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Bilaspur News: किसानों ने ट्रैक्टर से बुवाई के लिए रेट तय करने की रखी मांग
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-गेहूं की बुवाई के लिए ट्रैक्टर चालक वसूल रहे मनमाने पैसे
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं उपमंडल के तहत किसानों ने प्रशासन से ट्रैक्टर से फसलों की बुवाई और थ्रेशिंग के रेट तय करने की मांग की है। किसानों का आरोप है कि वर्तमान में गेहूं की बुवाई के लिए ट्रैक्टर चालक मनमाने पैसे वसूल रहे हैं। जब पैसे कम करने की मांग की जाती है तो वह काम करने से ही मना कर देते हैं। इस कारण लोगों को मजबूरन उन्हें पैसे देने पड़ते हैं।
किसानों ने मांग की है कि प्रशासन एक सरकारी रेट लिस्ट तय करे, ताकि इन चालकों की मनमर्जी पर प्रतिबंध लगा सके। एक तरफ तो सरकार बड़े ताम झाम के साथ घोषणा करती है कि किसानों की आमदनी दोगुनी की जाएगी, लेकिन दिन-प्रतिदिन बढ़ रही महंगाई के कारण बीज, खाद और कीटनाशक के बढ़ते दामों के कारण खेती करना महंगा होता जा रहा है। ऊपर से ट्रैक्टर मालिकों की मनमर्जी से खेती करना मुश्किल हो गया है। क्षेत्र के किसान प्रताप सिंह, सुरजीत पटियाल, अंकुश वर्मा, अभिषेक, मदनलाल, दुर्गा दास, प्रेमलाल, रूपलाल सहित अन्य का कहना है कि हर बार फसलों की बुवाई और थ्रेशिंग के समय क्षेत्र के ट्रैक्टर चालक किसानों से मनमाने पैसे वसूलते हैं। किसानों का कहना है कि जहां पिछले साल ट्रैक्टर मालिकों ने खेत की बुवाई के लिए 800 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से लिए थे, वहीं इस बार 1000 से 1100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जबकि रोटावेटर के साथ बुवाई करने के 1200 से 1300 रुपये तक प्रति घंटे के हिसाब से वसूल किए जा रहे हैं। इससे किसानों की समस्या बढ़ गई है। खेती की लागत बढ़ने से सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ रहा है।
दूसरी ओर ट्रैक्टर संचालकों का कहना है कि डीजल, मोबिलआयल, स्पेयर पार्ट्स और अन्य उपकरण के दामों में लगातार वृद्धि हो रही है। साथ ही ट्रैक्टर रिपेयर करने वाले लोगों की भी मजदूरी बढ़ गई है। यही कारण है कि खेत जुताई का किराया बढ़ गया है। आखिर वह कैसे सस्ती बुवाई करेंगे। इस तरह खेतों की बुवाई की बात हो या फिर थ्रेशिग की बढ़ती महंगाई के कारण उन्हें रेट बढ़ाने पड़ रहे हैं। किसान चिंतित हैं कि इतनी महंगी खेती कर लागत खर्च भी कैसे निकाल पाएंगे।
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कोट
सरकार द्वारा किसानों को ट्रैक्टर सब्सिडी पर उपलब्ध करवाया जाता है, ताकि वह अपने खेतों की बुवाई कर सकें साथ ही किसी दूसरे के खेत की बुवाई करना उनकी आपसी सहमति से होता है। इसके लिए प्रशासन रेट तय नहीं करता है।
गौरव चौधरी, एसडीएम घुमारवीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं उपमंडल के तहत किसानों ने प्रशासन से ट्रैक्टर से फसलों की बुवाई और थ्रेशिंग के रेट तय करने की मांग की है। किसानों का आरोप है कि वर्तमान में गेहूं की बुवाई के लिए ट्रैक्टर चालक मनमाने पैसे वसूल रहे हैं। जब पैसे कम करने की मांग की जाती है तो वह काम करने से ही मना कर देते हैं। इस कारण लोगों को मजबूरन उन्हें पैसे देने पड़ते हैं।
किसानों ने मांग की है कि प्रशासन एक सरकारी रेट लिस्ट तय करे, ताकि इन चालकों की मनमर्जी पर प्रतिबंध लगा सके। एक तरफ तो सरकार बड़े ताम झाम के साथ घोषणा करती है कि किसानों की आमदनी दोगुनी की जाएगी, लेकिन दिन-प्रतिदिन बढ़ रही महंगाई के कारण बीज, खाद और कीटनाशक के बढ़ते दामों के कारण खेती करना महंगा होता जा रहा है। ऊपर से ट्रैक्टर मालिकों की मनमर्जी से खेती करना मुश्किल हो गया है। क्षेत्र के किसान प्रताप सिंह, सुरजीत पटियाल, अंकुश वर्मा, अभिषेक, मदनलाल, दुर्गा दास, प्रेमलाल, रूपलाल सहित अन्य का कहना है कि हर बार फसलों की बुवाई और थ्रेशिंग के समय क्षेत्र के ट्रैक्टर चालक किसानों से मनमाने पैसे वसूलते हैं। किसानों का कहना है कि जहां पिछले साल ट्रैक्टर मालिकों ने खेत की बुवाई के लिए 800 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से लिए थे, वहीं इस बार 1000 से 1100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जबकि रोटावेटर के साथ बुवाई करने के 1200 से 1300 रुपये तक प्रति घंटे के हिसाब से वसूल किए जा रहे हैं। इससे किसानों की समस्या बढ़ गई है। खेती की लागत बढ़ने से सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ रहा है।
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दूसरी ओर ट्रैक्टर संचालकों का कहना है कि डीजल, मोबिलआयल, स्पेयर पार्ट्स और अन्य उपकरण के दामों में लगातार वृद्धि हो रही है। साथ ही ट्रैक्टर रिपेयर करने वाले लोगों की भी मजदूरी बढ़ गई है। यही कारण है कि खेत जुताई का किराया बढ़ गया है। आखिर वह कैसे सस्ती बुवाई करेंगे। इस तरह खेतों की बुवाई की बात हो या फिर थ्रेशिग की बढ़ती महंगाई के कारण उन्हें रेट बढ़ाने पड़ रहे हैं। किसान चिंतित हैं कि इतनी महंगी खेती कर लागत खर्च भी कैसे निकाल पाएंगे।
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सरकार द्वारा किसानों को ट्रैक्टर सब्सिडी पर उपलब्ध करवाया जाता है, ताकि वह अपने खेतों की बुवाई कर सकें साथ ही किसी दूसरे के खेत की बुवाई करना उनकी आपसी सहमति से होता है। इसके लिए प्रशासन रेट तय नहीं करता है।
गौरव चौधरी, एसडीएम घुमारवीं