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करयालग भूस्खलन पीड़ित परिवार हादसे के 52 दिन बाद भी बेघर

Wed, 09 Oct 2019 11:51 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Oct 2019 11:51 PM IST
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घुमारवीं(बिलासपुर)। घुमारवीं के कसारू पंचायत के गांव करयालग भूस्खलन पीड़ित परिवारों को उम्मीद थी कि बिलासपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री और भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा शायद उनका दर्द समझेंगे और 52 दिन से अपने घरों से बेघर हुए लोगों के पुनर्वास के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश देंगे। प्रभावितों को आशा थी कि मुख्यमंत्री करयालग गांव का दौरा करेंगे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। पीड़ित परिवार जब अपना दुखड़ा सुनाने के लिए मुख्यमंत्री से मिले तो मात्र औपचारिकता के लिए मुख्यमंत्री ने उन्हें दिलासा देकर टाल दिया।
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उल्लेखनीय है कि 52 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार व प्रशासन पीड़ितों के नाम जमीन उपलब्ध नहीं करवा पाया है। सर्दियां शुरू हो रही हैं। ऐसे में इतने लोगों का गुजारा गांव की सराय में कैसे होगा। प्रभावितों के बच्चे आने वाली भयंकर सर्दी को कैसे सहन करेंगे। यह चिंता हर किसी को कचोटे जा रही है लेकिन सरकार और जिला प्रशासन है कि वो राहत राशि के नाम पर 2 लाख रुपये देकर इस मामले से किनारा कर चुके हैं।
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प्रभावितों का कहना है कि हर मंच से सरकार के नुमाइंदे अपने भाषण में पीड़ितों का साथ देने के जो वायदे कर रहे हैं। हर वायदा पीड़ितों के साथ मात्र छलावा ही साबित हो रहे हैं। हादसे में पीड़ित सात परिवार पिछले 52 दिनों से गांव की सराय में जीवन बसर कर रहे हैं। आयेदिन जिला प्रशासन और सरकार के प्रतिनिधियों की राह ताकते हैं कि कोई आएगा और उनके रहने और खाने की स्थायी व्यवस्था करेगा लेकिन हर उम्मीद पर जैसे ग्रहण ही लग गया हो।
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ऐसे में सर्दी के मौसम ने दस्तक दे दी है। पीड़ितों को अब चिंता यह सताए जा रही है कि इस मौसम में वो अपने बच्चों के साथ बिना दरवाजे और खिड़कियों वाली सराय में कैसे समय बिताएंगे। प्रभावितों की बात सुनने वाला कोई नहीं है। ऐसे में वो जाएं तो कहां जाएं। बेबस लोग लाचार होकर नेताओं के हाथों की कठपुतली बनकर उनके वायदों पर पुनर्वास की आस लगाए बैठे हैं।

घुमारवीं एसडीएम शशिपाल शर्मा का कहना है कि पीड़ित परिवारों के प्रति प्रशासन हर तरह से मदद के लिए तैयार है। पीड़ित परिवारों को पटा पंचायत के गांव बलोह के गुग्गा मंदिर के पास जमीन दिखा दी है। सभी परिवारों ने अपनी सहमति जता दी है। इसके लिए फाइल तैयार कर के उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है, पर अभी उच्च अधिकारियों की स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
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