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एम्स बिलासपुर : आठ डॉक्टरों को मिली नियुक्ति, गैस्ट्रो, सीटीवीएस में हाथ खाली
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एक्सक्लूसिव
सुपर स्पेशलिटी विभागों को नहीं मिल रहे एसआर, पद भरना बना चुनौती
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने को हर माह हो रहे साक्षात्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर में सुपर स्पेशलिटी विभागों गैस्ट्रो, सीटीवीएस और कार्डियो के पदों को भरना चुनौती बन गया है। बड़ी बात यह है कि कई बार साक्षात्कार के बाद भी संस्थान गैस्ट्रो की ओपीडी शुरू करने में कामयाब नहीं हो पाया है। गैस्ट्रो के मरीजों को मेडिसिन विशेषज्ञ ही सेवाएं दे रहे हैं। वहीं गंभीर स्थिति वालों को अन्य संस्थानों का रुख करना पड़ रहा है।
हाल ही में संस्थान ने कई पद भरने के लिए साक्षात्कार आयोजित किए लेकिन अन्य विभागों के आठ विशेषज्ञ तो मिल गए, लेकिन अहम विभागों का एक भी विशेषज्ञ नहीं मिला। वहीं, स्वास्थ्य सुविधाओं को विस्तार देने और डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए प्रशासन ने एक नई रणनीति तैयार की है। संस्थान में अब सीनियर रेजिडेंट्स की भर्ती के लिए साल में एक या दो बार नहीं, बल्कि हर महीने साक्षात्कार आयोजित किए जा रहे हैं। यह फैसला संस्थान में रिक्त पड़े पदों को जल्द से जल्द भरने के उद्देश्य से लिया गया है। हाल ही में 5 जनवरी को आयोजित की गई भर्ती प्रक्रिया के परिणाम सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार इस प्रक्रिया के माध्यम से करीब 8 से 9 सीनियर रेजिडेंट्स को नियुक्तियां दी गई हैं। मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स (बाल रोग), सर्जरी, ऑर्थोपेडिक और ऑप्थल्मोलॉजी (नेत्र रोग)। महत्वपूर्ण विभाग जैसे गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी और कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, कार्डियोलॉजी के लिए इस बार भी कोई योग्य उम्मीदवार नहीं मिल सका, जिससे इन विभागों में विशेषज्ञों का इंतजार बढ़ गया है।
एम्स बिलासपुर में सीनियर रेजिडेंट्स की भारी कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आंकड़ों के नजरिए से देखें तो स्थिति यह है कि संस्थान के पास कुल 200 सीनियर रेजिडेंट्स के पद स्वीकृत हैं। इसमें सीधी भर्ती और सुपर स्पेशलिटी पीजी कोर्स के पद शामिल हैं। वर्तमान में संस्थान में केवल 40 सीनियर रेजिडेंट्स सेवाएं दे रहे हैं। संस्थान ने पहले ही स्पष्ट किया है कि सीनियर रेजिडेंट्स की यह नियुक्तियां तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए होती हैं। कुल 200 सीटों का गणित यह है कि यह नंबर बिल्कुल सीधे नहीं है, क्योंकि इसमें वे छात्र भी शामिल होते हैं जो सुपर स्पेशलिटी में पीजी कर रहे हैं। उन्हें भी सीनियर रेजिडेंट का ही दर्जा दिया जाता है। बताते चलें कि हर महीने भर्ती होने से मेडिसिन और सर्जरी जैसे विभागों में ओपीडी और ऑपरेशन की प्रतीक्षा सूची कम होने की उम्मीद है। हालांकि गैस्ट्रो और सीटीवीएस जैसे विभागों में विशेषज्ञों का न आना अभी भी बिलासपुर और आसपास के जिलों के मरीजों के लिए चिंता का विषय है।
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सुपर स्पेशलिटी विभागों को नहीं मिल रहे एसआर, पद भरना बना चुनौती
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने को हर माह हो रहे साक्षात्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर में सुपर स्पेशलिटी विभागों गैस्ट्रो, सीटीवीएस और कार्डियो के पदों को भरना चुनौती बन गया है। बड़ी बात यह है कि कई बार साक्षात्कार के बाद भी संस्थान गैस्ट्रो की ओपीडी शुरू करने में कामयाब नहीं हो पाया है। गैस्ट्रो के मरीजों को मेडिसिन विशेषज्ञ ही सेवाएं दे रहे हैं। वहीं गंभीर स्थिति वालों को अन्य संस्थानों का रुख करना पड़ रहा है।
हाल ही में संस्थान ने कई पद भरने के लिए साक्षात्कार आयोजित किए लेकिन अन्य विभागों के आठ विशेषज्ञ तो मिल गए, लेकिन अहम विभागों का एक भी विशेषज्ञ नहीं मिला। वहीं, स्वास्थ्य सुविधाओं को विस्तार देने और डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए प्रशासन ने एक नई रणनीति तैयार की है। संस्थान में अब सीनियर रेजिडेंट्स की भर्ती के लिए साल में एक या दो बार नहीं, बल्कि हर महीने साक्षात्कार आयोजित किए जा रहे हैं। यह फैसला संस्थान में रिक्त पड़े पदों को जल्द से जल्द भरने के उद्देश्य से लिया गया है। हाल ही में 5 जनवरी को आयोजित की गई भर्ती प्रक्रिया के परिणाम सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार इस प्रक्रिया के माध्यम से करीब 8 से 9 सीनियर रेजिडेंट्स को नियुक्तियां दी गई हैं। मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स (बाल रोग), सर्जरी, ऑर्थोपेडिक और ऑप्थल्मोलॉजी (नेत्र रोग)। महत्वपूर्ण विभाग जैसे गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी और कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, कार्डियोलॉजी के लिए इस बार भी कोई योग्य उम्मीदवार नहीं मिल सका, जिससे इन विभागों में विशेषज्ञों का इंतजार बढ़ गया है।
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एम्स बिलासपुर में सीनियर रेजिडेंट्स की भारी कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आंकड़ों के नजरिए से देखें तो स्थिति यह है कि संस्थान के पास कुल 200 सीनियर रेजिडेंट्स के पद स्वीकृत हैं। इसमें सीधी भर्ती और सुपर स्पेशलिटी पीजी कोर्स के पद शामिल हैं। वर्तमान में संस्थान में केवल 40 सीनियर रेजिडेंट्स सेवाएं दे रहे हैं। संस्थान ने पहले ही स्पष्ट किया है कि सीनियर रेजिडेंट्स की यह नियुक्तियां तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए होती हैं। कुल 200 सीटों का गणित यह है कि यह नंबर बिल्कुल सीधे नहीं है, क्योंकि इसमें वे छात्र भी शामिल होते हैं जो सुपर स्पेशलिटी में पीजी कर रहे हैं। उन्हें भी सीनियर रेजिडेंट का ही दर्जा दिया जाता है। बताते चलें कि हर महीने भर्ती होने से मेडिसिन और सर्जरी जैसे विभागों में ओपीडी और ऑपरेशन की प्रतीक्षा सूची कम होने की उम्मीद है। हालांकि गैस्ट्रो और सीटीवीएस जैसे विभागों में विशेषज्ञों का न आना अभी भी बिलासपुर और आसपास के जिलों के मरीजों के लिए चिंता का विषय है।
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