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Bilaspur News: घागस, स्वारघाट, हटवाड़ में आगे नहीं बढ़ी औद्योगिक क्षेत्र की कवायद

Sat, 26 Sep 2026 12:32 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Sep 2026 12:32 AM IST
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Efforts to develop industrial zones in Ghagus, Swarghat, and Hatwar have not progressed.
सतीश ठाकुर
हर उपमंडल में औद्योगिक क्षेत्र बनाने का था रोडमैप, डीपीआर के लिए बजट नहीं मिलने से अटकी योजना
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में फोरलेन बनने के बाद औद्योगिक विकास की संभावनाएं बढ़ीं, लेकिन करीब तीन साल पहले शुरू की गई नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की कवायद अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी है। घागस, स्वारघाट और हटवाड़ में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों की प्रक्रिया अलग-अलग कारणों से अटक गई। घागस में करीब 1800 बीघा भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना थी। उद्योग विभाग की टीम ने स्थल का निरीक्षण भी किया, लेकिन डीपीआर तैयार करने के लिए बजट नहीं मिल सका। इसके बाद योजना आगे नहीं बढ़ी। वर्ष 2023 में तत्कालीन उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने जिले में औद्योगिक विस्तार का रोडमैप तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। सभी उपमंडलाधिकारियों को 500 से 1000 बीघा तक जमीन चिह्नित करने के निर्देश दिए गए थे। इसका उद्देश्य जिले के अलग-अलग हिस्सों में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना था। इसी दौरान घागस में करीब 1800 बीघा जमीन की संभावना सामने आई थी।स्वारघाट में नेशनल हाईवे के साथ करीब 100 बीघा जमीन तलाशने की कवायद हुई। नयना देवी तहसील के तहत री पंचायत के करनाला और कैंची मोड़ के आसपास जमीन देखी गई। राजस्व विभाग की रिपोर्ट में सामने आया कि उपलब्ध जमीन का बड़ा हिस्सा पहले से अन्य विभागों के नाम दर्ज है। पर्याप्त खाली जमीन नहीं मिलने से प्रक्रिया अटक गई। हटवाड़ में भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की संभावनाएं तलाशी गई थीं। जमीन चयन के बाद आगे की प्रक्रिया गति नहीं पकड़ सकी। ऐसे में तीनों स्थानों पर प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों की कवायद प्रारंभिक चरण से आगे नहीं बढ़ पाई। जिले में उद्योगों की संख्या सीमित होने के कारण बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए बद्दी, नालागढ़ और प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों का रुख करते हैं। फोरलेन के बाद बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध होने से औद्योगिक निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं, लेकिन जमीन चिह्नित करने, डीपीआर और बजट की प्रक्रिया पूरी न होने से योजनाएं लंबित हैं। लंबित योजनाओं को लेकर महाप्रबंधक उद्योग मनोज सकलानी से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन वह उपलब्ध नहीं हुए।
इनसेट
बिलासपुर में पर्याप्त औद्योगिक इकाइयां नहीं होने के कारण युवाओं को रोजगार के लिए बद्दी, नालागढ़ और प्रदेश के दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है। स्थानीय युवाओं की उम्मीद है कि जिले में नए उद्योग स्थापित हों तो उन्हें घर के आसपास ही रोजगार मिल सके।
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अभिषेक ठाकुर, अधिवक्ता
इनसेट
औद्योगिक क्षेत्र आए तो पलायन रुके
युवाओं का कहना है कि नौकरी के लिए दूसरे जिलों में जाना केवल रोजगार का मामला नहीं है। इससे रहने, आने-जाने और परिवार से दूर रहने का खर्च भी बढ़ता है। जिले में उद्योग स्थापित होने से युवाओं को स्थानीय स्तर पर विकल्प मिल सकते हैं।
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सतीश ठाकुर, पूर्व प्रधान बंदला
इनसेट
तकनीकी पढ़ाई के बाद भी बाहर तलाशते हैं नौकरी
जिले के कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के सामने स्थानीय स्तर पर सीमित अवसर हैं। तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद भी कई युवाओं को अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी के लिए दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों में जाना पड़ता है।

आयुष, नेता, छात्र संघ
इनसेट
तीन साल से योजनाओं के धरातल पर आने का इंतजार
युवाओं का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजनाएं तभी रोजगार में बदलेंगी, जब जमीन, डीपीआर और बजट की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी होगी। केवल जमीन चिह्नित करने या योजना बनाने से रोजगार के अवसर पैदा नहीं होंगे।
सूर्या, युवा

सतीश ठाकुर

सतीश ठाकुर

सतीश ठाकुर

सतीश ठाकुर

सतीश ठाकुर

सतीश ठाकुर

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