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Bilaspur News: सामाजिक अन्याय, महंगाई, बेरोजगारी, ओपीएस मुद्दों पर सीपीआई ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
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अल्पसंख्यकों पर अत्याचार रोकने, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता बहाल करने की मांग
कहा, मौजूदा परिस्थितियों में कमजोर पड़ रहा है देश का सामाजिक ढांचा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी हिमाचल प्रदेश ने एडीसी बिलासपुर के माध्यम से राष्ट्रपति को मांगों को लेकर ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में देश में बढ़ रहे सामाजिक अन्याय, जातीय भेदभाव, महिलाओं पर हिंसा, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और आर्थिक असमानता जैसे गंभीर मुद्दों पर गहरी चिंता जताई है। ज्ञापन कॉमरेड वासुदेव वसु की अध्यक्षता में भेजा गया।
पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में देश का सामाजिक ढांचा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। महिलाओं, दलितों और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। सीपीआई नेताओं ने हाल ही में दलित समुदाय से आने वाले भारत के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि जब सर्वोच्च संस्था का प्रमुख सुरक्षित नहीं तो सामान्य अल्पसंख्यक व दलित वर्ग कैसे सुरक्षित रह सकता है। ज्ञापन में पार्टी ने चुनाव आयोग पर पड़ रहे कथित सरकारी दबाव पर चिंता जताई और कहा कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र तभी सुरक्षित रह सकता है, जब चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं पूर्ण स्वतंत्रता व निष्पक्षता के साथ काम कर सकें। सीपीआई ने कहा कि देश में बेरोजगारी का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कारण युवा नशे की ओर और कई असामाजिक गतिविधियों में फंसते जा रहे हैं। बढ़ती महंगाई ने आम जनमानस की कमर तोड़ दी है। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि युवाओं को रोजगार नहीं मिला तो इसका गंभीर सामाजिक असर पड़ेगा। इस दौरान कॉमरेड भाग सिंह चौधरी, कॉमरेड विवेकानंद, कॉमरेड प्रवेश चंदेल, कॉमरेड सुशील मौजूद रहे। उन्होंने ज्ञापन में कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा बजट में भारी कटौती कर दी, जिससे ग्रामीण रोजगार पर संकट गहराया है। पार्टी ने मांग की कि मनरेगा में कम से कम 200 दिन का रोजगार अनिवार्य किया जाए ताकि ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार मिल सके।
सीपीआई ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना बंद होने से सरकारी कर्मचारियों में भारी निराशा है। कर्मचारियों को देश की रीढ़ करार देते हुए पार्टी ने राष्ट्रपति से ओपीएस को दोबारा बहाल करवाने का अनुरोध किया। सरकार बड़े उद्योगपतियों और विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंचा रही है, जबकि गरीब और किसान तबकों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इससे देश में आर्थिक असमानता खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। राष्ट्रपति से समाज में न्याय व समानता कायम करने, महिलाओं व अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, बढ़ती महंगाई व बेरोजगारी पर प्रभावी कदम उठाने तथा किसानों और श्रमिकों के हित में निर्णय लेने की अपील की।
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कहा, मौजूदा परिस्थितियों में कमजोर पड़ रहा है देश का सामाजिक ढांचा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी हिमाचल प्रदेश ने एडीसी बिलासपुर के माध्यम से राष्ट्रपति को मांगों को लेकर ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में देश में बढ़ रहे सामाजिक अन्याय, जातीय भेदभाव, महिलाओं पर हिंसा, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और आर्थिक असमानता जैसे गंभीर मुद्दों पर गहरी चिंता जताई है। ज्ञापन कॉमरेड वासुदेव वसु की अध्यक्षता में भेजा गया।
पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में देश का सामाजिक ढांचा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। महिलाओं, दलितों और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। सीपीआई नेताओं ने हाल ही में दलित समुदाय से आने वाले भारत के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि जब सर्वोच्च संस्था का प्रमुख सुरक्षित नहीं तो सामान्य अल्पसंख्यक व दलित वर्ग कैसे सुरक्षित रह सकता है। ज्ञापन में पार्टी ने चुनाव आयोग पर पड़ रहे कथित सरकारी दबाव पर चिंता जताई और कहा कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र तभी सुरक्षित रह सकता है, जब चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं पूर्ण स्वतंत्रता व निष्पक्षता के साथ काम कर सकें। सीपीआई ने कहा कि देश में बेरोजगारी का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कारण युवा नशे की ओर और कई असामाजिक गतिविधियों में फंसते जा रहे हैं। बढ़ती महंगाई ने आम जनमानस की कमर तोड़ दी है। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि युवाओं को रोजगार नहीं मिला तो इसका गंभीर सामाजिक असर पड़ेगा। इस दौरान कॉमरेड भाग सिंह चौधरी, कॉमरेड विवेकानंद, कॉमरेड प्रवेश चंदेल, कॉमरेड सुशील मौजूद रहे। उन्होंने ज्ञापन में कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा बजट में भारी कटौती कर दी, जिससे ग्रामीण रोजगार पर संकट गहराया है। पार्टी ने मांग की कि मनरेगा में कम से कम 200 दिन का रोजगार अनिवार्य किया जाए ताकि ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार मिल सके।
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सीपीआई ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना बंद होने से सरकारी कर्मचारियों में भारी निराशा है। कर्मचारियों को देश की रीढ़ करार देते हुए पार्टी ने राष्ट्रपति से ओपीएस को दोबारा बहाल करवाने का अनुरोध किया। सरकार बड़े उद्योगपतियों और विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंचा रही है, जबकि गरीब और किसान तबकों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इससे देश में आर्थिक असमानता खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। राष्ट्रपति से समाज में न्याय व समानता कायम करने, महिलाओं व अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, बढ़ती महंगाई व बेरोजगारी पर प्रभावी कदम उठाने तथा किसानों और श्रमिकों के हित में निर्णय लेने की अपील की।
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