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ब्लास्टिंग से दहले कुननू और बलोह गांव
ब्यूरो, अमर उजाला (बरमाणा (बिलासपुर)
Updated Fri, 24 Jun 2016 11:52 PM IST
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एसीसी सीमेंट फैक्टरी के माइनिंग जोन से सटे गांव कुननू और बलोह भारी ब्लास्टिंग से दहला गए हैं। गांवों के लोगों में दहशत का माहौल है। इस ब्लास्टिंग को इस वर्ष की सबसे भारी ब्लास्टिंग बताया जा रहा है। इससे उक्त गांवों की जमीन और मकान थरथरा उठे।
बीते वीरवार को दो बार बड़े-बड़े धमाके हुए। इससे लोगों को घरों से बाहर भागना पड़ा। शुक्रवार को भी जोरदार ब्लास्टिंग हुई। ब्लास्टिंग से कई मकान गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं। घरों में दरारें आ गई हैं। ब्लास्टिंग से बार-बार क्षतिग्रस्त हो रहे मकानों की मरम्मत करवाते ग्रामीण थक चुके हैं। काफी मकानों को दोबारा भी बनाया जा चुका है। लोगों का कहना है कि कंपनी ने मकानों का निरीक्षण करने के बावजूद क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत करने से साफ इंकार कर दिया है। लोगों का आरोप है कि पहाड़ी को अवैज्ञानिक तरीके से उड़ाया जा रहा है। इससे लोग दहशत में जी रहे हैं। प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
चार दिन पहले लोगों ने किया था धरना-प्रदर्शन
चार दिन पूर्व गांव के लोगों ने ब्लास्टिंग की समस्या को लेकर धरना-प्रदर्शन किया था। वैज्ञानिक तरीके से ब्लास्टिंग करने की मांग की थी। लेकिन, फिर से हुई भारी ब्लास्टिंग ने लोगों को भय के आगोश में ले लिया है।
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डर के साये में जी रहे लोग : भुवनेश गौतम
उधर, बीडीसी सदस्य भुवनेश गौतम और पंचायत सदस्य सुनील गौतम का कहना है कि यह ब्लास्टिंग इतनी जोरदार थी कि इस वर्ष के सारे रिकार्ड टूट गए हैं। ब्लास्टिंग के कारण क्षेत्र के लोगों में डर का माहौल पैदा हो गया है। क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि ब्लास्टिंग से क्षतिग्रस्त हुए घरों का निरीक्षण किया जाए तथा मकानों की मरम्मत करवाई जाए। लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए। अन्यथा ग्रामीणों को कड़े कदम उठाने के लिए बाधित होना पड़ेगा। जिसकी सारी जिम्मेवारी जिला प्रशासन व एसीसी कंपनी की होगी।
ब्लास्टिंग से ग्रामीण क्षेत्रों को नहीं कोई खतरा : पंकज नायर
इस बारे में एसीसी कंपनी के माइनिंग ऑफिसर पंकज नायर का कहना है कि ब्लास्टिंग डेंजर जोन के अंदर ही की जा रही है। लोग जमीन अधिग्रहण करवाने के लिए इस तरह की शिकायतें कर रहे हैं। जबकि, ब्लास्टिंग से ग्रामीण क्षेत्रों को कोई खतरा नहीं है।
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बीते वीरवार को दो बार बड़े-बड़े धमाके हुए। इससे लोगों को घरों से बाहर भागना पड़ा। शुक्रवार को भी जोरदार ब्लास्टिंग हुई। ब्लास्टिंग से कई मकान गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं। घरों में दरारें आ गई हैं। ब्लास्टिंग से बार-बार क्षतिग्रस्त हो रहे मकानों की मरम्मत करवाते ग्रामीण थक चुके हैं। काफी मकानों को दोबारा भी बनाया जा चुका है। लोगों का कहना है कि कंपनी ने मकानों का निरीक्षण करने के बावजूद क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत करने से साफ इंकार कर दिया है। लोगों का आरोप है कि पहाड़ी को अवैज्ञानिक तरीके से उड़ाया जा रहा है। इससे लोग दहशत में जी रहे हैं। प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
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चार दिन पहले लोगों ने किया था धरना-प्रदर्शन
चार दिन पूर्व गांव के लोगों ने ब्लास्टिंग की समस्या को लेकर धरना-प्रदर्शन किया था। वैज्ञानिक तरीके से ब्लास्टिंग करने की मांग की थी। लेकिन, फिर से हुई भारी ब्लास्टिंग ने लोगों को भय के आगोश में ले लिया है।
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डर के साये में जी रहे लोग : भुवनेश गौतम
उधर, बीडीसी सदस्य भुवनेश गौतम और पंचायत सदस्य सुनील गौतम का कहना है कि यह ब्लास्टिंग इतनी जोरदार थी कि इस वर्ष के सारे रिकार्ड टूट गए हैं। ब्लास्टिंग के कारण क्षेत्र के लोगों में डर का माहौल पैदा हो गया है। क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि ब्लास्टिंग से क्षतिग्रस्त हुए घरों का निरीक्षण किया जाए तथा मकानों की मरम्मत करवाई जाए। लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए। अन्यथा ग्रामीणों को कड़े कदम उठाने के लिए बाधित होना पड़ेगा। जिसकी सारी जिम्मेवारी जिला प्रशासन व एसीसी कंपनी की होगी।
ब्लास्टिंग से ग्रामीण क्षेत्रों को नहीं कोई खतरा : पंकज नायर
इस बारे में एसीसी कंपनी के माइनिंग ऑफिसर पंकज नायर का कहना है कि ब्लास्टिंग डेंजर जोन के अंदर ही की जा रही है। लोग जमीन अधिग्रहण करवाने के लिए इस तरह की शिकायतें कर रहे हैं। जबकि, ब्लास्टिंग से ग्रामीण क्षेत्रों को कोई खतरा नहीं है।