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Bilaspur News: प्रेरणा से जुड़ा होता है रचनात्मक लेखन, कंटेंट लेखन सूचना और उद्देश्य से
Mon, 28 Jul 2025 11:19 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 28 Jul 2025 11:19 PM IST
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घुमारवीं महाविद्यालय में रचनात्मक और कंटेंट लेखन पर आयोजित कार्यशाला में उपस्थित विद्यार्थी व अ
घुमारवीं कॉलेज में अंग्रेजी विभाग ने कार्यशाला का किया आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय घुमारवीं में अंग्रेजी विभाग ने रचनात्मक और कंटेंट लेखन विषय पर एक कार्यशाला लगाई। इसमें राजकीय शिक्षा महाविद्यालय धर्मशाला से डॉ. अभ्युदिता गौतम सिंघा ने स्रोत व्यक्ति के रूप में शिरकत की।
उन्होंने कहा कि क्रिएटिव राइटिंग लेखन की एक ऐसी शैली है जो लेखक की अवचेतन भावनाओं, मनोभावों, दृष्टिकोणों, पूर्वाग्रहों और अनुभवों से प्रेरणा लेती है। यह लंबे अकादमिक निबंधों से लेकर शेक्सपियर की कविताओं तक, विभिन्न विधाओं और रूपों को समाहित कर सकता है। रचनात्मक लेखन पूरी तरह से आपके मस्तिष्क में प्रवाहित रचनात्मक रस पर निर्भर करता है। यह जानकारी से कम और प्रेरणा से ज्यादा जुड़ा होता है। लोग अक्सर रचनात्मक लेखन को कल्पना से भ्रमित कर देते हैं, लेकिन लेखन की यह शैली काल्पनिक और गैर-काल्पनिक दोनों तरह की रचनाओं में समाहित है, बशर्ते इसमें भरपूर कलात्मक स्वतंत्रता हो। रचनात्मक लेखन पाठक की धारणा पर भी निर्भर करता है और धारणाएं अलग-अलग हो सकती हैं। रचनात्मक लेखन में रूपकों, अनुप्रास, अतिशयोक्ति आदि जैसे कई साहित्यिक उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। कंटेंट राइटिंग लेखन की एक ऐसी शैली है जो सूचना और उद्देश्य पर आधारित होती है। कंटेंट और रचनात्मक लेखन के बीच अंतर यह है कि कंटेंट राइटिंग का उद्देश्य किसी विशिष्ट उद्देश्य को पूरा करना या पाठकों तक महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाना होता है। आजकल कंटेंट राइटिंग आमतौर पर ऑनलाइन माध्यमों पर की जाती है। कंटेंट राइटिंग, व्यवसायों की मार्केटिंग, पीआर, बिक्री, कानूनी और अनुपालन गतिविधियों का एक हिस्सा है। कंटेंट का निर्माण व्यक्तिगत वेबसाइट या ब्लॉग पर भी किया जा सकता है। कार्यशाला में प्रो. रीना शर्मा, डॉ. चंचल शर्मा, डॉ. प्रवीण आदि उपस्थिति रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय घुमारवीं में अंग्रेजी विभाग ने रचनात्मक और कंटेंट लेखन विषय पर एक कार्यशाला लगाई। इसमें राजकीय शिक्षा महाविद्यालय धर्मशाला से डॉ. अभ्युदिता गौतम सिंघा ने स्रोत व्यक्ति के रूप में शिरकत की।
उन्होंने कहा कि क्रिएटिव राइटिंग लेखन की एक ऐसी शैली है जो लेखक की अवचेतन भावनाओं, मनोभावों, दृष्टिकोणों, पूर्वाग्रहों और अनुभवों से प्रेरणा लेती है। यह लंबे अकादमिक निबंधों से लेकर शेक्सपियर की कविताओं तक, विभिन्न विधाओं और रूपों को समाहित कर सकता है। रचनात्मक लेखन पूरी तरह से आपके मस्तिष्क में प्रवाहित रचनात्मक रस पर निर्भर करता है। यह जानकारी से कम और प्रेरणा से ज्यादा जुड़ा होता है। लोग अक्सर रचनात्मक लेखन को कल्पना से भ्रमित कर देते हैं, लेकिन लेखन की यह शैली काल्पनिक और गैर-काल्पनिक दोनों तरह की रचनाओं में समाहित है, बशर्ते इसमें भरपूर कलात्मक स्वतंत्रता हो। रचनात्मक लेखन पाठक की धारणा पर भी निर्भर करता है और धारणाएं अलग-अलग हो सकती हैं। रचनात्मक लेखन में रूपकों, अनुप्रास, अतिशयोक्ति आदि जैसे कई साहित्यिक उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। कंटेंट राइटिंग लेखन की एक ऐसी शैली है जो सूचना और उद्देश्य पर आधारित होती है। कंटेंट और रचनात्मक लेखन के बीच अंतर यह है कि कंटेंट राइटिंग का उद्देश्य किसी विशिष्ट उद्देश्य को पूरा करना या पाठकों तक महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाना होता है। आजकल कंटेंट राइटिंग आमतौर पर ऑनलाइन माध्यमों पर की जाती है। कंटेंट राइटिंग, व्यवसायों की मार्केटिंग, पीआर, बिक्री, कानूनी और अनुपालन गतिविधियों का एक हिस्सा है। कंटेंट का निर्माण व्यक्तिगत वेबसाइट या ब्लॉग पर भी किया जा सकता है। कार्यशाला में प्रो. रीना शर्मा, डॉ. चंचल शर्मा, डॉ. प्रवीण आदि उपस्थिति रहे।
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