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वैष्णो देवी हादसे के चलते रविवार को श्री नयनादेवी में कम संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
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मां नयना देवी जी के दरबार में माथा टेकने जाते श्रद्धालु।एक तरफ तो प्रशासन श्रद्धालुओं को सुविधा?
- फोटो : BILASPUR
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श्री नयनादेवी जी (बिलासपुर)। विश्व विख्यात तीर्थ स्थल श्री नयना देवी जी में नव वर्ष मेले पर वैष्णो देवी हादसे का असर दिखने लगा है। रविवार को मेले और नये साल के पहले रविवार को श्रद्धालुओं की संख्या में काफी गिरावट दर्ज की गई।
पिछले दिनों की अपेक्षा काफी कम संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। ज्यादा भीड़ न होने के कारण मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने बिना किसी धक्कामुक्की और परेशानी के मां के दर्शन किए। हालांकि, लंबे रास्ते से बाबा की कुटिया होते हुए मंदिर भेजे जाने के कारण बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को परेशानी का भी सामना करना पड़ा।
बता दें कि श्री नयनादेवी जी में भी वर्ष 1983 व 2008 में हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में कई लोगों को जवान गंवानी पड़ी थी। वर्ष 2008 में श्रावण अष्टमी मेले के दौरान अफवाह फैलने के कारण भगदड़ मची थी। भगदड़ में लगभग 147 श्रद्धालुओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। इस हादसे का दिन रविवार था। इससे पहले 1983 में भगदड़ मचने के कारण मेले के दौरान लगभग 60 यात्रियों की मौत हो गई थी।
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पिछले दिनों की अपेक्षा काफी कम संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। ज्यादा भीड़ न होने के कारण मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने बिना किसी धक्कामुक्की और परेशानी के मां के दर्शन किए। हालांकि, लंबे रास्ते से बाबा की कुटिया होते हुए मंदिर भेजे जाने के कारण बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को परेशानी का भी सामना करना पड़ा।
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बता दें कि श्री नयनादेवी जी में भी वर्ष 1983 व 2008 में हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में कई लोगों को जवान गंवानी पड़ी थी। वर्ष 2008 में श्रावण अष्टमी मेले के दौरान अफवाह फैलने के कारण भगदड़ मची थी। भगदड़ में लगभग 147 श्रद्धालुओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। इस हादसे का दिन रविवार था। इससे पहले 1983 में भगदड़ मचने के कारण मेले के दौरान लगभग 60 यात्रियों की मौत हो गई थी।
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