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Bilaspur News: गोचर जंगल में खैर का अवैध कटान, 17 पेड़ों के 107 मोछे बरामद
Sat, 03 Jan 2026 11:35 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 03 Jan 2026 11:35 PM IST
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पकड़े गए खैर के लॉग के साथ वन विभाग की टीम। स्रोत: जागरूक पाठक
वन विभाग की सख्त कार्रवाई, एफआईआर दर्ज, खैर माफिया की तलाश जारी
पेड़ों को काटने के बाद सुनियोजित तरीके से जंगल के अंदर छिपा दी थी लकड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। जिले के झंडूता क्षेत्र की वन बीट घंडीर के गोचर जंगल में खैर के अवैध कटान का एक बड़ा मामला सामने आया है। खैर के पेड़ों को अवैध रूप से काटकर उनके मोछे (लट्ठे) जंगल में ही छिपा दिए गए थे। वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए 17 खैर के पेड़ों के कुल 107 मोछे (लट्ठे) बरामद किए हैं। यह लकड़ी गोचर जंगल के नाले और आसपास के इलाकों में अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखी गई थी।
वन विभाग को कुछ समय से गोचर जंगल में अवैध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। इसी बीच खैर के पेड़ों की कटाई को लेकर गुप्त सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर सघन तलाशी और निरीक्षण अभियान चलाया। जांच के दौरान टीम को जंगल के भीतर और नाले के पास खैर के कटे हुए पेड़ों के 107 मोछे बरामद हुए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि अवैध कटान सुनियोजित तरीके से किया गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि खैर माफिया ने पेड़ों को काटने के बाद लकड़ी को जंगल के अंदर ही छिपा दिया था, ताकि रात के समय वाहनों के माध्यम से इसे बाहर ले जाया जा सके। समय रहते वन विभाग की कार्रवाई से तस्करों की यह योजना नाकाम हो गई। वन परिक्षेत्र अधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि जंगल से काटे गए खैर के पेड़ों के संबंध में एफआईआर दर्ज करवा दी गई है। इसके साथ ही विभाग अपने स्तर पर खैर माफिया की पहचान और उनके नेटवर्क की गहन जांच कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वन विभाग की टीम ने अवैध कटान में शामिल लोगों तक पहुंचने के लिए आसपास के गांवों में पूछताछ शुरू कर दी है।
लकड़ी के परिवहन में इस्तेमाल किए जाने वाले संभावित वाहनों, मजदूरों और स्थानीय स्तर पर सक्रिय तस्करों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। विभाग को आशंका है कि इस अवैध कटान के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। आम जनता से भी अपील की है कि यदि कहीं भी जंगलों में अवैध कटान, लकड़ी तस्करी या संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दें तो तुरंत विभाग को सूचित करें। विभाग ने दोहराया कि वन संपदा की सुरक्षा के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
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पेड़ों को काटने के बाद सुनियोजित तरीके से जंगल के अंदर छिपा दी थी लकड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। जिले के झंडूता क्षेत्र की वन बीट घंडीर के गोचर जंगल में खैर के अवैध कटान का एक बड़ा मामला सामने आया है। खैर के पेड़ों को अवैध रूप से काटकर उनके मोछे (लट्ठे) जंगल में ही छिपा दिए गए थे। वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए 17 खैर के पेड़ों के कुल 107 मोछे (लट्ठे) बरामद किए हैं। यह लकड़ी गोचर जंगल के नाले और आसपास के इलाकों में अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखी गई थी।
वन विभाग को कुछ समय से गोचर जंगल में अवैध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। इसी बीच खैर के पेड़ों की कटाई को लेकर गुप्त सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर सघन तलाशी और निरीक्षण अभियान चलाया। जांच के दौरान टीम को जंगल के भीतर और नाले के पास खैर के कटे हुए पेड़ों के 107 मोछे बरामद हुए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि अवैध कटान सुनियोजित तरीके से किया गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि खैर माफिया ने पेड़ों को काटने के बाद लकड़ी को जंगल के अंदर ही छिपा दिया था, ताकि रात के समय वाहनों के माध्यम से इसे बाहर ले जाया जा सके। समय रहते वन विभाग की कार्रवाई से तस्करों की यह योजना नाकाम हो गई। वन परिक्षेत्र अधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि जंगल से काटे गए खैर के पेड़ों के संबंध में एफआईआर दर्ज करवा दी गई है। इसके साथ ही विभाग अपने स्तर पर खैर माफिया की पहचान और उनके नेटवर्क की गहन जांच कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वन विभाग की टीम ने अवैध कटान में शामिल लोगों तक पहुंचने के लिए आसपास के गांवों में पूछताछ शुरू कर दी है।
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लकड़ी के परिवहन में इस्तेमाल किए जाने वाले संभावित वाहनों, मजदूरों और स्थानीय स्तर पर सक्रिय तस्करों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। विभाग को आशंका है कि इस अवैध कटान के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। आम जनता से भी अपील की है कि यदि कहीं भी जंगलों में अवैध कटान, लकड़ी तस्करी या संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दें तो तुरंत विभाग को सूचित करें। विभाग ने दोहराया कि वन संपदा की सुरक्षा के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
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