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Bilaspur News: ईद-उल-अजहा पर नमाज अता, अमन-चैन की मांगी दुआएं
Sat, 07 Jun 2025 11:34 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 07 Jun 2025 11:34 PM IST
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बकरीद पर जामा मस्जिद बिलासपुर में नमाज अता करते हुए। स्रोत: मुस्लिम वेलफेयर
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जामा मस्जिद रौड़ा सहित जिले की प्रमुख मस्जिदों में अता की गई नमाज
केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इंसानियत, सच्चे इरादों और त्याग का प्रतीक है त्योहार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार जिले भर में मनाया गया। सुबह से ही मस्जिदों में नमाज के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मुख्य कार्यक्रम जामा मस्जिद रौड़ा में हुआ, जहां सुबह 8:30 बजे मौलाना ताजुद्दीन अंसारी के नेतृत्व में नमाज़ अता की।
नमाज में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने कुर्ता-पायजामा और पारंपरिक परिधानों में शामिल होकर सामूहिक नमाज अता की। नमाज से पूर्व मौलाना ने अपने भाषण में कुर्बानी के महत्व और उसकी परंपरा पर प्रकाश डाला। कहा कि यह त्योहार केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इंसानियत, सच्चे इरादों और त्याग का प्रतीक है। मौलाना ने विशेष दुआओं में समाज में अमन-चैन, भाईचारे, तरक्की और खुशहाली की कामना की। बीमारों को शिफा और मुसीबतों से निजात दिलाने की दुआ भी की गई। नमाज के बाद मौलाना ने दो प्रवचन भी दिए, जिसमें उन्होंने त्योहार के महत्व पर विस्तृत रूप से चर्चा की। नमाज के बाद समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। जिले की अन्य मस्जिदों जैसे बरठीं, चकली, कोठीपुरा, ईल्लेवाल, स्वारघाट और झंडूता में भी ईद की नमाज अता की गई। दोपहर से लजीज व्यंजनों का दौर शुरू हो गया, जिसमें कबाब, जर्दा बिरयानी और कोरमा प्रमुख रहे। कुर्बानी के इस पर्व पर लोग जरूरतमंदों में गोश्त बांटते नजर आए। इस अवसर पर जिला मुस्लिम वेलफेयर कमेटी के अध्यक्ष नसीम मोहम्मद, हारुन मोहम्मद, अरशद शेख, हुसैन अली, अब्दुल रशीद, परवेज मोहम्मद और प्रदेश अध्यक्ष अबीब खान ने प्रदेशवासियों को ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद दी।
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केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इंसानियत, सच्चे इरादों और त्याग का प्रतीक है त्योहार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार जिले भर में मनाया गया। सुबह से ही मस्जिदों में नमाज के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मुख्य कार्यक्रम जामा मस्जिद रौड़ा में हुआ, जहां सुबह 8:30 बजे मौलाना ताजुद्दीन अंसारी के नेतृत्व में नमाज़ अता की।
नमाज में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने कुर्ता-पायजामा और पारंपरिक परिधानों में शामिल होकर सामूहिक नमाज अता की। नमाज से पूर्व मौलाना ने अपने भाषण में कुर्बानी के महत्व और उसकी परंपरा पर प्रकाश डाला। कहा कि यह त्योहार केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इंसानियत, सच्चे इरादों और त्याग का प्रतीक है। मौलाना ने विशेष दुआओं में समाज में अमन-चैन, भाईचारे, तरक्की और खुशहाली की कामना की। बीमारों को शिफा और मुसीबतों से निजात दिलाने की दुआ भी की गई। नमाज के बाद मौलाना ने दो प्रवचन भी दिए, जिसमें उन्होंने त्योहार के महत्व पर विस्तृत रूप से चर्चा की। नमाज के बाद समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। जिले की अन्य मस्जिदों जैसे बरठीं, चकली, कोठीपुरा, ईल्लेवाल, स्वारघाट और झंडूता में भी ईद की नमाज अता की गई। दोपहर से लजीज व्यंजनों का दौर शुरू हो गया, जिसमें कबाब, जर्दा बिरयानी और कोरमा प्रमुख रहे। कुर्बानी के इस पर्व पर लोग जरूरतमंदों में गोश्त बांटते नजर आए। इस अवसर पर जिला मुस्लिम वेलफेयर कमेटी के अध्यक्ष नसीम मोहम्मद, हारुन मोहम्मद, अरशद शेख, हुसैन अली, अब्दुल रशीद, परवेज मोहम्मद और प्रदेश अध्यक्ष अबीब खान ने प्रदेशवासियों को ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद दी।

बकरीद पर जामा मस्जिद बिलासपुर में नमाज अता करते हुए। स्रोत: मुस्लिम वेलफेयर
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