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Bilaspur News: जिले में 200 औद्योगिक इकाइयां, फिर भी नौकरी के लिए बद्दी-नालागढ़, ऊना जाना मजबूरी
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औद्योगिक क्षेत्र बिलासपुर। संवाद
उद्योगों में रोजगार का संकट, दो साल में बिलासपुर के 31,797 पंजीकृत युवाओं में सिर्फ 785 को नौकरी
कछुआ चाल से चल रहा 1976 में शुरू औद्योगिक विकास
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में उद्योग होने के बावजूद रोजगार तलाश रहे हजारों युवाओं के सामने संकट बना हुआ है। जिला रोजगार कार्यालय में पंजीकृत 31,797 युवाओं में से पिछले दो वर्षों में निजी और सरकारी क्षेत्र में महज 785 युवाओं को रोजगार मिला है। नतीजा यह कि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने के कारण जिले के युवाओं को नौकरी के लिए बद्दी, नालागढ़ और ऊना जैसे औद्योगिक क्षेत्रों का रुख करना पड़ रहा है।
बिलासपुर में 1976 में औद्योगिक क्षेत्र बनाया गया। इसके बाद ग्वालथाई समेत अन्य क्षेत्रों में भी औद्योगिक गतिविधियां बढ़ीं। आज जिले में करीब 200 औद्योगिक प्लाट और 200 से अधिक छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। इसके बावजूद उद्योग स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का मजबूत आधार नहीं बन सके। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने के कारण बिलासपुर के युवाओं को नौकरी के लिए बद्दी, नालागढ़ और ऊना जैसे औद्योगिक क्षेत्रों का रुख करना पड़ रहा है। कई युवा 10 से 15 हजार रुपये मासिक शुरुआती वेतन पर काम कर रहे हैं। बाहर रहकर नौकरी करने पर इसी वेतन से कमरे का किराया, खाना और आने-जाने का खर्च भी उठाना पड़ता है जिस कारण उन्हें जीवन-यापन मुश्किल हो रहा है।
उद्योग बढ़े, लेकिन स्थानीय रोजगार उस गति से नहीं बढ़ा
बिलासपुर और ग्वालथाई में उद्योगों के लिए जमीन होने के बावजूद सभी औद्योगिक प्लाट और इकाइयां इतनी सक्रिय नहीं हैं कि ज्यादा रोजगार पैदा हो सके। युवाओं का कहना है कि अगर बिलासपुर के औद्योगिक क्षेत्रों में उनकी योग्यता के अनुरूप नियमित रोजगार के अवसर उपलब्ध हों तो उन्हें दूसरे जिलों में जाकर नौकरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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झंडूता, घुमारवीं, घाघस और स्वारघाट के प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र नहीं चढ़े सिरे
जिले के अलग-अलग हिस्सों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने के लिए झंडूता के बरसंड, घुमारवीं के भगदरोग, सदर के घाघस और श्री नयना देवी जी के स्वारघाट में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजनाएं प्रस्तावित थीं। इन योजनाओं में सर्वे तो आगे बढ़े, लेकिन बजट के अभाव में औद्योगिक क्षेत्र धरातल पर विकसित नहीं हो सके। नतीजा यह है कि जिले के अलग-अलग हिस्सों के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर नए रोजगार केंद्र तैयार नहीं हो पाए।
औद्योगिक क्षेत्र विकसित होगा तो रोजगार बढ़ेगा
लघु उद्योग संघ बिलासपुर के महामंत्री इंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि बिलासपुर में औद्योगिक विकास को गति देने की जरूरत है। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाएं बेहतर हों और नए उद्योग स्थापित हों तो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। सरकार को उद्योगों की समस्याओं का समाधान करने के साथ प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों को भी धरातल पर लाने की दिशा में काम करना चाहिए।
कोट
युवाओं को रोजगार से जोड़ रहे
पिछले दो वर्षों में निजी और सरकारी क्षेत्र में 785 युवाओं को रोजगार मिला है। रोजगार मेलाें, कैंपस इंटरव्यू और निजी कंपनियों में युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया करवाए जा रहे हैं। प्रयास है कि अधिक से अधिक युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार से जोड़ा जाए। - राजेश मेहता, जिला रोजगार अधिकारी
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कछुआ चाल से चल रहा 1976 में शुरू औद्योगिक विकास
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में उद्योग होने के बावजूद रोजगार तलाश रहे हजारों युवाओं के सामने संकट बना हुआ है। जिला रोजगार कार्यालय में पंजीकृत 31,797 युवाओं में से पिछले दो वर्षों में निजी और सरकारी क्षेत्र में महज 785 युवाओं को रोजगार मिला है। नतीजा यह कि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने के कारण जिले के युवाओं को नौकरी के लिए बद्दी, नालागढ़ और ऊना जैसे औद्योगिक क्षेत्रों का रुख करना पड़ रहा है।
बिलासपुर में 1976 में औद्योगिक क्षेत्र बनाया गया। इसके बाद ग्वालथाई समेत अन्य क्षेत्रों में भी औद्योगिक गतिविधियां बढ़ीं। आज जिले में करीब 200 औद्योगिक प्लाट और 200 से अधिक छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। इसके बावजूद उद्योग स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का मजबूत आधार नहीं बन सके। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने के कारण बिलासपुर के युवाओं को नौकरी के लिए बद्दी, नालागढ़ और ऊना जैसे औद्योगिक क्षेत्रों का रुख करना पड़ रहा है। कई युवा 10 से 15 हजार रुपये मासिक शुरुआती वेतन पर काम कर रहे हैं। बाहर रहकर नौकरी करने पर इसी वेतन से कमरे का किराया, खाना और आने-जाने का खर्च भी उठाना पड़ता है जिस कारण उन्हें जीवन-यापन मुश्किल हो रहा है।
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उद्योग बढ़े, लेकिन स्थानीय रोजगार उस गति से नहीं बढ़ा
बिलासपुर और ग्वालथाई में उद्योगों के लिए जमीन होने के बावजूद सभी औद्योगिक प्लाट और इकाइयां इतनी सक्रिय नहीं हैं कि ज्यादा रोजगार पैदा हो सके। युवाओं का कहना है कि अगर बिलासपुर के औद्योगिक क्षेत्रों में उनकी योग्यता के अनुरूप नियमित रोजगार के अवसर उपलब्ध हों तो उन्हें दूसरे जिलों में जाकर नौकरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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झंडूता, घुमारवीं, घाघस और स्वारघाट के प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र नहीं चढ़े सिरे
जिले के अलग-अलग हिस्सों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने के लिए झंडूता के बरसंड, घुमारवीं के भगदरोग, सदर के घाघस और श्री नयना देवी जी के स्वारघाट में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजनाएं प्रस्तावित थीं। इन योजनाओं में सर्वे तो आगे बढ़े, लेकिन बजट के अभाव में औद्योगिक क्षेत्र धरातल पर विकसित नहीं हो सके। नतीजा यह है कि जिले के अलग-अलग हिस्सों के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर नए रोजगार केंद्र तैयार नहीं हो पाए।
औद्योगिक क्षेत्र विकसित होगा तो रोजगार बढ़ेगा
लघु उद्योग संघ बिलासपुर के महामंत्री इंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि बिलासपुर में औद्योगिक विकास को गति देने की जरूरत है। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाएं बेहतर हों और नए उद्योग स्थापित हों तो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। सरकार को उद्योगों की समस्याओं का समाधान करने के साथ प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों को भी धरातल पर लाने की दिशा में काम करना चाहिए।
कोट
युवाओं को रोजगार से जोड़ रहे
पिछले दो वर्षों में निजी और सरकारी क्षेत्र में 785 युवाओं को रोजगार मिला है। रोजगार मेलाें, कैंपस इंटरव्यू और निजी कंपनियों में युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया करवाए जा रहे हैं। प्रयास है कि अधिक से अधिक युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार से जोड़ा जाए। - राजेश मेहता, जिला रोजगार अधिकारी