यालय के प्रधानाचार्य ने इसका कार्यभार संभाला था। सत्ता परिवर्तन के बाद सूबे में कांग्रेस सरकार बनी व इस महाविद्यालय के सरकारीकरण को डिनोटिफाइड कर दिया गया। अब प्रदेश सरकार की तरफ से फिर से नई अधिसूचना जारी हुई है, जिसके तहत डिनोटिफाइड की अधिसूचना को वापस लेते हुए इस महाविद्यालय के सरकारीकरण के तहत ही रखा गया है।
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प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि सरकार ने कॉलेज को सरकारीकरण से बाहर कर दिया था। वहीं बाद में इसकी समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद जब पाया गया कि कॉलेज का सरकारीकरण होना चाहिए तो इसको बाहर करने की अधिसूचना को वापस ले लिया गया है। लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार काम कर रही है।
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