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मशरूम की खेती से निर्मला कमा रहीं लाखों, 35 हजार महिलाओं को भी दिखाई स्वरोजगार की राह

Sun, 28 Aug 2022 10:36 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Aug 2022 10:36 PM IST
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Nirmala from Kandraur chose mushroom farming to be self employed
संवाद न्यूज एजेंसी
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बिलासपुर। अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो तो मंजिल अपने आप ही मिल जाती है। बिलासपुर की एक महिला किसान अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। इस महिला किसान ने मशरूम की खेती को स्वरोजगार जरिया बनाया। इतना हीं इस स्वरोजगार से मुनाफा भी कमा रही है। साथ ही करीब 35,000 महिलाओं को स्वरोजगार की राह दिखा चुकी हैं।
बिलासपुर जिले के कंदरौर निवासी निर्मला धीमान के सराहनीय प्रयासों के लिए पिछले साल मशरूम रिसर्च सेंटर चंबाघाट ने राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया था। निर्मला अपने घर पर स्वावलंबन केंद्र का संचालन करती हैं।
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यहां चीड़ की पत्तियों से हैंड मेड प्रोडक्ट बनाती हैं। साथ ही मशरूम उत्पादन भी करती हैं। महिला किसान निर्मला धीमान ने साल 2000 में 900 रुपये में 36 बैग खरीद कर मशरूम उत्पादन शुरू किया था। पहली फसल से 35,000 रुपये मुनाफा कमाया। साल 2002 में 20 महिलाओं को जोड़ कर स्वयं सहायता समूह बनाया।
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समूह को सरकार के आत्मा प्रोजेक्ट से जोड़ा। प्रोजेक्ट से 20,000 रुपये की सहायता राशि मिली। इससे समूह ने बड़े स्तर मशरूम का उत्पादन करना शुरू किया। साल 2012 में मशरूम रिसर्च सेंटर चंबाघाट सोलन से प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। निर्मला धीमान के कदम आगे बढ़ाए तो मेहनत का किस्मत ने भी साथ दिया। वह बताती हैं कि अब मशरूम उत्पादन से छह महीने के एक सीजन में दो से ढाई लाख रुपये का मुनाफा हो जाता है।
महिलाओं को सिखा रहीं मशरूम उत्पादन
निर्मला खुद तो आगे बढ़ीं, साथ ही प्रदेश की करीब 35,000 महिलाओं को स्वरोजगार की राह दिखाई। उन्होंने महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ, आर्थिक सहायता और मशरूम का बाजार दिलवाया। रिसर्च सेंटर से सीखकर मशरूम की खेती महिलाओं को सिखा रही हैं।

चीड़ की पत्तियों के उत्पाद किए जा रहे तैयार
निर्मला चीड़ की पत्तियों के उत्पाद भी बनाती हैं और इसका प्रशिक्षण भी देती हैं। हाल ही में उन्होंने अपने घर पर राष्ट्रीय सहकारिता संघ की ओर से लगभग तीन महीने का एक कैंप लगाया था। इसमें महिलाओं को प्रशिक्षण दिया कि किस तरह चीड़ की पत्तियों के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। निर्मला ने बताया कि महिलाएं इनसे विभिन्न तरह के घरेलू उत्पाद तैयार कर रही हैं। चीड़ की पत्तियों के उत्पाद सबको भा रहे हैं। चीड़ की पत्तियों से टोकरी, चपाती बॉक्स, फूलदान सहित अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं और अब आभूषण भी तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की कीमत 250 से 1,200 रुपये तक है। इन उत्पादों को तैयार करने में दो से पांच दिन लगते हैं। बाजार में इनकी बहुत मांग हैं। देश भर में राष्ट्रीय सहकारिता संघ की प्रदर्शनियों में इन उत्पादों को रखा जाता है।
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