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Bilaspur News: गांव की चौपाल पर सुलझेंगे छोटे विवाद,अदालत की दौड़ और खर्च से मिलेगी राहत

Wed, 30 Sep 2026 12:55 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2026 12:55 AM IST
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Minor disputes will be resolved at the village *chaupal*, providing relief from the expense and hassle of running to court.
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण बिलासपुर ने जिले के पांच गांवों में शुरू की सामुदायिक मध्यस्थता योजना
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प्रशिक्षित मध्यस्थ दोनों पक्षों में कराएंगे समझौता, सदर के दो, घुमारवीं के दो, झंडूता का एक गांव योजना में शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। छोटे-छोटे विवादों को लेकर अदालतों के चक्कर काटने वाले लोगों के लिए राहत की पहल हुई है। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण बिलासपुर ने जिले के पांच गांवों में सामुदायिक मध्यस्थता योजना शुरू की है। योजना के तहत गांवों में विशेष रूप से प्रशिक्षित सामुदायिक मध्यस्थ नियुक्त किए गए हैं। ये मध्यस्थ विवाद में शामिल पक्षकारों की बात सुनकर उनके बीच आपसी सहमति से विवाद का समाधान कराने का प्रयास करेंगे। इसका उद्देश्य छोटे विवादों को अनावश्यक रूप से अदालत तक पहुंचने से रोकना और गांव स्तर पर ही समाधान का रास्ता उपलब्ध करवाना है।
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव प्रतीक गुप्ता ने बताया कि योजना के लिए जिले के पांच गांवों का चयन किया गया है। इनमें सदर तहसील के दो, घुमारवीं तहसील के दो और झंडूता तहसील का एक गांव शामिल है। सदर तहसील के ग्राम पंचायत नैणी के मानवा और ग्राम पंचायत कुड़ी (दली) के जंगल झलेड़ा में योजना शुरू की गई है। इसी तरह घुमारवीं तहसील के ग्राम पंचायत पट्टा के कोटला और ग्राम पंचायत बाड़ी मझेड़वां के करंगोड़ा तथा झंडूता तहसील के ग्राम पंचायत बड़ोल के पझीण को योजना में शामिल किया गया है। योजना के तहत प्रशिक्षित सामुदायिक मध्यस्थ विवाद में शामिल दोनों पक्षों के बीच बातचीत करवाएंगे। मध्यस्थ किसी एक पक्ष के पक्ष में निर्णय देने के बजाय दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देंगे और आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचने में मदद करेंगे। ऐसे छोटे विवाद, जिन्हें बातचीत और समझौते के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है, उनमें मध्यस्थता को प्राथमिकता दी जाएगी। अकसर छोटे विवाद समय के साथ न्यायालय तक पहुंच जाते हैं। इसके बाद पक्षकारों को सुनवाई के लिए समय निकालना पड़ता है और आने-जाने समेत अन्य खर्च भी उठाना पड़ता है। लंबे समय तक मामला चलने से परिवारों, पड़ोसियों और अन्य पक्षकारों के बीच संबंधों में भी तनाव बना रह सकता है। सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से ऐसे मामलों को स्थानीय स्तर पर ही सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
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जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के अनुसार छोटे मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने से पक्षकारों के समय और धन की बचत होगी। साथ ही न्यायालयों में पहुंचने वाले ऐसे मामलों की संख्या कम होने से न्यायिक व्यवस्था पर पड़ने वाले दबाव को भी कम करने में मदद मिलेगी। योजना के माध्यम से लोगों को विवाद बढ़ाने के बजाय बातचीत और समझौते से समाधान तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण की ओर से भी मध्यस्थता और आपसी सहमति से विवादों के समाधान को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से कम्युनिटी मेडिएटर यानी सामुदायिक मध्यस्थ तैयार किए जा रहे हैं। ये मध्यस्थ अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को मध्यस्थता के माध्यम से विवाद सुलझाने के लिए प्रेरित करेंगे। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण का उद्देश्य चयनित क्षेत्रों में अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करना और अधिक से अधिक विवादों का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के दूरभाष नंबर 01978-221452 पर संपर्क किया जा सकता है।
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इनसेट
पांच गांवों से शुरू हुई पहल
चयनित गांवों में मानवां (ग्राम पंचायत नौणी), जंगल झलेड़ा (ग्राम पंचायत कुड्डी-दली), कोटला (ग्राम पंचायत पट्टा), करंगोड़ा (ग्राम पंचायत बाड़ी मझेड़वां) और पंजीण (ग्राम पंचायत बड़ोल) शामिल हैं। ये गांव क्रमश: सदर, सदर, घुमारवीं, घुमारवीं और झंडूता तहसील के अंतर्गत आते हैं।
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