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गोबिंद सागर झील में डंपिंग मामला : कंपनी ने हाईकोर्ट में जमा कराए 56.62 लाख
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एक्सक्लूसिव
पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की बकाया राशि जमा होने की हाईकोर्ट ने मांगी कार्यालय से रिपोर्ट, 27 अगस्त को अगली सुनवाई
प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी को लगाई थी 85.87 लाख पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंद सागर झील में रेलवे परियोजना के निर्माण के दौरान अवैध मलबा डंपिंग के मामले में हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान निर्माण कंपनी दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड ने बकाया 56 लाख 62 हजार 500 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि जमा कर दी है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय को जमा राशि की पुष्टि संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 27 अगस्त को होगी।
सुनवाई में कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 31 मार्च 2026 को दिए गए आश्वासन के अनुरूप शेष 56.62 लाख की राशि 15 जून 2026 को डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पक्ष में जमा करा दी गई है। इस संबंध में अदालत के समक्ष पत्र और डिमांड ड्राफ्ट की प्रति भी प्रस्तुत की गई। इस पर खंडपीठ ने हाईकोर्ट कार्यालय को निर्देश दिए कि वह जमा राशि के संबंध में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इसके बाद अदालत ने जनहित याचिका की अगली सुनवाई 27 अगस्त निर्धारित कर दी। इसी सुनवाई के साथ संबद्ध सीडब्ल्यूपी में राज्य सरकार की ओर से संशोधित याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। अदालत ने यह आग्रह स्वीकार करते हुए इस मामले की अगली सुनवाई भी 27 अगस्त को तय कर दी।
बताते चलें कि गोबिंद सागर झील के किनारे रेलवे परियोजना के निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर मलबा डंप किए जाने का मामला सामने आने पर हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच की थी। जांच में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पाए जाने के बाद बोर्ड ने निर्माण कार्य कर रही दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड कंपनी पर 85.87 लाख की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई थी।
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बोर्ड की ओर से हाईकोर्ट में दायर हलफनामे के अनुसार कंपनी ने 20 जुलाई 2024 को केवल 29.25 लाख ही जमा किए थे, जबकि 56.62 लाख की राशि लंबे समय से बकाया थी। इतना ही नहीं, कंपनी द्वारा 11 अगस्त 2025 को दायर हलफनामे में भी इस बकाया राशि का कोई उल्लेख नहीं किया गया था, जिस पर सवाल उठे थे। बाद में 20 जनवरी 2025 को अधिनिर्णय अधिकारी के आदेश की अनुपालन में हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी पर जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के तहत 15 लाख रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया। बोर्ड ने यह राशि 90 दिनों के भीतर पर्यावरण संरक्षण कोष में जमा करने के निर्देश दिए थे और चेतावनी दी थी कि भुगतान नहीं होने पर अधिनियम की धारा 45-ई(3) के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कंपनी ने बकाया 56.62 लाख अदालत में जमा करा दिए हैं। हालांकि अदालत ने अभी राशि जमा होने की औपचारिक पुष्टि नहीं मानी है और रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय से इसकी रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।
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पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की बकाया राशि जमा होने की हाईकोर्ट ने मांगी कार्यालय से रिपोर्ट, 27 अगस्त को अगली सुनवाई
प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी को लगाई थी 85.87 लाख पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंद सागर झील में रेलवे परियोजना के निर्माण के दौरान अवैध मलबा डंपिंग के मामले में हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान निर्माण कंपनी दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड ने बकाया 56 लाख 62 हजार 500 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि जमा कर दी है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय को जमा राशि की पुष्टि संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 27 अगस्त को होगी।
सुनवाई में कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 31 मार्च 2026 को दिए गए आश्वासन के अनुरूप शेष 56.62 लाख की राशि 15 जून 2026 को डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पक्ष में जमा करा दी गई है। इस संबंध में अदालत के समक्ष पत्र और डिमांड ड्राफ्ट की प्रति भी प्रस्तुत की गई। इस पर खंडपीठ ने हाईकोर्ट कार्यालय को निर्देश दिए कि वह जमा राशि के संबंध में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इसके बाद अदालत ने जनहित याचिका की अगली सुनवाई 27 अगस्त निर्धारित कर दी। इसी सुनवाई के साथ संबद्ध सीडब्ल्यूपी में राज्य सरकार की ओर से संशोधित याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। अदालत ने यह आग्रह स्वीकार करते हुए इस मामले की अगली सुनवाई भी 27 अगस्त को तय कर दी।
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बताते चलें कि गोबिंद सागर झील के किनारे रेलवे परियोजना के निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर मलबा डंप किए जाने का मामला सामने आने पर हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच की थी। जांच में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पाए जाने के बाद बोर्ड ने निर्माण कार्य कर रही दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड कंपनी पर 85.87 लाख की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई थी।
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बोर्ड की ओर से हाईकोर्ट में दायर हलफनामे के अनुसार कंपनी ने 20 जुलाई 2024 को केवल 29.25 लाख ही जमा किए थे, जबकि 56.62 लाख की राशि लंबे समय से बकाया थी। इतना ही नहीं, कंपनी द्वारा 11 अगस्त 2025 को दायर हलफनामे में भी इस बकाया राशि का कोई उल्लेख नहीं किया गया था, जिस पर सवाल उठे थे। बाद में 20 जनवरी 2025 को अधिनिर्णय अधिकारी के आदेश की अनुपालन में हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी पर जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के तहत 15 लाख रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया। बोर्ड ने यह राशि 90 दिनों के भीतर पर्यावरण संरक्षण कोष में जमा करने के निर्देश दिए थे और चेतावनी दी थी कि भुगतान नहीं होने पर अधिनियम की धारा 45-ई(3) के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कंपनी ने बकाया 56.62 लाख अदालत में जमा करा दिए हैं। हालांकि अदालत ने अभी राशि जमा होने की औपचारिक पुष्टि नहीं मानी है और रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय से इसकी रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।