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Bilaspur News: प्रदेश में निर्माणाधीन फोरलेन परियोजनाओं का नुकसान रोकने के लिए नीति में बदलाव की जरूरत

Sat, 10 Oct 2026 12:59 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 12:59 AM IST
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Need to amend the policy to prevent losses in the four-lane projects currently under construction in the state.
समीक्षा बैठक में निर्माण के बाद कटिंग, भूस्खलन, ब्यास में गाद निकालने की अनुमति का मुद्दा उठा
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डीपीआर बनाते समय फुट ओवरब्रिज और अंडरपास के लिए लोगों से की जाएगी पहले चर्चा
मलबे का इस्तेमाल खेल मैदान बनाने और जरूरत वाले स्थानों को भरने में करने का भी सुझाव

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल में फोरलेन निर्माण के बाद होने वाली कटिंग और भूस्खलन से नुकसान का मामला एनएचएआई की बिलासपुर में आयोजित समीक्षा बैठक में उठा। निर्माण के बाद भी कटिंग किए जाने और इससे प्रदेश में निर्माणाधीन फोरलेन परियोजनाओं को होने वाले नुकसान को देखते हुए नीति में बदलाव की बात हुई। मनाली और उससे आगे के क्षेत्रों में फोरलेन को नुकसान पहुंचने के संदर्भ में ब्यास नदी में गाद निकालने की अनुमति का मुद्दा भी उठाया गया। इसके अलावा फोरलेन निर्माण के दौरान निकलने वाले मलबे के निस्तारण और परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करते समय स्थानीय लोगों से चर्चा करने पर जोर दिया गया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में कहा गया कि फोरलेन बनने के बाद भी कई बार कटिंग की जाती है। इससे भूस्खलन और अन्य कारणों से मार्ग को नुकसान पहुंच सकता है। फोरलेन से 500 फीट आगे तक होने वाले नुकसान को भी नीति में ध्यान में रखने की जरूरत है। निर्माण के दौरान और बाद में सामने आने वाली समस्याओं को देखते हुए नीति में सुधार करने का मुद्दा उठाया गया। मनाली और उससे आगे के क्षेत्रों में फोरलेन को होने वाले नुकसान के संदर्भ में ब्यास नदी में गाद निकालने की अनुमति का मुद्दा उठाया गया। गाद निकालने से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई। इस विषय को फोरलेन को होने वाले नुकसान के संदर्भ में समीक्षा के दौरान उठाया गया। बैठक में मंडी सांसद कंगना रणौत ने कई विषयों पर अपनी बात रखी। जिसके बाद जेपी नड्डा ने कहा कि फोरलेन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करते समय स्थानीय लोगों से चर्चा करना जरूरी है। फुट ओवरब्रिज और अंडरपास जैसी सुविधाओं के लिए स्थान तय करते समय संबंधित क्षेत्र के लोगों की राय लेने की जरूरत सबसे ज्यादा है, ताकि परियोजना की योजना बनाते समय इन सुविधाओं से जुड़े पहलुओं पर विचार किया जा सके। फोरलेन निर्माण के दौरान निकलने वाले मलबे के निस्तारण को लेकर संबंधित विभाग, ठेकेदार और प्रदेश सरकार को स्थानीय विधायक से चर्चा कर स्थान तय करने का सुझाव दिया। जहां संभव हो, मलबे का उपयोग खेल मैदान बनाने या जरूरत वाले स्थानों को भरने में किया जा सकता है। इससे मलबे के निस्तारण के लिए उपयुक्त स्थान तय करने और उसके उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया जा सकेगा। बैठक में कहा कि फोरलेन परियोजनाओं से जुड़ी छोटी समस्याओं को पत्राचार में उलझाने के बजाय संबंधित विभागों, ठेकेदारों और प्रदेश सरकार के अधिकारियों को एक साथ बैठकर समाधान निकालने की बात कही गई।
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