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Bilaspur News: जिला अस्पताल की सरकारी लैब में नहीं हो रहे थायराइड, सीबीसी सहित कई टेस्ट

Thu, 14 Sep 2023 06:46 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Sep 2023 06:46 PM IST
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Many tests including thyroid, CBC are not being done in the government lab of the district hospital.
- मरीजों को महंगे दाम पर निजी लैब में करानी पड़ रही जांच
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- लैब में किट न होने से मरीजों को उठानी पड़ रही परेशानी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला अस्पताल की सरकारी लैब में थायराइड, लिपिड प्रोफाइल, सीबीसी, डी 3, बी 12, और एचबीवनएसी (शुगर का तिमाही) टेस्ट नहीं हो रहे हैं। इन टेस्ट से कई तरह की बीमारियों का पता लगाया जाता है, लेकिन लैब में किट न होने से मरीजों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। टेस्ट करवाने के लिए मरीज निजी लैब की ओर रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें 200 से 1300 रुपये जांच के चुकाने पड़ रहे हैं, जबकि सरकारी लैब में यह सभी टेस्ट मुफ्त में किए जाते हैं।

थायराइड टेस्ट नहीं होने से सबसे अधिक गर्भवती महिलाओं को परेशान होना पड़ रहा है। गर्भवती महिला की तीन माह के भीतर थायराइड जांच होना बेहद जरूरी है। अस्पताल आने वाली अधिकतर गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक थायराइड का टेस्ट कराने को कहते हैं। ऐसे में महिलाओं को जांच के लिए परेशान होना पड़ता है। बाहर जांच कराने में पांच से 600 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, लिपिड जांच करने वाली किट भी खत्म हो गई हैं। इससे अस्पताल में लिपिड की जांच नहीं हो रची हैं। कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाने समेत फैट आदि का पता लगाने के लिए लिपिड की जांच की जाती है, लेकिन लैब में इस टेस्ट की सुविधा नहीं होने से मरीजों को निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। वहीं, व्यक्ति के शरीर में कितना ग्राम खून, उसमें लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं की मात्रा जैसी सभी जानकारियां पता लगाने वाला सीबीसी टेस्ट भी नहीं हो रहा है। इस जांच से ही व्यक्ति को प्लेटलेट्स देने का निर्णय लिया जाता है। डेंगू या किसी अन्य वायरल में प्लेटलेट्स की संख्या लगातार कम होती जाती है। खासतौर पर डेंगू के मरीजों के लिए ये टेस्ट बेहद जरूरी है। इसके लिए मरीजों को निजी लैब में 200 से 300 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा हड्डी रोग से संबंधित डी 3 और रक्त संबंधी रोग का पता लगाने वाला बी12 टेस्ट भी लैब नहीं हो रहे हैं। इन टेस्ट को कराने के लिए मरीजों को एक हजार से 1300 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि सरकारी लैब में यह सभी टेस्ट पूरी तरह से मुफ्त में किए जाते हैं।
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