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मलबा डंपिंग मामला : 10 साल बाद भी एनएचएआई से नहीं हुई 50,400 रुपये की वसूली

Mon, 15 Dec 2025 11:41 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 15 Dec 2025 11:41 PM IST
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Debris dumping case: Even after 10 years, Rs 50,400 has not been recovered from NHAI.
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2015-16 में बिना स्वीकृति डंपिंग साइट पर क्षमता से ज्यादा पाया गया था मलबा
कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन में सुंदरनगर वन मंडल में हुई थी कार्रवाई

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन सड़क निर्माण के दौरान गोबिंद सागर झील के सहायक नालों में डंप किए गए मलबे को लेकर वन विभाग मंडल सुंदरनगर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2015-16 में बिना स्वीकृत डंपिंग साइट, पर बिना सुरक्षा दीवार के क्षमता से अधिक मलबा डंप करने पर वन विभाग ने सड़क निर्माण कंपनी पर 50,400 रुपये का जुर्माना लगाया था। इस राशि को जमा कराने की जिम्मेदारी सड़क निर्माण कंपनी की थी, जबकि इसकी पूर्ण जवाबदेही एनएचएआई के परियोजना निदेशक की थी।
वन विभाग की ओर से बार-बार पत्राचार करने के बावजूद एनएचएआई ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। हाल ही में वन मंडलाधिकारी सुंदरनगर कार्यालय से प्राप्त जानकारी में पहले यह बताया गया कि जुर्माने की राशि जमा हो चुकी है, लेकिन जब गासी नाले में डंप मलबे से जुड़े जुर्माने और उससे संबंधित दस्तावेज मांगे गए तो स्थिति इसके विपरीत सामने आई। सुकेत वन मंडल सुंदरनगर के जन सूचना अधिकारी एवं अधीक्षक (श्रेणी-II) महेंद्र सिंह ने आरटीआई के लिखित उत्तर में स्पष्ट रूप से इसकी पुष्टि की है। लिखा है कि 50,400 रुपये की मुआवजा राशि की वसूली अब तक एनएचएआई से लंबित है। मलबा उठाने, उसे चिह्नित डंपिंग साइट पर डालने से संबंधित कोई रिकॉर्ड कार्यालय के अभिलेखों में दर्ज नहीं है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव ने आरटीआई में इसकी जानकारी मांगी थी। जिसका यह उत्तर मिला है।
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मांगी गई सूचना में वन मंडलाधिकारी सुकेत ने अरण्यपाल वन वृत मंडी को भेजे गए पत्र संख्या 12983 दिनांक 14-03-2019 का हवाला दिया गया। आरटीआई दस्तावेजों के अनुसार गासी नाला व गमोहु क्षेत्र में सड़क निर्माण कंपनी ने 144 घन मीटर मलबा डंप किया गया था, जिसका मुआवजा 50,400 रुपये बनता है, जो वर्ष 2019 तक भी जमा नहीं हो पाया था। शिकायतकर्ता ने करीब 10 वर्ष की जानकारी मांगी थी, जिनके जवाब में यह दर्शाया गया कि कोई राशि बकाया नहीं है। लेकिन जब विशेष स्थल (गासी नाला) से संबंधित सूचना मांगी गई, तो जन सूचना अधिकारी के जवाब से स्पष्ट हो गया कि पिछले लगभग 10 वर्ष से विभाग एनएचएआई से यह राशि वसूल ही नहीं कर पाया। महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि वन मंडल कार्यालय सुंदरनगर की लापरवाही से एक निजी सड़क निर्माण कंपनी को गैरकानूनी लाभ मिला, जो जनहित, पर्यावरण संरक्षण और स्थापित नियमों के विरुद्ध है। गोबिंद सागर झील के सहायक नालों में मलबा डंप होने से पर्यावरणीय नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है।
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