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फोरलेन की अधिग्रहीत भूमि पर बाउंड्री पिल्लर की पुष्टि नहीं,काट दिए हजारों पेड़

Thu, 25 Nov 2021 07:39 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Nov 2021 07:39 PM IST
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No boundary pillars on the acquired land of Fourlane, thousands of trees were cut
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन सड़क निर्माण की जद में आए हजारों पेड़ों पर वन विभाग ने कुल्हाड़ी तो चला दी है, लेकिन साल 2013 से 2021 तक एनएचएआई यही साफ नहीं कर पाया है कि इस कटान के लिए बाउंड्री पिल्लर कब और किसने लगाए थे। साल 2018 में एनएचएआई के परियोजना निदेशक ने केंद्रीय सूचना आयुक्त को रिपोर्ट दी थी कि इस फोरलेन की अधिग्रहीत भूमि पर भू अर्जन अधिकारी ने बाउंड्री पिल्लर लगाए हैं।
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20 नवंबर 2021 को उक्त फोरलेन के परियोजना निदेशक ने डीएफओ बिलासपुर को रिपोर्ट दी कि उक्त बाउंड्री पिल्लर लगाने का कार्य निर्माण कार्य करने वाली कंपनी और ठेकेदारों की ओर से किया जाता है। इसकी पुष्टि पत्र संख्या एनएचएआई/पीडी/पीआईयू-मंडी/आरटीआई/1885 में परियोजना निदेशक नवीन मिश्रा ने की है।
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वहीं, अब एनएचएआई की दोनों विरोधाभासी रिपोर्टों पर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने सवाल खड़े किए हैं। समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि समिति की तरफ से इस संदर्भ में डीएफओ बिलासपुर को शिकायत भेजी गई है। कहा कि मौके पर पिल्लर लगे ही नहीं हैं, जबकि यूजर एजेंसी और प्रशासन एक-दूसरे पर कार्य का जिम्मा डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाउंड्री पिल्लर लगाए बिना कैसे वन विभाग ने उक्त फोरलेन में हजारों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी। विभाग ने कैसे इसका आकलन किया कि कितने पेड़ फोरलेन की सीमा में हैं और कितने उसके बाहर हैं।
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महासचिव ने कहा कि कुछ समय पहले ही पर्यावरण मंत्रालय की ओर से की गई जांच में पाया गया है कि 10257 पेड़ उक्त फोरलेन में काटे गए हैं। वहीं, संयुक्त जांच कमेटी में तत्कालीन अरण्यपाल ने 11490 पेड़ों के कटने की पुष्टि की है। जबकि वन निगम को दोहन के लिए सौंपे गए पेड़ों की रिपोर्ट में इसकी संख्या 21767 पाई गई है। उन्होंने कहा कि वन विभाग इस बात की जांच कर पुष्टि करे कि बाउंड्री पिल्लर किसने लगवाए और जो पेड़ों का कटान हुआ वह कितना हुआ और सही हुआ या फोरलेन की सीमा से बाहर हुआ।
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