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Bilaspur News: सड़क के अभाव में कुर्सी पर बिठाकर प्रसव पीड़िता को पहुंचाया अस्पताल

Tue, 29 Oct 2024 11:35 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Oct 2024 11:35 PM IST
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Due to lack of road, the delivery victim was taken to the hospital by making her sit on a chair.
घुमारवीं के पनौल बाग में सड़क सुविधा न होने से लोगों में भारी रोष-बच्चों को सड़क तक लाने के लिए दो किलोमीटर चलना पड़ता है पैदल
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संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। घुमारवीं उपमंडल के तहत आने वाली पनौल पंचायत के गांव पनौल बाग में प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को एंबुलेंस तक इसलिए नसीब नहीं हो पाई। क्योंकि उसके घर तक आज भी सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके बाद परिवार वालों ने महिला, बच्चे की जान बचाने के लिए उसे कुर्सी पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाया।
पीड़ित महिला को हमीरपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां फिलहाल जच्चा बच्चा दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन परिवार वालों को महिला को घर पहुंचने के लिए फिर से कुर्सी का सहारा लेना पड़ा। इस घटना से क्षेत्र में विकास के दावे वाले जनप्रतिनिधियों की पोल खोल दी है। आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के अभाव में लोगों को एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। एक तरफ देश डिजिटल इंडिया की तरफ बढ़ रहा है, पर कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां आज भी विकास की किरण नहीं पहुंची हैं। ऐसा ही हाल इस गांव का है। हैरानी इस बात की है कि इस गांव की दूरी ब्लॉक मुख्यालय से मात्र चार किलोमीटर है। यहां के ग्रामीण आज भी बीमार बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए कुर्सी का सहारा लेते हैं। क्योंकि मरीज को पालकी भी नसीब नहीं होती। कारण है कि पालकी उठाने वाले लोगों के लिए भी सीधा चलने के लिए ढंग का रास्ता तक नसीब नहीं है।
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यहां पर करीब आधा दर्जन परिवार सड़क सुविधा के लिए कई बार सरकार और अधिकारियों के आगे गुहार लगा चुके हैं। गांव में ऐसे कई बुजुर्ग हैं जिनकी पूरी उम्र अधिकारियों के आगे सड़क बनाने की मांग करते गुजर गई। इसके बावजूद आज तक प्रशासन ने गांव में सड़क निर्माण के लिए कोई कदम नहीं उठाया। पक्की सड़क न होने के कारण बच्चों को स्कूल ले जाने, छोड़ने के लिए गांव में कोई वाहन नहीं पहुंच पाता है। यही कारण है कि बच्चों को दो किलोमीटर दूर रोड तक पैदल आना पड़ता है। गांव के लोगों का कहना है कि अब वह सड़क सुविधा पाने के लिए अनशन पर बैठने को मजबूर हो जाएंगे। सुंका राम, ज्ञानचंद, रतनलाल, सुनीता देवी ,मीरा देवी, भोला देवी ने कहा कि इस गांव के लिए महज दो किलोमीटर सड़क का निर्माण होना है। सड़क के न बनने से यहां के ग्रामीण अव्यवस्था, सरकारी उपेक्षा का दंश झेलने को मजबूर हैं। बीते चुनावों से पहले उनके साथ वोटों की राजनीति की गई। वोट पाने के लिए जेसीबी सड़क निर्माण के लिए लाई गई, लेकिन सड़क का निर्माण तो नहीं हो पाया, लेकिन यहां के लोगों का बरसों पुराना पैदल रास्ता था उसका अस्तित्व मिटा दिया गया।
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कोट
यह जगह फॉरेस्ट वायलेशन के अंतर्गत आती है। यहां सड़क निर्माण के लिए वन विभाग की एनओसी आनी है। साथ ही ग्रामीण अगर अपनी जमीन सड़क बनाने के लिए गिफ्ट डीड विभाग के नाम कर दें तो कार्य हो सकता है।
- अनुज पाराशर, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग, घुमारवीं
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