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मनरेगा धन का दुरुपयोग : पशुशाला को स्टोर बनाने पर लोकपाल की बड़ी कार्रवाई

Wed, 07 Jan 2026 11:47 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Jan 2026 11:47 PM IST
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Misuse of MNREGA funds: Lokpal takes major action against cattle shed for converting it into a store
अदालत से....
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डिजिटल न चलाएं

लाभार्थी और पंचायत अधिकारियों से होगी 46,109 की वसूली
विकास खंड घुमारवीं की लुहारवीं ग्राम पंचायत का है मामला

लोकपाल मनरेगा बिलासपुर की अदालत ने सरकारी धन के दुरुपयोग पर दिया फैसला

संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। जिले के विकासखंड घुमारवीं की ग्राम पंचायत लुहारवीं में मनरेगा के तहत निर्मित एक पशुशाला विवादों में आ गई है। लोकपाल (मनरेगा) बिलासपुर की अदालत ने इस मामले में सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। लोकपाल ने लाभार्थी सहित पंचायत सचिव और तकनीकी सहायक को दोषी करार देते हुए कुल 46,109 की रिकवरी (वसूली) के आदेश जारी किए हैं।

बरोटा गांव के निवासी सुदेश कुमार ने 12 नवंबर 2025 को लोकपाल कार्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बालानंद ने वर्ष 2022-23 में मनरेगा के तहत पशुशाला का निर्माण किया, लेकिन आज तक उसमें एक भी पशु नहीं बांधा गया। शिकायतकर्ता का दावा था कि पशुशाला में न तो खूंटे हैं, न खुरली और न ही सरकारी सूचना बोर्ड। यह पूरी तरह से सरकारी धन की बर्बादी है और इसे घरेलू कमरे (स्टोर) की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। लोकपाल डॉ. सुनील कुमार चंदेल ने 24 दिसंबर 2025 को मौके पर जाकर जांच की। इस दौरान बयानों में कई विरोधाभास मिले। लाभार्थी ने तर्क दिया कि निर्माण के समय उनके पास गाय थी, जिसे अब उन्होंने अपनी बेटी को दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि बीमारी के कारण वह पशु नहीं रख पा रहे। वार्ड सदस्य जगत सिंह ने लाभार्थी का बचाव करते हुए कहा कि गुणवत्ता सही है, लेकिन स्वीकार किया कि गाय एक साल से घर पर नहीं है। तकनीकी सहायक नरेंद्र कुमार ने सफाई दी कि पशुशाला छोटी (4.6x3.65 मीटर) होने के कारण खुरली बाहर बनाई गई थी।
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लोकपाल ने जब निरीक्षण किया तो मौके पर पाया कि जो सूचना बोर्ड लगा था, वह महज कुछ दिन पहले ही रंगा गया था। बोर्ड के नीचे गिरे ताजे पेंट के निशान गवाही दे रहे थे कि शिकायत होने के बाद ही बोर्ड लिखवाया गया। साथ ही, मौके पर बनी खुरलियां 15-20 मीटर दूर थीं, जो पुरानी पशुशाला की प्रतीत हो रही थीं। कमरे के अंदर की स्थिति से स्पष्ट था कि वहां कभी पशु नहीं बांधे गए, बल्कि वह सामान रखने का स्टोर बन चुका था। इसके बाद लोकपाल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जिस कार्य के लिए पैसा लिया गया, उसका मापदंडों के अनुसार उपयोग नहीं हुआ। इसलिए लाभार्थी बालानंद से कुल खर्च का 2/3 हिस्सा, यानी 30,739 वसूला जाएगा। पंचायत सचिव, ग्राम पंचायत लुहारवीं कार्य समाप्ति पर बोर्ड न लगवाने और नियमों के उल्लंघन के दोषी पाए गए। इन पर 7,685 का जुर्माना लगाया गया। तकनीकी सहायक, विकास खंड घुमारवीं खूंटे और खुरली जैसे बुनियादी मानकों के बिना कार्य पास करने पर इनसे भी 7,685 वसूले जाएंगे।
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इनसेट

अपील के लिए 30 दिन का समय

लोकपाल ने इस आदेश की प्रतियां सचिव ग्रामीण विकास विभाग, निदेशक मनरेगा, और जिला उपायुक्त बिलासपुर को आवश्यक कार्यवाही हेतु भेज दी हैं। दोषी पक्ष इस निर्णय के खिलाफ 30 दिनों के भीतर राज्य अपीलीय प्राधिकार (मनरेगा) शिमला में अपील कर सकते हैं।
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