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Bilaspur News: मनरेगा के नाम व मूल भावना से छेड़छाड़ के विरोध में उग्र हुई किसान सभा
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स्वारघाट में तहसीलदार को को ज्ञापन सौंपते किसान सभा के सदस्य। स्रोत: सभा
श्री नयना देवी के स्वारघाट में धरना-प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
चेताया, छेड़छाड़ बंद नहीं की गई तो किसान सभा प्रदेशभर में करेगी आंदोलन
बोले-योजना के स्वरूप में बदलाव करना संकीर्ण मानसिकता का परिचायक
संवाद न्यूज एजेंसी
स्वारघाट(बिलासपुर)। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना के नाम में बदलाव, इसकी मूल भावना से छेड़छाड़ किए जाने के विरोध में हिमाचल किसान सभा और नयना देवी किसान सभा के बैनर तले उपमंडल श्री नयना देवी के स्वारघाट में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के प्रतिनिधियों ने उपमंडल कार्यालय नयना देवी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर केंद्र सरकार से मनरेगा के पुराने स्वरूप को बहाल रखने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों की आजीविका का मजबूत सहारा है। किसान सभा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा योजना के नाम में बदलाव और इसके उद्देश्यों में परिवर्तन करने से इसकी आत्मा को कमजोर किया जा रहा है, जिसका सीधा नुकसान गांवों के गरीब किसानों, दिहाड़ी मजदूरों और बेरोजगारों को होगा। धरने को संबोधित करते हुए नयना देवी किसान सभा के प्रधान एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (हिमाचल प्रदेश) के वरिष्ठ नेता भाग सिंह चौधरी ने कहा कि वर्ष 2005 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर मनरेगा योजना की शुरुआत ग्रामीण भारत के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए की थी। इस योजना ने गांवों में रोजगार के अवसर पैदा किए, पलायन को रोका और गरीब परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलना और इसके स्वरूप में बदलाव करना संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है और यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के योगदान को नजरअंदाज करने जैसा है। भाग सिंह चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा के साथ छेड़छाड़ बंद नहीं की गई तो किसान सभा प्रदेशभर में आंदोलन तेज करेगी। धरना-प्रदर्शन को किसान सभा के अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा के तहत रोजगार के दिनों में कटौती, भुगतान में देरी और तकनीकी शर्तों को कठोर बनाना ग्रामीण गरीबों के साथ अन्याय है। उन्होंने मांग की कि मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी को सख्ती से लागू किया जाए और मजदूरी समय पर प्रदान की जाए। इस अवसर पर कर्म चंद, राम सिंह, सुरेश चौधरी, दीदार सिंह सहित किसान सभा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन वक्ताओं ने साफ किया कि यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
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चेताया, छेड़छाड़ बंद नहीं की गई तो किसान सभा प्रदेशभर में करेगी आंदोलन
बोले-योजना के स्वरूप में बदलाव करना संकीर्ण मानसिकता का परिचायक
संवाद न्यूज एजेंसी
स्वारघाट(बिलासपुर)। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना के नाम में बदलाव, इसकी मूल भावना से छेड़छाड़ किए जाने के विरोध में हिमाचल किसान सभा और नयना देवी किसान सभा के बैनर तले उपमंडल श्री नयना देवी के स्वारघाट में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के प्रतिनिधियों ने उपमंडल कार्यालय नयना देवी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर केंद्र सरकार से मनरेगा के पुराने स्वरूप को बहाल रखने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों की आजीविका का मजबूत सहारा है। किसान सभा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा योजना के नाम में बदलाव और इसके उद्देश्यों में परिवर्तन करने से इसकी आत्मा को कमजोर किया जा रहा है, जिसका सीधा नुकसान गांवों के गरीब किसानों, दिहाड़ी मजदूरों और बेरोजगारों को होगा। धरने को संबोधित करते हुए नयना देवी किसान सभा के प्रधान एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (हिमाचल प्रदेश) के वरिष्ठ नेता भाग सिंह चौधरी ने कहा कि वर्ष 2005 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर मनरेगा योजना की शुरुआत ग्रामीण भारत के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए की थी। इस योजना ने गांवों में रोजगार के अवसर पैदा किए, पलायन को रोका और गरीब परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान किया।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलना और इसके स्वरूप में बदलाव करना संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है और यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के योगदान को नजरअंदाज करने जैसा है। भाग सिंह चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा के साथ छेड़छाड़ बंद नहीं की गई तो किसान सभा प्रदेशभर में आंदोलन तेज करेगी। धरना-प्रदर्शन को किसान सभा के अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा के तहत रोजगार के दिनों में कटौती, भुगतान में देरी और तकनीकी शर्तों को कठोर बनाना ग्रामीण गरीबों के साथ अन्याय है। उन्होंने मांग की कि मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी को सख्ती से लागू किया जाए और मजदूरी समय पर प्रदान की जाए। इस अवसर पर कर्म चंद, राम सिंह, सुरेश चौधरी, दीदार सिंह सहित किसान सभा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन वक्ताओं ने साफ किया कि यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
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