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फोरलेन चौड़ाई विवाद : 38 मीटर बनाम मानक 45 मीटर
Sun, 26 Oct 2025 11:29 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 26 Oct 2025 11:29 PM IST
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मामले को लेकर एनएचएआई ने अभी तक नहीं की कोई कार्रवाई।
प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए मूल लेआउट में की गई छेड़छाड़
सड़क सुरक्षा मानकों की अनदेखी, खनिज संसाधनों का दिया रसूखदारों को लाभ
समिति ने की एफआईआर और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर–नेरचौक फोरलेन परियोजना में धराड़सानी के हिस्से में फोरलेन की चौड़ाई को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में एनएचएआई ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने की बात स्वीकार की है।
इस विवादित खंड में सड़क की चौड़ाई 38 मीटर है, जबकि मानकों के अनुसार यह 45 मीटर होनी चाहिए थी। झंडूता एसडीएम की जांच रिपोर्ट ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति का आरोप है कि प्रारंभिक भू-अर्जन रिपोर्ट में चौड़ाई 32 कर्म (45 मीटर) बताई गई थी, जबकि वास्तविक स्थिति 38 मीटर थी। समिति का कहना है कि यह रिपोर्ट प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गई थी और मूल लेआउट से छेड़छाड़ की गई। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना में एनएचएआई ने निजी हितधारकों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सड़क की मूल अलाइनमेंट में बदलाव किए। कुछ स्थानों पर यू-कट जैसी सुविधाएं भी नियमों के विरुद्ध दी गईं। इसके अलावा, सड़क सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए चौड़ाई में रिडक्शन और विस्तार किया गया, और 5 फीसदी अतिरिक्त भूमि की सेल डीड के नाम पर परियोजना निदेशक ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर भूमि, मकान, पेड़ और खनिज संसाधनों का लाभ उठाया। अधिकांश स्थानों पर इस दुरुपयोग की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ स्थलों की जांच बाकी है।
समिति ने प्रशासन से मांग की है कि नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला केवल फोरलेन चौड़ाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनहित, पारदर्शिता और नियमों के उल्लंघन के गंभीर मुद्दे में बदल जाएगा। समिति ने यह भी कहा कि वे इस मामले में जनहित याचिका कोर्ट में दायर करेंगे।
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प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए मूल लेआउट में की गई छेड़छाड़
सड़क सुरक्षा मानकों की अनदेखी, खनिज संसाधनों का दिया रसूखदारों को लाभ
समिति ने की एफआईआर और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर–नेरचौक फोरलेन परियोजना में धराड़सानी के हिस्से में फोरलेन की चौड़ाई को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में एनएचएआई ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने की बात स्वीकार की है।
इस विवादित खंड में सड़क की चौड़ाई 38 मीटर है, जबकि मानकों के अनुसार यह 45 मीटर होनी चाहिए थी। झंडूता एसडीएम की जांच रिपोर्ट ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति का आरोप है कि प्रारंभिक भू-अर्जन रिपोर्ट में चौड़ाई 32 कर्म (45 मीटर) बताई गई थी, जबकि वास्तविक स्थिति 38 मीटर थी। समिति का कहना है कि यह रिपोर्ट प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गई थी और मूल लेआउट से छेड़छाड़ की गई। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना में एनएचएआई ने निजी हितधारकों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सड़क की मूल अलाइनमेंट में बदलाव किए। कुछ स्थानों पर यू-कट जैसी सुविधाएं भी नियमों के विरुद्ध दी गईं। इसके अलावा, सड़क सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए चौड़ाई में रिडक्शन और विस्तार किया गया, और 5 फीसदी अतिरिक्त भूमि की सेल डीड के नाम पर परियोजना निदेशक ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर भूमि, मकान, पेड़ और खनिज संसाधनों का लाभ उठाया। अधिकांश स्थानों पर इस दुरुपयोग की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ स्थलों की जांच बाकी है।
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समिति ने प्रशासन से मांग की है कि नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला केवल फोरलेन चौड़ाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनहित, पारदर्शिता और नियमों के उल्लंघन के गंभीर मुद्दे में बदल जाएगा। समिति ने यह भी कहा कि वे इस मामले में जनहित याचिका कोर्ट में दायर करेंगे।
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