फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Mid-day meal workers protested the decision to cook food for polling parties.

Bilaspur News: पोलिंग पार्टियों के लिए खाना बनाने के फैसले का मिड-डे मील वर्करों ने किया विरोध

Sat, 23 May 2026 11:33 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sat, 23 May 2026 11:33 PM IST
विज्ञापन
Mid-day meal workers protested the decision to cook food for polling parties.
महिला कर्मचारियों के साथ अन्याय, सुरक्षा पर उठाए सवाल
विज्ञापन

यूनियन ने निर्वाचन आयोग से आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के दौरान निर्वाचन आयोग ने मिड-डे मील और आंगनबाड़ी कर्मचारियों को पोलिंग पार्टियों के लिए भोजन बनाने की जिम्मेदारी सौंपने के आदेश का कड़ा विरोध शुरू हो गया है। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन (इंटक) हिमाचल प्रदेश ने इस निर्णय को महिला कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय करार दिया है।

यूनियन के प्रदेश महासचिव गणपत राम ने कहा कि चुनाव के दिन जहां अन्य सभी कर्मचारियों के लिए अवकाश की व्यवस्था होती है, वहीं मिड-डे मील कार्यकर्ताओं पर अतिरिक्त काम का बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव ड्यूटी में लगे अन्य सभी कर्मचारियों को उचित वेतन और भत्ता मिलता है, लेकिन मिड-डे मील कर्मियों को इसके लिए कोई भुगतान नहीं किया जाता। मिड-डे मील कर्मचारियों में अधिकांश महिलाएं हैं। देर रात तक ड्यूटी के दौरान उनकी सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है। कई केंद्रों पर सिर्फ एक ही मिड-डे मील वर्कर तैनात है। ऐसे में एक अकेली महिला के लिए रात 10 से 11 बजे तक रुक कर पूरी पोलिंग पार्टी का खाना बनाना व्यावहारिक नहीं है। कई मतदान केंद्र कर्मचारियों के घरों से तीन से चार किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर हैं। रात के समय सुनसान रास्तों पर घर लौटने में महिला कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। प्रदेश महासचिव गणपत राम, प्रदेश महा-मंत्री देवी, प्रेमी देवी और जिला सचिव राम दत्त ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि मिड-डे मील कर्मचारियों को न छुट्टी, न अलग से वेतन और न अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। केवल पांच हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। सरकार द्वारा इन्हें न सरकारी कर्मचारी माना जाता है, केवल 10 महीने का मानदेय दिया जाता है, उसमें भी यदि कर्मचारी छुट्टी करता है तो उसका वेतन काट दिया जाता है। यूनियन ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए इस आदेश को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि आगे भी कोई ऐसा निर्णय न लिया जाए जो कर्मचारियों के हितों के खिलाफ हो व सरकार, शिक्षा विभाग और यूनियन के बीच टकराव का माहौल बने।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed