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Bilaspur News: डडनाल जंगल में अवैध मलबा डंपिंग पर वन विभाग की कार्रवाई
Thu, 18 Dec 2025 11:48 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 18 Dec 2025 11:48 PM IST
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एक्सक्लूसिव
कीरतपुर–नेरचौक फोरलेन निर्माण कंपनी पर 10,050 रुपये का जुर्माना
जंगल क्षेत्र में सरकारी वन भूमि पर मिला है 2 घन मीटर अवैध मलबा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर डडनाल जंगल क्षेत्र में अवैध मलबा डंपिंग का मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए फोरलेन निर्माण कंपनी पर 10,050 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति की शिकायत के बाद की गई। मगर शिकायतकर्ता का कहना है कि आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में इससे जुड़ी तमाम सूचनाएं नहीं दी गईं हैं।
समिति ने मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत पर विशेष सचिव के माध्यम से प्रिंसीपल चीफ कंजरवेटर वाइल्ड लाइफ धर्मशाला को जांच व उचित कार्रवाई के निर्देश दिए थे। शिकायत की प्रति वन मंडल अधिकारी बिलासपुर को भी भेजी गई थी। इसके पश्चात वन विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया, जिसमें डडनाल जंगल क्षेत्र में करीब 2 घन मीटर मलबा सरकारी/वन भूमि में अवैध रूप से डंप पाया गया। कार्रवाई के बावजूद वन विभाग की ओर से कई अहम जानकारियां साझा नहीं किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मलबा किस खसरा नंबर की भूमि पर डंप हुआ, सड़क विस्तार कर रही कंपनी का पूरा नाम व पता, मौके पर मौजूद वाहनों और मशीनरी का विवरण क्या था, तथा सड़क निर्माण से निकलने वाले मलबे की कुल क्षमता और उसे कहां डंप किया जाएगा, इसकी स्वीकृत डंपिंग साइटों की जानकारी क्या है। शिकायत में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि यह वह स्थान है जहां सड़क निर्माण कंपनी द्वारा बिना केंद्र को सूचित किए मूल अलाइनमेंट में बदलाव किया गया। इस क्षेत्र में हाल के समय में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और एक महिला घायल हुई है। करीब दो वर्ष से यहां वन-वे व्यवस्था लागू है, जबकि एनएचएआई पूरा टोल वसूल रहा है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद एनएचएआई यहां करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से सड़क विस्तार कार्य कर रही है, लेकिन विस्तार की लंबाई-चौड़ाई, कटने वाले पेड़ों की संख्या, फॉरेस्ट क्लीयरेंस और निर्माण से निकलने वाले मलबे के निस्तारण को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं की गई है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं है। पर्यावरण संरक्षण और आम लोगों की सुरक्षा के लिए पूरे मामले की पारदर्शी जांच और सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना जरूरी है।
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कीरतपुर–नेरचौक फोरलेन निर्माण कंपनी पर 10,050 रुपये का जुर्माना
जंगल क्षेत्र में सरकारी वन भूमि पर मिला है 2 घन मीटर अवैध मलबा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन पर डडनाल जंगल क्षेत्र में अवैध मलबा डंपिंग का मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए फोरलेन निर्माण कंपनी पर 10,050 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति की शिकायत के बाद की गई। मगर शिकायतकर्ता का कहना है कि आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में इससे जुड़ी तमाम सूचनाएं नहीं दी गईं हैं।
समिति ने मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत पर विशेष सचिव के माध्यम से प्रिंसीपल चीफ कंजरवेटर वाइल्ड लाइफ धर्मशाला को जांच व उचित कार्रवाई के निर्देश दिए थे। शिकायत की प्रति वन मंडल अधिकारी बिलासपुर को भी भेजी गई थी। इसके पश्चात वन विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया, जिसमें डडनाल जंगल क्षेत्र में करीब 2 घन मीटर मलबा सरकारी/वन भूमि में अवैध रूप से डंप पाया गया। कार्रवाई के बावजूद वन विभाग की ओर से कई अहम जानकारियां साझा नहीं किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मलबा किस खसरा नंबर की भूमि पर डंप हुआ, सड़क विस्तार कर रही कंपनी का पूरा नाम व पता, मौके पर मौजूद वाहनों और मशीनरी का विवरण क्या था, तथा सड़क निर्माण से निकलने वाले मलबे की कुल क्षमता और उसे कहां डंप किया जाएगा, इसकी स्वीकृत डंपिंग साइटों की जानकारी क्या है। शिकायत में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि यह वह स्थान है जहां सड़क निर्माण कंपनी द्वारा बिना केंद्र को सूचित किए मूल अलाइनमेंट में बदलाव किया गया। इस क्षेत्र में हाल के समय में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और एक महिला घायल हुई है। करीब दो वर्ष से यहां वन-वे व्यवस्था लागू है, जबकि एनएचएआई पूरा टोल वसूल रहा है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद एनएचएआई यहां करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से सड़क विस्तार कार्य कर रही है, लेकिन विस्तार की लंबाई-चौड़ाई, कटने वाले पेड़ों की संख्या, फॉरेस्ट क्लीयरेंस और निर्माण से निकलने वाले मलबे के निस्तारण को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं की गई है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं है। पर्यावरण संरक्षण और आम लोगों की सुरक्षा के लिए पूरे मामले की पारदर्शी जांच और सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना जरूरी है।
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