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मनुष्य सीमित इच्छाएं रख मन को रखें प्रसन्न : गोपाल
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-कोटलु ब्राह्मणा के बरोट में श्रीमद्भागवत कथा आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। घुमारवीं की पंचायत कोटलु ब्राह्मणा के गांव बरोट में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पंडित गोपाल स्वरूप शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को भागवत कथा का श्रवण एकाग्र चित्त होकर सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमित इच्छाएं रखकर मन को प्रसन्न रखें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, जमीन, जवानी और कुर्सी का मद कभी नहीं करना चाहिए। विषयों का त्याग कर राम का जाप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अजामिल चोर और पापी था, लेकिन संतों के कहने से उसने अपने पुत्र का नाम नारायण रखा और अजामिल पुत्र का नाम नारायण नारायण जपते जपते परम धाम को प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि जिस कुल में पत्नी से पति और पति से पत्नी प्रसन्न रहती हैं, उसी कुल में सब सौभाग्य व ऐश्वर्य निवास करते हैं। जिस घर में कलह होता है, वहां दुर्भाग्य और दरिद्रता निवास करती है। कथावाचक ने कहा कि जिस घर में स्त्रियों सहित पुरुषों का आदर सम्मान होता है वहां दिव्य गुणों और दिव्य पुरुषों का निवास होता है। जिस घर में पुरुषों का सम्मान नहीं होता, वहां सभी क्रियाएं निष्फल हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि जिस घर में पुरुष दुखी रहते हैं, वह कुल नष्ट-भ्रष्ट हो जाता है, जबकि जिन घरों में पुरुष आनंद और प्रसन्नता से रहते हैं, वह कुल निरंतर बढ़ता रहता है। इसलिए ऐश्वर्य की कामना करने वाली महिलाओं को पुरुषों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैदिक धर्म में स्त्री को पैर की जूती नहीं, बल्कि सिर की पगड़ी माना जाता है। नारी के इस गौरव और महत्व को मनु महाराज ने भी स्वीकार किया है, लेकिन पुरुषों का सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जितना पुण्य हरिद्वार, काशी वृंदावन जाकर मिलता है उतना पुण्य दो अक्षर के हरि नाम से मिल जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। घुमारवीं की पंचायत कोटलु ब्राह्मणा के गांव बरोट में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पंडित गोपाल स्वरूप शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को भागवत कथा का श्रवण एकाग्र चित्त होकर सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमित इच्छाएं रखकर मन को प्रसन्न रखें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, जमीन, जवानी और कुर्सी का मद कभी नहीं करना चाहिए। विषयों का त्याग कर राम का जाप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अजामिल चोर और पापी था, लेकिन संतों के कहने से उसने अपने पुत्र का नाम नारायण रखा और अजामिल पुत्र का नाम नारायण नारायण जपते जपते परम धाम को प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि जिस कुल में पत्नी से पति और पति से पत्नी प्रसन्न रहती हैं, उसी कुल में सब सौभाग्य व ऐश्वर्य निवास करते हैं। जिस घर में कलह होता है, वहां दुर्भाग्य और दरिद्रता निवास करती है। कथावाचक ने कहा कि जिस घर में स्त्रियों सहित पुरुषों का आदर सम्मान होता है वहां दिव्य गुणों और दिव्य पुरुषों का निवास होता है। जिस घर में पुरुषों का सम्मान नहीं होता, वहां सभी क्रियाएं निष्फल हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि जिस घर में पुरुष दुखी रहते हैं, वह कुल नष्ट-भ्रष्ट हो जाता है, जबकि जिन घरों में पुरुष आनंद और प्रसन्नता से रहते हैं, वह कुल निरंतर बढ़ता रहता है। इसलिए ऐश्वर्य की कामना करने वाली महिलाओं को पुरुषों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैदिक धर्म में स्त्री को पैर की जूती नहीं, बल्कि सिर की पगड़ी माना जाता है। नारी के इस गौरव और महत्व को मनु महाराज ने भी स्वीकार किया है, लेकिन पुरुषों का सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जितना पुण्य हरिद्वार, काशी वृंदावन जाकर मिलता है उतना पुण्य दो अक्षर के हरि नाम से मिल जाता है।
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