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आपदा प्रभावितों को राहत के लिए निर्धारित मापदंड नहीं सही : जम्वाल
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- बहुमंजिला मकान जमींदोज होने के बाद मिलने वाली राशि बहुत कम
-जमींदोज मकानों का 20, असुरक्षित भवनों का दिया जाए 12 लाख मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विधायक त्रिलोक जम्वाल ने प्रदेश सरकार द्वारा आपदा प्रभावितों को राहत के लिए निर्धारित मापदंडों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आपदा से कई लोग बेघर हो गए हैं। लोगों की कई-कई बीघा जमीन बर्बाद हो गई है।
उन्होंने कहा कि राहत के नाम पर सरकार ने अधिक से अधिक सवा लाख रुपये की राशि देने का प्रावधान किया है। जिन लोगों के बहुमंजिला मकान जमींदोज हो गए, अथवा ढहने के कगार पर पहुंच गए हैं, उनके लिए यह राशि ऊंट के मुंह में जीरे जैसी ही है। ऐसा करके सरकार उनके जख्मों पर मरहम लगाने के बजाए नमक छिड़क रही है। कहा कि हिमाचल में इस बार बरसात के मौसम में हुई तबाही ने सभी को झकझोर दिया है। सैकड़ों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। बड़ी संख्या में लाखों रुपये की लागत से बने ऐसे बहुमंजिला और अन्य रिहायशी मकान जमींदोज हो गए, जिन्हें लोगों ने जीवन भर की खून-पसीने की कमाई से बनाया था। इसी तरह दरारें आने या जमीन धंस जाने से कई मकान ढहने के कगार पर हैं। वे रहने के लिए असुरक्षित हो चुके हैं। कई लोगों के रसोईघरों, शौचालयों और गोशालाओं का भी यही हाल है। लोगों की कई-कई बीघा भूमि भी पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। उस पर मकान बनाना तो दूर, खेतीबाड़ी भी नहीं हो सकती।
जम्वाल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित किए गए मापदंडों के अनुसार आपदा प्रभावितों को अधिक से अधिक एक-सवा लाख रुपये की मदद मिल सकती है। सरकार बताए कि लाखों रुपये से बने मकान गंवा चुके आपदा प्रभावित क्या एक-सवा लाख रुपये में नया आशियाना बना सकते हैं। इतने से पैसे से तो जमींदोज हो चुके मकानों का मलबा तक नहीं उठाया जा सकेगा। राहत के नाम पर लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने के बजाए सरकार को लोगों की सही मायनों में मदद करनी चाहिए। धंसने से बर्बाद हुई जमीनों के एवज में लोगों को कम से कम एक-एक बीघा जमीन दी जाए। जमींदोज हो चुके मकानों के एवज में 20-20 लाख तथा जमीन धंसने या दरारें पड़ने से असुरक्षित हो चुके मकानों के एवज में 10 से 12 लाख रुपये की मदद का प्रावधान किया जाए।
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-जमींदोज मकानों का 20, असुरक्षित भवनों का दिया जाए 12 लाख मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विधायक त्रिलोक जम्वाल ने प्रदेश सरकार द्वारा आपदा प्रभावितों को राहत के लिए निर्धारित मापदंडों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आपदा से कई लोग बेघर हो गए हैं। लोगों की कई-कई बीघा जमीन बर्बाद हो गई है।
उन्होंने कहा कि राहत के नाम पर सरकार ने अधिक से अधिक सवा लाख रुपये की राशि देने का प्रावधान किया है। जिन लोगों के बहुमंजिला मकान जमींदोज हो गए, अथवा ढहने के कगार पर पहुंच गए हैं, उनके लिए यह राशि ऊंट के मुंह में जीरे जैसी ही है। ऐसा करके सरकार उनके जख्मों पर मरहम लगाने के बजाए नमक छिड़क रही है। कहा कि हिमाचल में इस बार बरसात के मौसम में हुई तबाही ने सभी को झकझोर दिया है। सैकड़ों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। बड़ी संख्या में लाखों रुपये की लागत से बने ऐसे बहुमंजिला और अन्य रिहायशी मकान जमींदोज हो गए, जिन्हें लोगों ने जीवन भर की खून-पसीने की कमाई से बनाया था। इसी तरह दरारें आने या जमीन धंस जाने से कई मकान ढहने के कगार पर हैं। वे रहने के लिए असुरक्षित हो चुके हैं। कई लोगों के रसोईघरों, शौचालयों और गोशालाओं का भी यही हाल है। लोगों की कई-कई बीघा भूमि भी पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। उस पर मकान बनाना तो दूर, खेतीबाड़ी भी नहीं हो सकती।
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जम्वाल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित किए गए मापदंडों के अनुसार आपदा प्रभावितों को अधिक से अधिक एक-सवा लाख रुपये की मदद मिल सकती है। सरकार बताए कि लाखों रुपये से बने मकान गंवा चुके आपदा प्रभावित क्या एक-सवा लाख रुपये में नया आशियाना बना सकते हैं। इतने से पैसे से तो जमींदोज हो चुके मकानों का मलबा तक नहीं उठाया जा सकेगा। राहत के नाम पर लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने के बजाए सरकार को लोगों की सही मायनों में मदद करनी चाहिए। धंसने से बर्बाद हुई जमीनों के एवज में लोगों को कम से कम एक-एक बीघा जमीन दी जाए। जमींदोज हो चुके मकानों के एवज में 20-20 लाख तथा जमीन धंसने या दरारें पड़ने से असुरक्षित हो चुके मकानों के एवज में 10 से 12 लाख रुपये की मदद का प्रावधान किया जाए।
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