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जिला की चार लाख की आबादी के लिए नहीं कोई मेडिसीन विशेषज्ञ
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जिला अस्पताल बिलासपुर में ओपीडी ईएनटी के बाहर लगी लोगों की लाइन।
- फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे तब खोखले साबित होते हैं, जब पता चलता है कि चार लाख की आबादी के लिए नियमित तौर पर एक भी मेडिसिन विशेषज्ञ ही नहीं है।
सप्ताह में तीन दिन एम्स के एमडी सुबह 9:30 से शाम 4:30 बजे तक मेडिसिन ओपीडी संभालते हैं, लेकिन जब आपात स्थिति में कोई केस अस्पताल में आता है तो उसे इलाज के लिए आईजीएमसी और पीजीआई रेफर किया जाता है।
सरकार के नुमाइंदे दावा करते हैं कि जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन हालात इसके विपरीत हैं। यहां तीन साल से सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है। पिछले तीन साल से लोगों को सीटी स्कैन के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
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वहीं, अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही है। वह भी एम्स के चिकित्सकों की तैनाती के बाद शुरू हुई। एम्स का रेडियोलॉजिस्ट सप्ताह में दो दिन सोमवार और शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड करता है। वहीं, अन्य पांच दिन लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी अस्पतालों का ही रुख करना पड़ता है। जिला अस्पताल की स्थिति यह है कि सांप के काटने और किसी दुर्घटना के बाद मरीज को यहां पर सही उपचार मिलना संभव नहीं है।
प्राथमिक उपचार देने के बाद मरीज के परिजनों को सलाह दी जाती है कि इसे आईजीएमसी या पीजीआई ले जाया जाए, लेकिन आपात स्थिति में वे मरीज कई बाद रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। वहीं जिला अस्पताल में एमडी मेडिसिन समेत विशेषज्ञों के छह पद खाली हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वह कई बार इस विषय पर सरकार और उच्च अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन अभी तक इन पदों को नहीं भरा गया है।
उच्च अधिकारियों को दे दी है सूचना :भारद्वाज
इस संबंध में एमएस बिलासपुर डॉक्टर नरेंद्र भारद्वाज ने बताया कि जिला अस्पताल में एमडी मेडिसिन, फॉरेंसिक, रेडियोलॉजिस्ट और अन्य तीन विभागों के चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। उन्होंने उच्च अधिकारियों को इस बारे अवगत करवाया है। पद कब तक भरे जाएंगे इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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सप्ताह में तीन दिन एम्स के एमडी सुबह 9:30 से शाम 4:30 बजे तक मेडिसिन ओपीडी संभालते हैं, लेकिन जब आपात स्थिति में कोई केस अस्पताल में आता है तो उसे इलाज के लिए आईजीएमसी और पीजीआई रेफर किया जाता है।
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सरकार के नुमाइंदे दावा करते हैं कि जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन हालात इसके विपरीत हैं। यहां तीन साल से सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है। पिछले तीन साल से लोगों को सीटी स्कैन के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
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वहीं, अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही है। वह भी एम्स के चिकित्सकों की तैनाती के बाद शुरू हुई। एम्स का रेडियोलॉजिस्ट सप्ताह में दो दिन सोमवार और शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड करता है। वहीं, अन्य पांच दिन लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी अस्पतालों का ही रुख करना पड़ता है। जिला अस्पताल की स्थिति यह है कि सांप के काटने और किसी दुर्घटना के बाद मरीज को यहां पर सही उपचार मिलना संभव नहीं है।
प्राथमिक उपचार देने के बाद मरीज के परिजनों को सलाह दी जाती है कि इसे आईजीएमसी या पीजीआई ले जाया जाए, लेकिन आपात स्थिति में वे मरीज कई बाद रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। वहीं जिला अस्पताल में एमडी मेडिसिन समेत विशेषज्ञों के छह पद खाली हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वह कई बार इस विषय पर सरकार और उच्च अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन अभी तक इन पदों को नहीं भरा गया है।
उच्च अधिकारियों को दे दी है सूचना :भारद्वाज
इस संबंध में एमएस बिलासपुर डॉक्टर नरेंद्र भारद्वाज ने बताया कि जिला अस्पताल में एमडी मेडिसिन, फॉरेंसिक, रेडियोलॉजिस्ट और अन्य तीन विभागों के चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। उन्होंने उच्च अधिकारियों को इस बारे अवगत करवाया है। पद कब तक भरे जाएंगे इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।