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Bilaspur News: सीवरेज लाइन के ऊपर बोरवेल निर्माण मामले में जलशक्ति विभाग ने मांगी रिपोर्ट
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वार्ड नंबर-9 की पेयजल योजना पर उठे सवाल, एसडीओ और जेई को दो दिन में तथ्य प्रस्तुत करने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर परिषद बिलासपुर के वार्ड नंबर-9 में सीवरेज लाइन के ऊपर हैंडपंप एवं बोरवेल स्थापित किए जाने के मामले में जलशक्ति विभाग ने जांच शुरू कर दी है। अधिशाषी अभियंता राकेश वैद्य ने सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता से दो दिन के भीतर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई और स्थिति स्पष्ट होगी।
नगर परिषद की करीब 50 लाख रुपये की इस पेयजल योजना का क्रियान्वयन जल शक्ति विभाग के माध्यम से किया जा रहा है। योजना के तहत जियोलॉजिकल सर्वे, स्थान चयन और ओवरहेड टैंक निर्माण की जिम्मेदारी विभाग के पास थी। इसके लिए नगर परिषद की ओर से विभाग को 23 लाख रुपये भी जारी किए जा चुके हैं। परिषद का कहना है कि हैंडपंप खुले स्थान पर स्थापित किए जाने थे, ताकि अधिक से अधिक घरों तक पेयजल आपूर्ति की जा सके। विवादित हैंडपंप सार्वजनिक स्थान के बजाय एक व्यक्ति के आंगन के पास स्थापित किया गया, जहां पहले से सीवरेज लाइन गुजर रही थी। आरोप है कि तकनीकी मानकों और जियोलॉजिकल सर्वे की प्रक्रिया का पालन किए बिना ही वहां ड्रिलिंग कर दी गई। बताया जा रहा है कि पहले हैंडपंप के लिए दूसरा स्थान प्रस्तावित था, लेकिन बाद में स्थान बदल दिया गया।
कोट
विभागीय टीम को मौके पर भेजा गया था। टीम मामले के समाधान के लिए काम कर रही है। एसडीओ और जेई से पूरे मामले की दो दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
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-राकेश वैद्य, अधिशाषी अभियंता, जलशक्ति विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर परिषद बिलासपुर के वार्ड नंबर-9 में सीवरेज लाइन के ऊपर हैंडपंप एवं बोरवेल स्थापित किए जाने के मामले में जलशक्ति विभाग ने जांच शुरू कर दी है। अधिशाषी अभियंता राकेश वैद्य ने सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता से दो दिन के भीतर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई और स्थिति स्पष्ट होगी।
नगर परिषद की करीब 50 लाख रुपये की इस पेयजल योजना का क्रियान्वयन जल शक्ति विभाग के माध्यम से किया जा रहा है। योजना के तहत जियोलॉजिकल सर्वे, स्थान चयन और ओवरहेड टैंक निर्माण की जिम्मेदारी विभाग के पास थी। इसके लिए नगर परिषद की ओर से विभाग को 23 लाख रुपये भी जारी किए जा चुके हैं। परिषद का कहना है कि हैंडपंप खुले स्थान पर स्थापित किए जाने थे, ताकि अधिक से अधिक घरों तक पेयजल आपूर्ति की जा सके। विवादित हैंडपंप सार्वजनिक स्थान के बजाय एक व्यक्ति के आंगन के पास स्थापित किया गया, जहां पहले से सीवरेज लाइन गुजर रही थी। आरोप है कि तकनीकी मानकों और जियोलॉजिकल सर्वे की प्रक्रिया का पालन किए बिना ही वहां ड्रिलिंग कर दी गई। बताया जा रहा है कि पहले हैंडपंप के लिए दूसरा स्थान प्रस्तावित था, लेकिन बाद में स्थान बदल दिया गया।
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कोट
विभागीय टीम को मौके पर भेजा गया था। टीम मामले के समाधान के लिए काम कर रही है। एसडीओ और जेई से पूरे मामले की दो दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
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-राकेश वैद्य, अधिशाषी अभियंता, जलशक्ति विभाग