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Bilaspur News: एम्स बिलासपुर का रूमेटोलॉजी विभाग साबित हो रहा वरदान
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ऑटोइम्यून और रुमेटोलॉजिकल रोगों से जूझ रहे मरीजों को मिल रहीं विशेषज्ञ सेवाएं
दूरदराज क्षेत्रों में भी पहुंच, महंगी दवाएं सस्ती दरों पर कराई जा रहीं उपलब्ध
हर माह प्रदेशभर से इलाज कराने के लिए एम्स पहुंच रहे 800 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर हिमाचल प्रदेश का पहला संस्थान है जिसमें एक पूर्ण कार्यात्मक रूमेटोलॉजी विभाग संचालित हो रहा है। पूर्व में रूमेटोलॉजी के रोगियों का इलाज जनरल मेडिसिन विभाग की यूनिट की ओर से किया जाता था, जिसका नेतृत्व डॉ. देवेंद्र बैरवा और डॉ. तरुण शर्मा कर रहे थे। अब स्वतंत्र विभाग के रूप में इसका विस्तार हुआ है।
डॉ. देवेंद्र बैरवा और डॉ. योगेश प्रीत सिंह की देखरेख में विभाग प्रतिदिन ओपीडी और आईपीडी सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। आरंभ में जहां प्रतिमाह 500 ओपीडी परामर्श होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 800 तक पहुंच गया है। अब तक 11,000 से अधिक ओपीडी परामर्श हो चुके हैं, जबकि प्रतिमाह 100 मरीज आईपीडी सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। विभाग समय-समय पर राज्य के दूर जिलों में कैंप लगाकर रोगियों को लाभ पहुंचा रहा है। हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजनाओं की सहायता से रोगियों को बायोलॉजिकल जैसी महंगी दवाएं भी किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। रोगियों की जांच की सटीकता और सुलभता बढ़ाने के लिए विभाग के पास अपनी समर्पित ऑटोइम्यून प्रयोगशाला ‘ईसीआर लैब’ है, जिसकी लागत लगभग 2 करोड़ रुपये है। इस लैब में उच्च गुणवत्ता वाले परीक्षण न्यूनतम लागत पर किए जा रहे हैं। इसकी निगरानी डॉ. रवि कुमार शर्मा कर रहे हैं। विभाग को प्रति आईएनआई-एसएस सत्र में एक डीएम (डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन) सीट की मंजूरी मिल चुकी है। जुलाई 2024 में पहला डीएम छात्र विभाग में शामिल हुआ है, जिससे सुपर स्पेशयलिटी रूमेटोलॉजी प्रशिक्षण की विधिवत शुरुआत हो चुकी है। एम्स बिलासपुर का यह विभाग ऑटोइम्यून और रूमेटोलॉजी के रोगों से पीड़ित मरीजों को न सिर्फ बेहतर इलाज उपलब्ध करवा रहा है, बल्कि हिमाचल में सुपर-स्पेशयलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का एक नया कीर्तिमान भी स्थापित कर रहा है।
बताते चलें कि अप्रैल माह रूमेटोलॉजी जागरुकता माह के रूप में मनाया जाता है और इसी अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), बिलासपुर के क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी और रूमेटोलॉजी विभाग की उल्लेखनीय सेवाओं ने प्रदेशभर में मरीजों को राहत देने के लिए बेहतर काम किया है। नवंबर 2023 में यह विभाग एक स्वतंत्र इकाई के रूप में स्थापित किया गया और तभी से यह सेवा और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में तेज़ी से प्रगति कर रहा है।
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दूरदराज क्षेत्रों में भी पहुंच, महंगी दवाएं सस्ती दरों पर कराई जा रहीं उपलब्ध
हर माह प्रदेशभर से इलाज कराने के लिए एम्स पहुंच रहे 800 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर हिमाचल प्रदेश का पहला संस्थान है जिसमें एक पूर्ण कार्यात्मक रूमेटोलॉजी विभाग संचालित हो रहा है। पूर्व में रूमेटोलॉजी के रोगियों का इलाज जनरल मेडिसिन विभाग की यूनिट की ओर से किया जाता था, जिसका नेतृत्व डॉ. देवेंद्र बैरवा और डॉ. तरुण शर्मा कर रहे थे। अब स्वतंत्र विभाग के रूप में इसका विस्तार हुआ है।
डॉ. देवेंद्र बैरवा और डॉ. योगेश प्रीत सिंह की देखरेख में विभाग प्रतिदिन ओपीडी और आईपीडी सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। आरंभ में जहां प्रतिमाह 500 ओपीडी परामर्श होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 800 तक पहुंच गया है। अब तक 11,000 से अधिक ओपीडी परामर्श हो चुके हैं, जबकि प्रतिमाह 100 मरीज आईपीडी सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। विभाग समय-समय पर राज्य के दूर जिलों में कैंप लगाकर रोगियों को लाभ पहुंचा रहा है। हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजनाओं की सहायता से रोगियों को बायोलॉजिकल जैसी महंगी दवाएं भी किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। रोगियों की जांच की सटीकता और सुलभता बढ़ाने के लिए विभाग के पास अपनी समर्पित ऑटोइम्यून प्रयोगशाला ‘ईसीआर लैब’ है, जिसकी लागत लगभग 2 करोड़ रुपये है। इस लैब में उच्च गुणवत्ता वाले परीक्षण न्यूनतम लागत पर किए जा रहे हैं। इसकी निगरानी डॉ. रवि कुमार शर्मा कर रहे हैं। विभाग को प्रति आईएनआई-एसएस सत्र में एक डीएम (डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन) सीट की मंजूरी मिल चुकी है। जुलाई 2024 में पहला डीएम छात्र विभाग में शामिल हुआ है, जिससे सुपर स्पेशयलिटी रूमेटोलॉजी प्रशिक्षण की विधिवत शुरुआत हो चुकी है। एम्स बिलासपुर का यह विभाग ऑटोइम्यून और रूमेटोलॉजी के रोगों से पीड़ित मरीजों को न सिर्फ बेहतर इलाज उपलब्ध करवा रहा है, बल्कि हिमाचल में सुपर-स्पेशयलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का एक नया कीर्तिमान भी स्थापित कर रहा है।
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बताते चलें कि अप्रैल माह रूमेटोलॉजी जागरुकता माह के रूप में मनाया जाता है और इसी अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), बिलासपुर के क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी और रूमेटोलॉजी विभाग की उल्लेखनीय सेवाओं ने प्रदेशभर में मरीजों को राहत देने के लिए बेहतर काम किया है। नवंबर 2023 में यह विभाग एक स्वतंत्र इकाई के रूप में स्थापित किया गया और तभी से यह सेवा और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में तेज़ी से प्रगति कर रहा है।
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