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बिना आरओडब्ल्यू के ही की जा रही फोरलेन के कारण हुए नुकसान की जांच
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कीरतपुर- नेरचोक फोरलेन में आरोडब्लू के नुकसान की जांच करने मल्यावर पहुंचे प्रशासन, एनएचएआई के अध?
- फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। राज्य सरकार के आदेशों के अनुसार कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) के अंदर और बाहर हुए नुकसान की जांच उपमंडल स्तर के अधिकारी, एनएचएआई व राजस्व विभाग के अधिकारी मिलकर कर रहे हैं। लेकिन विस्थापित व प्रभावित समिति का आरोप है कि प्रशासन इस जांच को पूरा करने की मात्र औपचारिकता कर रहा है।
मंगलवार को घुमारवीं उपमंडल के बलोह, मल्यावर, अमरसिंहपुरा, रोहिण, पनोह, सनौर, खरवाड़ी, बागठेड़ू, बकरोआ, पल्थीं, लडयाना, दडय़ाना और औहर समेत कई अन्य गांवों में एसडीएम घुमारवीं की अगुवाई में एनएचएआई, सड़क निर्माण कंपनी और राजस्व विभाग के अधिकारी आरओडब्ल्यू के बाहर और अंदर हुए नुकसान की जांच करने पहुंचे। लेकिन हैरानी का विषय है कि किसी भी अधिकारी के पास न तो इस जांच को पूरा करने के लिए राइट ऑफ वे था और न ही भूमि अधिग्रहण प्लान था।
वहीं मौके पर मौजूद विस्थापित एवं प्रभावित फोरलेन समिति के महासचिव ने जब अधिकारियों से उक्त रिकॉर्ड की मांग की तो अधिकारियों ने कहा कि उनके पास रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
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समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि जब तक एनएचएआई आरओडब्ल्यू व असल भूमि अधिग्रहण प्लान उपलब्ध नहीं करवाती, तकनीकी अधिकारी जीपीएस कोअर्डिनेट केएमएल फाइल के साथ आरओडब्ल्यू को मौका पर फिक्स नहीं करते, राजस्व पटवारी कानूनगो इंतकालों के साथ संलग्न ततीमा पढ़ने योग्य नहीं देते हैं, तब तक किसी भी भू मालिक के आरओडब्ल्यू के अंदर बाहर हुए नुकसान का आकलन करना असंभव है।
कहा कि प्रशासन राज्य सरकार के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है। इसके अतिरिक्त मौके पर पाया गया कि फोरलेन की वजह से कई नाले और रास्ते बंद हो गए हैं। इससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
एसडीएम घुमारवीं राजीव ठाकुर ने कहा कि विस्थापित समिति के महासचिव ने आरओडब्ल्यू और भूमि अधिग्रहण प्लान को लेकर मांग की थी। कहा कि उन्हें 19 नवंबर को दस्तावेज के साथ वार्ता के लिए बुलाया गया है। वहीं फोरलेन से बंद हुए कुछ रास्ते खोल दिए गए हैं बाकि पर कार्य किया जाएगा।
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मंगलवार को घुमारवीं उपमंडल के बलोह, मल्यावर, अमरसिंहपुरा, रोहिण, पनोह, सनौर, खरवाड़ी, बागठेड़ू, बकरोआ, पल्थीं, लडयाना, दडय़ाना और औहर समेत कई अन्य गांवों में एसडीएम घुमारवीं की अगुवाई में एनएचएआई, सड़क निर्माण कंपनी और राजस्व विभाग के अधिकारी आरओडब्ल्यू के बाहर और अंदर हुए नुकसान की जांच करने पहुंचे। लेकिन हैरानी का विषय है कि किसी भी अधिकारी के पास न तो इस जांच को पूरा करने के लिए राइट ऑफ वे था और न ही भूमि अधिग्रहण प्लान था।
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वहीं मौके पर मौजूद विस्थापित एवं प्रभावित फोरलेन समिति के महासचिव ने जब अधिकारियों से उक्त रिकॉर्ड की मांग की तो अधिकारियों ने कहा कि उनके पास रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
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समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि जब तक एनएचएआई आरओडब्ल्यू व असल भूमि अधिग्रहण प्लान उपलब्ध नहीं करवाती, तकनीकी अधिकारी जीपीएस कोअर्डिनेट केएमएल फाइल के साथ आरओडब्ल्यू को मौका पर फिक्स नहीं करते, राजस्व पटवारी कानूनगो इंतकालों के साथ संलग्न ततीमा पढ़ने योग्य नहीं देते हैं, तब तक किसी भी भू मालिक के आरओडब्ल्यू के अंदर बाहर हुए नुकसान का आकलन करना असंभव है।
कहा कि प्रशासन राज्य सरकार के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है। इसके अतिरिक्त मौके पर पाया गया कि फोरलेन की वजह से कई नाले और रास्ते बंद हो गए हैं। इससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
एसडीएम घुमारवीं राजीव ठाकुर ने कहा कि विस्थापित समिति के महासचिव ने आरओडब्ल्यू और भूमि अधिग्रहण प्लान को लेकर मांग की थी। कहा कि उन्हें 19 नवंबर को दस्तावेज के साथ वार्ता के लिए बुलाया गया है। वहीं फोरलेन से बंद हुए कुछ रास्ते खोल दिए गए हैं बाकि पर कार्य किया जाएगा।