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Bilaspur News: डीसी ने क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर के ओएसटी केंद्र का किया निरीक्षण
Sun, 29 Mar 2026 11:18 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 29 Mar 2026 11:18 PM IST
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क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर के ओएसटी केंद्र के भ्रमण पर पहुंचे उपायुक्त व अन्य अधिकारी। स्रोत:
लोगों को ओएसटी दवा के बारे में दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर के ओएसटी (ओपिओइड सब्स्टिटूशन थेरेपी) केंद्र का डीसी बिलासपुर राहुल कुमार ने निरीक्षण किया।
इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशि दत्त शर्मा, जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दीपक गुरंग भी साथ रहे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशि दत्त शर्मा ने बताया कि ओएसटी एक दवा है जिसे जीभ के नीचे रखकर लेते हैं। इसे विश्व स्तर पर ओपिओइड निर्भरता के प्रभावी उपचार और नुकसान कम करने की रणनीति के रूप में मान्यता प्राप्त है। ओएसटी में अवैध, असुरक्षित ओपिओइड दवाओं को जिन्हें इंजेक्शन के माध्यम से लिया जा सकता है, एक कानूनी दवा से प्रतिस्थापित किया जाता है जिसके गुण इंजेक्शन वाले ओपिओइड के समान होते हैं, लेकिन इसे लेने का तरीका अधिक सुरक्षित होता है। यह दवा डॉ. द्वारा निर्धारित की जाती है और परामर्शदाता की देखरेख में इस प्रकार दी जाती है कि ओपिओइड पर निर्भर नशा करने वालों को इसकी तलब या वापसी के लक्षण न हों। यह दवा नशा करने की इच्छा को शांत करती है, इसलिए नशा करने वाले नशा करना बंद कर देते हैं या कम कर देते हैं, जिससे एचआईवी, सिफलिस, हेपेटाइटिस बी व सी और अन्य रक्त जनित वायरस के संचरण का जोखिम कम हो जाता है। हालांकि, ओएसटी का लाभ एचआईवी और अन्य रक्त जनित वायरस की रोकथाम तक ही सीमित नहीं है। ओएसटी अन्य नशीली दवाओं से संबंधित नुकसानों को कम करने में भी सफल रहा है।
डीसी बिलासपुर राहुल कुमार ने बताया कि यह बहुत ही सराहनीय कदम है। उन्होंने लायुल ट्राइबल वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों से कहा कि ज्यादा से ज्यादा सुईयों के माध्यम से नशा करने वालों की पहचान कर उनको ओएसडी केंद्र में जोड़ें ताकि बिलासपुर को नशा मुक्त बनाया जा सके। इस अवसर पर लायुल ट्राइबल वेलफेयर एसोसिएशन बिलासपुर से परियोजना प्रबंधक राजेश शर्मा, ओएसटी परामर्शदाता नेहा, पूनम शर्मा, राहुल, जोगिंद्र आदि उपस्थित रहे।
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बिलासपुर। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर के ओएसटी (ओपिओइड सब्स्टिटूशन थेरेपी) केंद्र का डीसी बिलासपुर राहुल कुमार ने निरीक्षण किया।
इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशि दत्त शर्मा, जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दीपक गुरंग भी साथ रहे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशि दत्त शर्मा ने बताया कि ओएसटी एक दवा है जिसे जीभ के नीचे रखकर लेते हैं। इसे विश्व स्तर पर ओपिओइड निर्भरता के प्रभावी उपचार और नुकसान कम करने की रणनीति के रूप में मान्यता प्राप्त है। ओएसटी में अवैध, असुरक्षित ओपिओइड दवाओं को जिन्हें इंजेक्शन के माध्यम से लिया जा सकता है, एक कानूनी दवा से प्रतिस्थापित किया जाता है जिसके गुण इंजेक्शन वाले ओपिओइड के समान होते हैं, लेकिन इसे लेने का तरीका अधिक सुरक्षित होता है। यह दवा डॉ. द्वारा निर्धारित की जाती है और परामर्शदाता की देखरेख में इस प्रकार दी जाती है कि ओपिओइड पर निर्भर नशा करने वालों को इसकी तलब या वापसी के लक्षण न हों। यह दवा नशा करने की इच्छा को शांत करती है, इसलिए नशा करने वाले नशा करना बंद कर देते हैं या कम कर देते हैं, जिससे एचआईवी, सिफलिस, हेपेटाइटिस बी व सी और अन्य रक्त जनित वायरस के संचरण का जोखिम कम हो जाता है। हालांकि, ओएसटी का लाभ एचआईवी और अन्य रक्त जनित वायरस की रोकथाम तक ही सीमित नहीं है। ओएसटी अन्य नशीली दवाओं से संबंधित नुकसानों को कम करने में भी सफल रहा है।
डीसी बिलासपुर राहुल कुमार ने बताया कि यह बहुत ही सराहनीय कदम है। उन्होंने लायुल ट्राइबल वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों से कहा कि ज्यादा से ज्यादा सुईयों के माध्यम से नशा करने वालों की पहचान कर उनको ओएसडी केंद्र में जोड़ें ताकि बिलासपुर को नशा मुक्त बनाया जा सके। इस अवसर पर लायुल ट्राइबल वेलफेयर एसोसिएशन बिलासपुर से परियोजना प्रबंधक राजेश शर्मा, ओएसटी परामर्शदाता नेहा, पूनम शर्मा, राहुल, जोगिंद्र आदि उपस्थित रहे।
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