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जर्जर भवन में मौत के साये में बैठ कर काम कर रहे एचआरटीसी के कर्मचारी
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प्रकाश ठाकुर
बिलासपुर। बिलासपुर के अपर निहाल सेक्टर स्थित हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के जर्जर भवन में कर्मचारी मौत के साये में बैठ कर काम कर रहे हैं। इस भवन की हालत ऐसी है कि कहीं से प्लास्टर गिर रहा है तो कहीं से दीवार।
हालांकि करीब चार साल पहले तत्कालीन परिवहन मंत्री ने इसके हालात सुधारने के निर्देश दिए थे, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। एचआरटीसी के इस जर्जर भवन में एक तरफ क्षेत्रीय प्रबंधक का कार्यालय है तो दूसरी तरफ वर्कशॉप है। भवन में 100 से अधिक कर्मचारी और अधिकारी काम करते हैं, जबकि सैकड़ों लोगों का यहां आना-जाना रहता है।
नाम न छापने की शर्त पर एक कुछ कर्मचारियों ने बताया कि मरम्मत के नाम पर आज तक सिर्फ क्षेत्रीय प्रबंधक के कमरे की लीपा-पोती की गई। जिस ओर कर्मचारी बैठते हैं उस तरफ बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हैं। यहां कभी भी प्लास्टर गिर जाता है। यहां हर वक्त जान जाने का खतरा बना रहता है।
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साल 2018 में तत्कालीन परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने भवन का निरीक्षण किया था। उन्होंने निगम के अधिकारियों को मरम्मत करवाने के निर्देश दिए थे। मंत्री के निर्देश के बाद निगम के अधिकारियों ने मरम्मत के लिए 50 लाख रुपये का प्राकलन तैयार किया।
इस प्राकलन को मंजूरी के लिए निदेशालय भेजा था, लेकिन बजट के अभाव में आज तक भवन की मरम्मत नहीं हो पाई है। उधर, क्षेत्रीय प्रबंधक बिलासपुर जोगिंद्र चौधरी ने बताया कि भवन की मरम्मत की जा रही है। जल्द ही पूरे भवन की मरम्मत कर दी जाएगी।
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बिलासपुर। बिलासपुर के अपर निहाल सेक्टर स्थित हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के जर्जर भवन में कर्मचारी मौत के साये में बैठ कर काम कर रहे हैं। इस भवन की हालत ऐसी है कि कहीं से प्लास्टर गिर रहा है तो कहीं से दीवार।
हालांकि करीब चार साल पहले तत्कालीन परिवहन मंत्री ने इसके हालात सुधारने के निर्देश दिए थे, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। एचआरटीसी के इस जर्जर भवन में एक तरफ क्षेत्रीय प्रबंधक का कार्यालय है तो दूसरी तरफ वर्कशॉप है। भवन में 100 से अधिक कर्मचारी और अधिकारी काम करते हैं, जबकि सैकड़ों लोगों का यहां आना-जाना रहता है।
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नाम न छापने की शर्त पर एक कुछ कर्मचारियों ने बताया कि मरम्मत के नाम पर आज तक सिर्फ क्षेत्रीय प्रबंधक के कमरे की लीपा-पोती की गई। जिस ओर कर्मचारी बैठते हैं उस तरफ बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हैं। यहां कभी भी प्लास्टर गिर जाता है। यहां हर वक्त जान जाने का खतरा बना रहता है।
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साल 2018 में तत्कालीन परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने भवन का निरीक्षण किया था। उन्होंने निगम के अधिकारियों को मरम्मत करवाने के निर्देश दिए थे। मंत्री के निर्देश के बाद निगम के अधिकारियों ने मरम्मत के लिए 50 लाख रुपये का प्राकलन तैयार किया।
इस प्राकलन को मंजूरी के लिए निदेशालय भेजा था, लेकिन बजट के अभाव में आज तक भवन की मरम्मत नहीं हो पाई है। उधर, क्षेत्रीय प्रबंधक बिलासपुर जोगिंद्र चौधरी ने बताया कि भवन की मरम्मत की जा रही है। जल्द ही पूरे भवन की मरम्मत कर दी जाएगी।