फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   education news.

गुणा-भाग तक नहीं जानते पांचवीं कक्षा के छात्र

Wed, 24 Feb 2016 11:03 PM IST
राजकुमार सेन / अमर उजाला, बिलासपुर।
राजकुमार सेन / अमर उजाला, बिलासपुर। Updated Wed, 24 Feb 2016 11:03 PM IST
विज्ञापन
education news.

बिलासपुर जिला के 10 फीसदी स्कूलों के बच्चे पढ़ाई में फिसड्डी, शिक्षा उपनिदेशक के निरीक्षण में सामने आया सच

विज्ञापन

जिला के 10 फीसदी सरकारी स्कूलों के छात्र पढ़ाई में फिसड्डी हैं।

हालत यह है कि पांचवीं कक्षा के छात्र गुणा और भाग करना ही नहीं जानते और सातवीं कक्षा के छात्र प्रतिशत निकालने में असमर्थ हैं।

यही नहीं सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर कैसा है इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि पहली कक्षा के बच्चों को वर्णमाला के शब्द जोड़ने तक नहीं आते।

इसका खुलासा शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक के जिला भर के स्कूलों में किए औचक निरीक्षण में हुआ है। शिक्षा की गुणवत्ता सहित स्कूलों की व्यवस्था को लेकर शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक ने  लगभग 200 स्कूलों का औचक निरीक्षण किया।
विज्ञापन


औचक निरीक्षण में शिक्षा उपनिदेशक को जिला के 10 फीसदी स्कूलों के छात्र पढ़ाई में फिसड्डी मिले। जबकि 90 फीसदी स्कूलों के छात्रों की हालत संतोषजनक पाई गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


औचक निरीक्षण के दौरान पढ़ाई में पिछड़ रहे बच्चों की स्थिति सुधारने के लिए शिक्षा उपनिदेशक ने स्कूलों के मुखियों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

विदित रहे कि शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक ने विभागीय टीम के साथ पिछले दो-तीन महीनों से लगतार स्कूलों में औचक निरीक्षण कर रहे हैं।

इस दौरान शिक्षा उपनिदेशक छात्रों से कक्षाओं में जाकर छात्रों का बौद्धि स्तर जानने के लिए उनसे सवाल-जवाब भी किए। इसमें दस फीसदी सरकारी स्कूलों के बच्चे पढ़ाई में कमजोर पाए गए।

ऐसे में मार्च माह में होने वाली वार्षिक परीक्षाओं में इन छात्रों के भविष्य के प्रति चिंतित होना भी स्वाभाविक है। हालांकि शिक्षा उपनिदेशक ने स्कूलों के मुखियों को शिक्षा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न करने के कड़े निर्देश दिए हैं।


 इस दौरान शिक्षा उपनिदेशक ने दोबारा स्कूलों में औचक निरीक्षण करने की बात भी दोहराई है। शिक्षा विभाग की चलाई शिक्षा की गुणवत्ता की मुहिम कितनी सार्थक होगी, यह तो मार्च माह में निकलने वाले परिणामों में ही पता चलेगा।

लेकिन, कुछ दिनों बाद वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने के बाद पढ़ाई में कमजोर बच्चे कितना सुधार करते हैं। इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed