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Bilaspur News: प्रारंभिक रिपोर्ट में खाने योग्य निकली घुमारवीं के जंगलों में मिली गुच्छी
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घुमारवीं की ग्राम पंचायत पनौल के ओसल जंगल में मिली गुच्छी।
आईसीएआर सोलन की लैब जांच में खाद्य मोरचेला से मेल खाते मिले लक्षण
कम ऊंचाई वाले क्षेत्र में गुच्छी मिलना वैज्ञानिकों के लिए भी हैरानी
डीएनए रिपोर्ट आने के बाद होगी अंतिम पुष्टि, सही रही तो होगी बड़ी उपलब्धि
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। विधानसभा क्षेत्र घुमारवीं के जंगलों से हाल ही मिली गुच्छी (मोरचेला) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), सोलन की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह गुच्छी खाने योग्य प्रजाति से मेल खाती पाई गई है।
पनौल पंचायत के ओसल जंगल क्षेत्र से एकत्र किए गए नमूनों का अध्ययन आईसीएआर के डायरेक्टरेट ऑफ मशरूम रिसर्च सोलन में किया गया। वैज्ञानिकों ने गुच्छी की बाहरी बनावट, छत्तेदार सिर, रंग, आकार और आंतरिक संरचना की जांच की और पाया कि यह खाद्य श्रेणी की मोरचेला प्रजाति के अनुरूप है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मोरचेला हिमालयी क्षेत्रों की सबसे दुर्लभ और महंगी खाद्य फसलों में गिनी जाती है। आमतौर पर यह अत्यधिक ठंडे, ऊंचाई वाले और नमी वाले इलाकों में ही पाई जाती है। ऐसे में घुमारवीं जैसे अपेक्षाकृत कम ऊंचाई और गर्म जलवायु वाले क्षेत्र में इसका मिलना वैज्ञानिकों के लिए भी आश्चर्यजनक है।
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ओसल जंगल में गुच्छी के नमूने इक्का-दुक्का नहीं बल्कि काफी संख्या में पाए गए, जिससे इसकी खाद्यता पर शुरू में संशय था। प्रारंभिक रिपोर्ट में सकारात्मक परिणाम आने से यह भरोसा बढ़ गया है कि यह गुच्छी वास्तव में खाने योग्य हो सकती है। हालांकि, अंतिम पुष्टि के लिए मॉलिक्यूलर (डीएनए आधारित) जांच की आवश्यकता है।
आईसीएआर और बागवानी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डीएनए रिपोर्ट भी सकारात्मक आती है, तो यह घुमारवीं क्षेत्र के लिए बड़ी बात होगी। इससे स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ और हिमाचल प्रदेश में गुच्छी के संरक्षण और नियंत्रित उत्पादन के नए रास्ते खुल सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें अंतिम मॉलिक्यूलर रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
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कम ऊंचाई वाले क्षेत्र में गुच्छी मिलना वैज्ञानिकों के लिए भी हैरानी
डीएनए रिपोर्ट आने के बाद होगी अंतिम पुष्टि, सही रही तो होगी बड़ी उपलब्धि
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। विधानसभा क्षेत्र घुमारवीं के जंगलों से हाल ही मिली गुच्छी (मोरचेला) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), सोलन की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह गुच्छी खाने योग्य प्रजाति से मेल खाती पाई गई है।
पनौल पंचायत के ओसल जंगल क्षेत्र से एकत्र किए गए नमूनों का अध्ययन आईसीएआर के डायरेक्टरेट ऑफ मशरूम रिसर्च सोलन में किया गया। वैज्ञानिकों ने गुच्छी की बाहरी बनावट, छत्तेदार सिर, रंग, आकार और आंतरिक संरचना की जांच की और पाया कि यह खाद्य श्रेणी की मोरचेला प्रजाति के अनुरूप है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि मोरचेला हिमालयी क्षेत्रों की सबसे दुर्लभ और महंगी खाद्य फसलों में गिनी जाती है। आमतौर पर यह अत्यधिक ठंडे, ऊंचाई वाले और नमी वाले इलाकों में ही पाई जाती है। ऐसे में घुमारवीं जैसे अपेक्षाकृत कम ऊंचाई और गर्म जलवायु वाले क्षेत्र में इसका मिलना वैज्ञानिकों के लिए भी आश्चर्यजनक है।
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ओसल जंगल में गुच्छी के नमूने इक्का-दुक्का नहीं बल्कि काफी संख्या में पाए गए, जिससे इसकी खाद्यता पर शुरू में संशय था। प्रारंभिक रिपोर्ट में सकारात्मक परिणाम आने से यह भरोसा बढ़ गया है कि यह गुच्छी वास्तव में खाने योग्य हो सकती है। हालांकि, अंतिम पुष्टि के लिए मॉलिक्यूलर (डीएनए आधारित) जांच की आवश्यकता है।
आईसीएआर और बागवानी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डीएनए रिपोर्ट भी सकारात्मक आती है, तो यह घुमारवीं क्षेत्र के लिए बड़ी बात होगी। इससे स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ और हिमाचल प्रदेश में गुच्छी के संरक्षण और नियंत्रित उत्पादन के नए रास्ते खुल सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें अंतिम मॉलिक्यूलर रिपोर्ट पर टिकी हुई है।