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Bilaspur News: लुहणू मैदान बनेगा क्रिकेट पार्क, 90 फीसदी हिस्सा में रहेगी हरियाली
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लुहणू क्रिकेट मैदान। संवाद
मैदान के तीन तरफ लगाए सुखचैन के पौधे, अशोका-चंपा समेत 150 पौधों से संवरेगा परिसर
90 फीसदी हिस्से में रहेगी हरियाली, 10 फीसदी में होगा सीमेंट-कंक्रीट का निर्माण
सरोज पाठक
बिलासपुर। गोबिंदसागर झील के किनारे स्थित लुहणू क्रिकेट मैदान को अब सिर्फ क्रिकेट खेलने के मैदान तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे क्रिकेट पार्क के रूप में विकसित करने की तैयारी है। मैदान के तीन तरफ सुखचैन के पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा अशोका, चंपा और अन्य सजावटी पौधे भी लगाए जा रहे हैं। योजना के तहत मैदान के करीब 90 फीसदी हिस्से में हरियाली और 10 फीसदी हिस्से में सीमेंट-कंक्रीट का निर्माण रखा जाएगा।
लुहणू मैदान की लोकेशन इसकी सबसे बड़ी खासियत है। एक ओर गोबिंदसागर झील और दूसरी तरफ बंदला की पहाड़ियां दिखाई देती हैं। बंदला से उड़ान भरने वाले पैराग्लाइडर भी लुहणू में उतरते हैं। ऐसे में क्रिकेट, झील, पहाड़ और साहसिक पर्यटन गतिविधियों का मेल इस क्षेत्र को अलग पहचान दे सकता है। जिला क्रिकेट संघ की ओर से मैदान को जरूरत के अनुसार चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है। मैदान के आसपास अनावश्यक निर्माण बढ़ाने के बजाय हरियाली को प्राथमिकता दी जा रही है। आमतौर पर क्रिकेट मैदान के खेल क्षेत्र में हरियाली होती है, जबकि आसपास कंक्रीट का ढांचा दिखाई देता है। लुहणू में इसके विपरीत पूरे परिसर को प्राकृतिक माहौल से जोड़ने की योजना है। मैदान के तीन तरफ सुखचैन के पौधे लगाए गए हैं। इसके साथ करीब 50 अशोका, 50 सजावटी और 50 चंपा के पौधे भी लगाए गए हैं। इनके बढ़ने के साथ परिसर में हरियाली का दायरा और बढ़ेगा। मैदान की सुविधाओं को भविष्य में जरूरत के अनुसार बढ़ाने के साथ उसके प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखना भी योजना का हिस्सा है। संवाद
बड़े मैचों से बढ़ेंगी खेल पर्यटन की संभावनाएं
प्रदेश में अब तक बड़े क्रिकेट मुकाबलों के लिए धर्मशाला स्टेडियम को प्राथमिकता मिलती रही है। हाल ही में लुहणू मैदान में मुंबई और हिमाचल के बीच रणजी मुकाबला खेला गया। इसके बाद मैदान की खूबसूरती और लोकेशन की खूब सराहना हुई। इससे यहां भविष्य में बड़े क्रिकेट आयोजनों की उम्मीद बढ़ी है। बड़े मुकाबले होने से मैदान को पहचान मिलने के साथ स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर खेल वातावरण भी मिल सकता है। वहीं, बाहर से आने वाले खिलाड़ियों और दर्शकों की आवाजाही बढ़ने पर होटल, खानपान और अन्य स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि, यह फायदा बड़े आयोजनों की नियमितता और पर्यटकों की आवाजाही पर निर्भर करेगा।
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झील, पैराग्लाइडिंग और रेल वायाडक्ट से जुड़ेंगी संभावनाएं
लुहणू क्रिकेट मैदान की भौगोलिक स्थिति इसे खेल और पर्यटन के मेल के लिए खास बनाती है। क्रिकेट मुकाबलों के दौरान बाहर से आने वाले खिलाड़ी और दर्शक गोबिंदसागर झील, बंदला की पहाड़ियों और पैराग्लाइडिंग का आनंद ले सकते हैं। झील, पहाड़ियों, रेल लाइन के वायाडक्ट और क्रिकेट मैदान की नजदीकी आने वाले समय में इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से और आकर्षक बना सकती है।
क्रिकेट के साथ दूसरे खेलों को भी मंच
लुहणू परिसर में बना एथलेटिक्स ट्रैक भी युवाओं के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी करने वाले युवा यहां नियमित अभ्यास करते हैं। इससे परिसर का इस्तेमाल क्रिकेट के अलावा शारीरिक अभ्यास और अन्य खेल गतिविधियों के लिए भी हो रहा है। खेल सुविधाओं के विस्तार के साथ प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखना लुहणू को शहर के प्रमुख खेल केंद्र के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
कोट
लुहणू क्रिकेट मैदान को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है। हमारी सोच है कि यह केवल क्रिकेट खेलने का मैदान न रहे, बल्कि हरियाली से घिरे क्रिकेट पार्क के रूप में अपनी अलग पहचान बनाए। मैदान के तीन तरफ सुखचैन के पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा अशोका, चंपा और सजावटी पौधे भी लगाए हैं। हम चाहते हैं कि यहां करीब 90 प्रतिशत हिस्सा हरियाली वाला और 10 प्रतिशत निर्माण वाला हो, ताकि खिलाड़ियों और दर्शकों को प्राकृतिक माहौल मिले।
-विशाल जगोता, सचिव, जिला क्रिकेट संघ,बिलासपुर
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90 फीसदी हिस्से में रहेगी हरियाली, 10 फीसदी में होगा सीमेंट-कंक्रीट का निर्माण
सरोज पाठक
बिलासपुर। गोबिंदसागर झील के किनारे स्थित लुहणू क्रिकेट मैदान को अब सिर्फ क्रिकेट खेलने के मैदान तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे क्रिकेट पार्क के रूप में विकसित करने की तैयारी है। मैदान के तीन तरफ सुखचैन के पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा अशोका, चंपा और अन्य सजावटी पौधे भी लगाए जा रहे हैं। योजना के तहत मैदान के करीब 90 फीसदी हिस्से में हरियाली और 10 फीसदी हिस्से में सीमेंट-कंक्रीट का निर्माण रखा जाएगा।
लुहणू मैदान की लोकेशन इसकी सबसे बड़ी खासियत है। एक ओर गोबिंदसागर झील और दूसरी तरफ बंदला की पहाड़ियां दिखाई देती हैं। बंदला से उड़ान भरने वाले पैराग्लाइडर भी लुहणू में उतरते हैं। ऐसे में क्रिकेट, झील, पहाड़ और साहसिक पर्यटन गतिविधियों का मेल इस क्षेत्र को अलग पहचान दे सकता है। जिला क्रिकेट संघ की ओर से मैदान को जरूरत के अनुसार चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है। मैदान के आसपास अनावश्यक निर्माण बढ़ाने के बजाय हरियाली को प्राथमिकता दी जा रही है। आमतौर पर क्रिकेट मैदान के खेल क्षेत्र में हरियाली होती है, जबकि आसपास कंक्रीट का ढांचा दिखाई देता है। लुहणू में इसके विपरीत पूरे परिसर को प्राकृतिक माहौल से जोड़ने की योजना है। मैदान के तीन तरफ सुखचैन के पौधे लगाए गए हैं। इसके साथ करीब 50 अशोका, 50 सजावटी और 50 चंपा के पौधे भी लगाए गए हैं। इनके बढ़ने के साथ परिसर में हरियाली का दायरा और बढ़ेगा। मैदान की सुविधाओं को भविष्य में जरूरत के अनुसार बढ़ाने के साथ उसके प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखना भी योजना का हिस्सा है। संवाद
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बड़े मैचों से बढ़ेंगी खेल पर्यटन की संभावनाएं
प्रदेश में अब तक बड़े क्रिकेट मुकाबलों के लिए धर्मशाला स्टेडियम को प्राथमिकता मिलती रही है। हाल ही में लुहणू मैदान में मुंबई और हिमाचल के बीच रणजी मुकाबला खेला गया। इसके बाद मैदान की खूबसूरती और लोकेशन की खूब सराहना हुई। इससे यहां भविष्य में बड़े क्रिकेट आयोजनों की उम्मीद बढ़ी है। बड़े मुकाबले होने से मैदान को पहचान मिलने के साथ स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर खेल वातावरण भी मिल सकता है। वहीं, बाहर से आने वाले खिलाड़ियों और दर्शकों की आवाजाही बढ़ने पर होटल, खानपान और अन्य स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि, यह फायदा बड़े आयोजनों की नियमितता और पर्यटकों की आवाजाही पर निर्भर करेगा।
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झील, पैराग्लाइडिंग और रेल वायाडक्ट से जुड़ेंगी संभावनाएं
लुहणू क्रिकेट मैदान की भौगोलिक स्थिति इसे खेल और पर्यटन के मेल के लिए खास बनाती है। क्रिकेट मुकाबलों के दौरान बाहर से आने वाले खिलाड़ी और दर्शक गोबिंदसागर झील, बंदला की पहाड़ियों और पैराग्लाइडिंग का आनंद ले सकते हैं। झील, पहाड़ियों, रेल लाइन के वायाडक्ट और क्रिकेट मैदान की नजदीकी आने वाले समय में इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से और आकर्षक बना सकती है।
क्रिकेट के साथ दूसरे खेलों को भी मंच
लुहणू परिसर में बना एथलेटिक्स ट्रैक भी युवाओं के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी करने वाले युवा यहां नियमित अभ्यास करते हैं। इससे परिसर का इस्तेमाल क्रिकेट के अलावा शारीरिक अभ्यास और अन्य खेल गतिविधियों के लिए भी हो रहा है। खेल सुविधाओं के विस्तार के साथ प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखना लुहणू को शहर के प्रमुख खेल केंद्र के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
कोट
लुहणू क्रिकेट मैदान को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है। हमारी सोच है कि यह केवल क्रिकेट खेलने का मैदान न रहे, बल्कि हरियाली से घिरे क्रिकेट पार्क के रूप में अपनी अलग पहचान बनाए। मैदान के तीन तरफ सुखचैन के पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा अशोका, चंपा और सजावटी पौधे भी लगाए हैं। हम चाहते हैं कि यहां करीब 90 प्रतिशत हिस्सा हरियाली वाला और 10 प्रतिशत निर्माण वाला हो, ताकि खिलाड़ियों और दर्शकों को प्राकृतिक माहौल मिले।
-विशाल जगोता, सचिव, जिला क्रिकेट संघ,बिलासपुर